रायगढ़ (नईदुनिया प्रतिनिधि)। ओडिशा प्रांत के प्रमुख त्योहार रथोत्सव की तरह शहर में भी कई जगहों पर रथयात्रा निकाली जाती है। इसके लिए सुबह से ही तैयारी की जा रही थी, लेकिन कोरोना के कहर के चलते केवल विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर पर्व मनाया गया। सुबह भगवान का विधि-विधान से पूजा-अर्चना करने के बाद महाप्रसाद का भोग लगाया गया। पूजा-पाठ के बाद श्रद्घालुओं के दर्शन के लिए भगवान को मंदिर परिसर के बाहर से ही दर्शन कराया गया।

कोविड 19 काल मे भगवान जगन्नाथ शाम करीब छह बजे भगवान को मौसी के घर ले जाने की तैयारी शुरू की गई। वर्षों से यह परंपरा रही है कि रथयात्रा के समय जब भगवान जगन्नाथ, सुभद्रा व बलराम को रथ में सवार करने के लिए ले जाया जाता है, तब राज परिवार के सदस्य अगुवाई करते हुए आगे-आगे झाडू लगाते हैं। इसी परंपरा का निर्वहन आज भी किया गया। भगवान की तीनों प्रतिकों को रथ के पास पहुंचाया गया। परिक्रमा करते हुए जगन्नाथ स्वामी, सुभद्रा व बलराम को रथ में सवार किया गया। इस दौरान पूरा क्षेत्र भगवान के जयघोष से गूंज रहा था। राज महल के अलावा शहर के अन्य जगहों में भी रथयात्रा आयोजन किया गया। श्रद्घालुओं द्वारा भगवान के रथ को उत्साह से खिचते हुए उनकी मौसी गुडिंचा के यहां लेकर गए।

यह है धार्मिक मान्यता

रथ यात्रा के पीछे धार्मिक मान्यता है कि लंबे समय से बीमार रहने के बाद आषाढ; के पहले दिन भगवान स्वस्थ होते हैं और आंखो खोलते हैं। इस दिन को नेत्र उत्सव के रूप में मनाया जाता है। स्वस्थ्य होने के बाद उन्हें घूमने की इच्छा होती है और वे अपनी मौसी के घर गुडिंचा जाते हैं। इस मान्यता के अनुसार भगवान की रथ यात्रा निकाली जाती है। शहर सहित नगर में इसका उत्साह लोगों के सिर चढ;कर बोलता है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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