रायगढ। कहते हैं कि पर्वत किसी से पक्षपात नहीं करते ना तो वह अमीरी गरीबी में, ना ही लड़का लड़की में और ना ही यह देखते हैं कि आप कितनी शिद्दत से उन पर फतह करने की कोशिश कर रहे हैं । पर्वत तो बस देखते हैं आप का जज्बा आपका जुनून आपका हौसला और आपकी मेहनत। इन्ही सोच के साथ पर्वतों को फतह कर भारत का झंडा बुलंद करने वाली पर्वतारोही रायगढ़ की बेटी एक बार फिर से नई मंजिल की ओर बढ़ रही है, इस बार याशी जैन अफ्रीका महाद्वीप के तंजानिया में मौजूद सबसे ऊंचा पर्वत माऊंट किलीमंजारो की चढ़ाई करेगी।

पर्वतारोही याशी ने अबतब दर्जनों पर्वतों में चढ़कर देश का नाम विश्व पटल में रख चुकी है वही अब याशी जैन की यात्रा 24 सितंबर से अफ्रीका के लिए होगा। वे रायपुर से दिल्ली होते हुए पहले इथोपिया पहुंचेंगी । और फिर आगे का सफर हवाई यात्रा से पुनः तंजानिया पहुंचंगी । इस बीच वह हफ्ते भर बाद अफ्रीका के महाद्वीप के तंजानिया में मौजूद सबसे ऊंचा पर्वत माऊंट किलीमंजारो जाएगी। याशी ने बताया कि छत्तीसगढ़ में 3 ही पर्वतारोही है, वह पर्वतारोहण की यात्रा लगभग 8 दिन मे पूरा करने का प्रयास करेंगी। ज्ञात हो कि हर साल इस पर्वत को चढ़ने के लिए 35 से 40 हजार पर्वतारोहण आते है । वही छत्तीसगढ़ की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता अमिता ने भी इसकी चढ़ाई 4 दिन 4 रात में पूरा कर अपना नाम गत वर्ष महिला दिवस के दिन स्वर्णिम अक्षरो में दर्ज करवाते हुए गढ़बो नवा छत्तीसगढ़ का नारा बुलंद कर चुकी है।यहां यह भी बताना लाजमी होगा कि पर्वतारोही याशी जैन पूर्व मे युरोप के हाईयेस्ट पीक माऊंट एल्ब्रस सहीत नेपाल के माऊंट आईलैंड पीक , लोबुचे पीक और भारत की कई पीक पर तिर॔गा और बेटी बचाओ बेटी पढाओ का परचम लहरा कर छत्तीसगढ और रायगढ का नाम रौशन कर चुकी है । वही वर्ष 2021 मे माऊंट एवरेस्ट को फतह करने की कोशिश कर चुकी है, जहां कैम्प 4 तक लगभग 8000 मीटर की ऊंचाई तक पहूँच गईं थीं । पर खराब मौसम के चलते मात्र 800 मीटर ऊंचाई की दूरी से लौटना पडा था।

बहरहाल अब एक बार फिर से नए मंजिल की जाने के लिए याशी के कदम बढ़ चुके है ऐसे में उन्हें रायगढ़ व छत्तीसगढ़ के अलग अलग हिस्से से शुभकामनाएं दे रहे है। वही याशी महिला उत्थान व महिला किसी से कम नही का झंडा भी बुलंद कर रही हैं।

पर्वत के भगौलिक स्थिति पर एक नजर

अफ्रीका का किलिमंजारो, अपने तीन ज्वालामुखीय शंकु, किबो, मवेन्ज़ी, और शिरा के साथ पूर्वोत्तर तंजानिया में एक निष्क्रिय स्ट्रैटोज्वालामुखी है और अफ्रीका का उच्चतम पर्वत है। जिसकी ऊंचाई समुद्र तल से 5,895 मीटर या 19,341 फीट है (उहरू शिखर / किबो शिखर), किलिमंजारो पर्वत दुनिया का सबसे ऊंचा मुक्त-खड़ा पर्वत है, साथ ही साथ विश्व का चौथा सबसे उभरा पर्वत है जो आधार से 5,882 मीटर या 19,298 फीट ऊंचा है।

वर्तमान में इसे टूरिज्म के रूप में प्रख्यात है।

याशी ने पहाड़ो में पाया विजयी

1. माउंट एवरेस्ट- 8000 मीटर तक, अप्रैल 2021 में दो बार प्रयास किया गया।

2. माउंट एल्ब्रस- यूरोप की सबसे ऊंची चोटी: 2019

3. माउंट आइलैंड पीक, नेपाल: 2020

4. माउंट लोबुचे ईस्ट, नेपाल: 2021

5. माउंट जोगिन 3, भारत: 2018

6. एवरेस्ट बेस कैंप, नेपाल: 2017

उपलब्धि पर ऐसे मिला सम्मान

वीरांगना पुरस्कार (पर्वतारोहण और महिलाओं में अनुकरणीय कार्य) राज्यपाल, छत्तीसगढ़ राज्य द्वारा सम्मानित किया गया।

तान्या पुरस्कार तान्या फाउंडेशन, रायगढ़ द्वारा प्रदान किया गया।

शहीद इंदिरा गांधी खेल पुरस्कार, कांग्रेस खेल प्रकोष्ठ छत्तीसगढ़ द्वारा प्रदान किया गया।

स्मृति ईरानी महिला एवं बाल विकास विभाग मंत्री से सम्मानित।

2018 में राइफल शूटिंग प्रतियोगिता में राज्य स्तरीय स्वर्ण पदक विजेता।

एनसीसी बेस्ट कैडेट अवार्डी- 2018।

बेटी बचाओ, बेटी पढाओ की रायगढ़ शहर में नगर निगम ने ब्रांड एंबेसडर बनाया।

छत्तीसगढ़ी आन- बान शान के साथ सातों महाद्वीप के सबसे ऊंचे पर्वतो पर हमारा प्यारा तिरंगा लहराऊं । दुनिया को बतलाऊं कि हम लड़कियां किसी कम नही है । छत्तीसगढ़ के प्रति मैं लोगों का नजरिया बदलना चाहती हूँ । हमारे लोगों का जोश , प्रतिभा , और मेहनत दुनिया के सामने लाना चाहती हूँ । मै महिलाओं की उन्नति और सशक्तिकरण के लिये काम करना चाहती हूँ । मै दिखाना चाहती हूँ कि हम छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया।

याशी जैन, पर्वतारोही

Posted By: Yogeshwar Sharma

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