रायगढ़। फैक्ट्री प्रबंधन द्वारा कर्जा नहीं चुकाने की वजह से बैंक ने सख्ती सालासर पावर प्लांट अपने अधीन कर लिया। 11 अक्टूबर से प्लांट में ब्रेक डाउन कर दिया गया है। ऐसे में कर्मचारी त्यौहार के दिनों में बेरोजगार हो गए। बेरोजगारी की मार झेल रहे कामगार बकाया वेतन की मांग करते हुए फैक्ट्री के गेट के सामने प्रदर्शन कर रहे हैं।

विदित है कि सालासर फैक्ट्री में 15 और 65 का पावर प्लांट है। वही 100 यूनिट के दो स्पंज प्लांट है जिसे 27 सितम्बर को न्यायालय कंपनी एक्ट के आदेश के अनुसार बैंकों के अंडर टेक में आ चुका है। ऐसे होने के बाद नियमानुसार फैक्टरी किसी को वेतन आदि देयकों को भुगतान नही कर सकती क्योंकि अब इस पर आधिपत्य बैंक का हो जाता है।

उधर फैक्ट्री को सालासर प्रबंधन द्वारा 11 अक्टूबर से ब्रेक डाउन में डाल दिया है। उधर फैक्टरी के कामगारों के द्वारा वेतन के लिए फैक्ट्री के गेट के सामने धरने पर बैठ गए है।कामगारों का कहना है कि सिर पर त्यौहार है और फैक्टरी बन्द हो गई है हमारा वेतन नही मिलने से परिवार की स्थिति भूखों मरने की आ रही है।

इस मामले में सालासर प्रबंधन से बात किया तो उन्होंने बताया कि 27 सितम्बर को आदेश के बाद हमारा कोई अधिकार नही रह जाता है । किसी भी तरह के देयकों का भुगतान नही कर सकते यह बैंक को करना है।

वेतन भुगतान को लेकर हड़ताल की जानकारी बैंक प्रबंधन को दे दी गई । बचे वेतन या देयकों का भुगतान की जिम्मेदारी अब बैंकों की है। इस सम्बंध में अब मजदूर आरपार की एकजुटता से लड़ने की बात कहते हुए जिला कलेक्टर से इंसाफ की गुहार लगा रहे है।

80 लाख का मजदूर व सप्लायर भुगतान बाकी

प्लांट में काम करने वाले मजदूर छोटे ट्रांसपोर्ट से मिली जानकारी के मुताबिक अब तक सितंबर माह का मजदूर व छोटे मोटे सप्लायर का 80 लाख का भुगतान बकाया है। यह भुगतान कर्मचारियों के मुताबिक अधिक भी सकती है। वही सितंबर माह की सैलरी के लिए सैकड़ो मजदूर लामबंद हुए है। उन्हें मजदूरी भुगतान से अधिक रोजगार की चिंता सता रही है।

एक साल में तीन कंपनी गई बैंक के अधीन

विगत साल भर से देखा जाए तो उद्योग जगत की माली हालत सही नही है। जिसमें पहले तो मंदी फिर पूंजीपथरा क्षेत्र में मौजूद छोटे प्लांटों को बिजली सप्लाई नही होना है । इन सब के बीच बीते वर्ष वंदना स्टील, रामेश्वरम भी बैंक के अधीन हो चुके है।

Posted By: Nai Dunia News Network