रायगढ़। रायगढ़ में भाजपा प्रत्याशी गोमती साय ने बड़ी शानदार जीत दर्ज की है। वे शुरुआत से ही बढ़त बनाए हुई थीं। कांग्रेस प्रत्याशी लालजीत सिंह राठिया को कड़ी टक्कर देते हुए गोमती साय ने ये बड़ी जीत हासिल की हैं। बता दें कि, प्रारंभिक रुझानों में लालजीत ने अच्छी बढ़त के साथ शुरुआत की थी, लेकिन बाद में पीछे होते चले गए।

गौरतलब है कि रायगढ़ लोकसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके मंत्रिमंडल में शामिल रहे विष्णुदेव साय की प्रतिष्ठा दांव पर थी। छत्तीसगढ़ से एकमात्र मंत्री विष्णुदेव का टिकट काटकर पार्टी ने गोमती साय पर दांव खेला था।

गोमती ने पूरे प्रचार में पीएम मोदी के नाम पर वोट मांगा। ऐसे में भाजपा के स्थानीय नेताओं के साथ मोदी की साख दांव पर थी। विधानसभा चुनाव के आंकड़ों को देखे तो उसी के तर्ज पर लोकसभा चुनाव में वोटिंग हुई है। रायगढ़ लोकसभा की आठ में आठ सीट पर कांग्रेस विधायक हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रायगढ़ में चुनावी सभा की थी। भाजपा के वरिष्ठ नेताओं की मानें तो रायगढ़ सीट इसलिए भी प्रतिष्ठा की थी क्योंकि मोदी मंत्रीमंडल के एकमात्र मंत्री इस सीट से आते थे। पार्टी ने सांसद के खिलाफ एंटी इनकंबेंसी खत्म करने के लिए ही टिकट काटकर नए उम्मीदवार को मैदान में उतारा गया था। पिछले चार लोकसभा चुनाव से रायगढ़ में भाजपा की जीत हो रही है।

इसके अलावा रायगढ़ में 28 हजार से ज्यादा वोटरों ने भाजपा-कांग्रेस के अलावा दूसरी पार्टियों को भी नकार दिया था। लोकसभा का चुनाव हो या विधानसभा का करीब ढाई प्रतिशत मतदाताओं ने नोटा का बटन दबाया था। यही कारण है कि छत्तीसगढ़ की 11 लोकसभा में नोटा के मामले में रायगढ़ लोकसभा पांचवें नंबर पर था।

बीते लोकसभा चुनाव की ही बात करें तो 2014 में भाजपा के मौजूदा सांसद विष्णुदेव साय के साथ कांग्रेस की आरती सिंह मैदान में थी। इसके अलावा 8 और उम्मीदवार सांसद की कुर्सी के लिए चुनावी मैदान में उतरे थे। मतदान हुआ तो करीब ढाई प्रतिशत लोगों ने साय एवं आरती समेत सभी प्रत्याशियों को सीधे-सीधे नकार दिया था और मतदान के दिन ईवीएम में नोटा (इनमें से कोई नहीं ) का बटन दबाया था।

लोकसभा में उस वक्त डाले गए कुल वैध मतों की संख्या 12 लाख 46 हजार 135 थी। इसमें से विष्णुदेव साय ने 2 लाख 17हजार वोटों से जीत हासिल की थी। जबकि नोटा में उनको नकारने वालों की संख्या 28 हजार 478 थी। प्रदेश सभी 11 लोकसभा क्षेत्र में नोटा में डाले गए वोट का आंकलन करें तो रायगढ़ नोटा दबाने के मामले में 5वें नंबर पर रही है। पांच महीने पहले विधानसभा चुनाव हुए तो उसमें भी रायगढ़ लोकसभा अंतर्गत आने वाली 8 विधानसभाओं में नोटा की संख्या इससे भी आगे चली गई।

अब 10 की जगह 14 प्रत्याशी

2014 के लोकसभा चुनाव में रायगढ़ में कुल 10 प्रत्याशी मैदान में उतरे थे लेकिन इस बार इनकी संख्या बढ़कर 14 तक पहुंच गई थी। आयोग ने नोटा के लिए प्रचार प्रसार करने के निर्देश नहीं दिए हैं, इसलिए प्रशासन मतदाताओं की इसकी जानकारी नहीं दे रहा है और केवल मतदाता जागरूकता कार्यक्रम चलाकर वोट देने की अपील कर रहा है।