सारंगढ़। (नईदुनिया न्यूज )

छत्तीसगढ़ में खरीफ फसल की समर्थन मूल्य में धान खरीदी विगत वर्ष 1 दिसम्बर से शुरू की गई थी लेकिन इस विपणन वर्ष में अब तक धान खरीदी की स्पष्ट तिथि निर्धारित सरकार ने नही किया है ऐसे में अनुमान लगाया जा रहा है कि इस बार भी धान खरीदी 1 दिसम्बर को ही शुरू की जायेगी इसके लिए पंजीयन की प्रक्रिया शुरू हो गई है सहकारी समितियों व तहसील कार्यालय एवं पटवारीयों के पास किसानों का बी1 खसरा निकालने दौड़ भाग चल रही है इसके साथ ही किसान आनलाईन भूईंया पोर्टल में शामिल खसरा के आधार पर खरीदी किये जाने की जानकारी मिलने पर स्वतः विलोपित हो रहे खसरा सुधार कराने बार बार पटवारियों के पास दौड़ रहे हैं। जिनको पटवारी बंधक भूमि में किसी भी प्रकार की सुधार कर पाने में अपनी असमर्थता जाहिर कर केसीसी या अन्य किसी भी प्रकार की ऋण चुकता कर बैंक बंधक छुड़वाने पर ही सुधार हो पाने की जानकारी किसानों को दे रहे हैं वहीं दूसरी ओर पटवारी भूईंया में सुधार करने के बाद पोर्टल से स्वतः विलोपित हो रहे डाटा एवं अन्य गड़बड़ीयों को अधिकारियों के संज्ञान में लाने के बाद भी पोर्टल की खामियों को सुधार कराने की कोई कारगर प्रयास न होने को लेकर चिंतित हैं। ऐसी हालात रही तो सारंगढ़ अनुविभाग के हजारों किसान जिनका पंजीयन विगत वर्ष सहकारी समितियों में हुआ है और वर्तमान में पोर्टल से कई खसरा गायब हैं उतने रकबा का धान सुधार नही हो पाने की स्थिति में बेच नही पायेंगे वहीं नये किसान जो इस खरीफ सीजन की उपज को विक्रय करने पंजीयन कराने की जुगत में लगे हैं पट्टा में शामिल पूरे खसरा का बी1 न निकल पाने से वंचित हो जायेंगे सोसायटी के पंजीयन साफ्टवेयर में वही रिकार्ड दर्शित हो रहे हैं जो रिकार्ड भूईंया पोर्टल में दर्ज है ऐसे यदि पटवारी सत्यापन कर के देता भी है तो सहकारी समिति उतने रकबा का ही पंजीयन कर पांयेगी जितना रकबा भूईंयां में दिखायेगा भले ही किसान के पास वास्तविक में जितना भी जमीन हो ।

पोर्टल में दर्जनों खामियां

1 खसरों का अपने आप ही दूसरे बसरे में शामिल हो जाना जिससे भूमिस्वामी विहीन खसरे बसरे स्वतः निर्मित हो जा रहे हैं।

2 खसरे का बटांकन होने पर नया बटा नंबर में 0 आ जा रहा है।

3 बटांकन किये गये खसरे का पुनः वापस मुल खसरा नंबर बन जाना।

4 पटवारी आईडी से बंधक खसरे का नामांतरण या बसरा संशोधन एवं विलोपन नही होना।

5 जाति के ऑप्शन में चन्द्रनाहू, सौंरा, पनिका माली सहित कई जातियों के नाम न आना।

6 पोर्टल प्रदर्शित ग्राम एवं वास्तविक ग्राम के नाम में अंतर होना।

7 खसरा, बी1 रिपोर्ट में राजस्व मण्डल के सभी नामों का न प्रदर्शित होना।

8 भूमि का मद स्वतः परिवर्तित हो जाना।

9 कई खसरा नंबरों का स्वतः ही शामिल खसरा के रूप में दिखना

10 खसरा नंबरों के बटांकन के बाद भी मूल खसरा नंबर का विलोपित न होना।

11 खसरा नबरों के बटांकन एवं विलोपन का विकल्प एक साथ एक ही बार में करना।

12 बिना प्रशिक्षित किये पटवारियों को आनलाईन काम करवाना।

किसानों के साथ अन्याय सहन नही करेंगें प्रशासन भूईंयां पोर्टल की गड़बड़ी को सुधार करे और सभी किसानों को पट्टे में दर्ज रकबा के आधार पर धान बेचने की सुविधा दे।

-सीता चिंता पटेल, जिला पंचायत सदस्य रायगढ़।

हमारे सोसायटी पंजीयन साफ्टवेयर में भूईंया में दर्ज खसरा के आधार पर पंजीयन हो रहा है किसान के पट्टे में शामिल हैं लेकिन पोर्टल में नही दिखने वाले खसरा का पंजीयन पटवारी के मेन्वली सत्यापन के बाद भी नहीं हो पा रहा है।

निराकार पटेल, प्रबंधक सेवा सहकारी समिति कनकबीरा

किसानों के रिकार्ड आनलाईन दुरूस्तिकरण में भूईंया साफ्टवेयर में आई तकनिकी गड़गड़ीयों के संबंध में उधााधिकारियों को ज्ञापन देकर अवगत कराया गया है।

दिलकुमार बंजारे, उपाध्यक्ष पटवारी संघ सारंगढ़।

कांग्रेस सरकार किसानों से कम से कम धान खरीदना चाहती है इसलिये आधे अधूरे तैयारी के साथ भुईंया पोर्टल में दर्ज रकबा के आधार पर पंजीयन करा रही है किसानों के रिकार्ड दुरुस्त नही किया गया तो हम किसानों की हित मे आगे और लड़ाई लड़ने तैयार हैं।

केराबाई मनहर, पूर्व विधायक सारंगढ़।

Posted By: Nai Dunia News Network

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