कोरबा (नईदुनिया प्रतिनिधि)। देश में चल रहे कोयला संकट से निपटने के तमाम कवायदों के बीच रेल मार्ग से कोयला आपूर्ति तो आंशिक रूप से बढ़ा दी गई है, पर अभी रोड सेल में चलने वाले ट्रेलरों को पर्याप्त कोयला नहीं मिल पा रहा। कुसमुंडा खदान से पिछले 25 दिन से एक ढेला कोयला नहीं दिया गया है। गेवरा व दीपका क्षेत्र में रोड सेल तो चल रहा, पर स्टाक नहीं होने की वजह से कोयला के नाम पर पत्थर व डस्ट दिया जा रहा। घटिया कोयला होने की वजह से ज्यादातर डीओ होल्डर खदान से कोयला उठाने से कतरा रहे। इसका असर लघु उद्योगों पर पड़ा है।

कोल इंडिया की सभा कंपनियों में सामान्य और व्यवसायिक उपयोग के लिए रोड सेल से कोयला की आपूर्ति की जाती है। साउथ इस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) में भी इस व्यवस्था को लागू करने के साथ संबंधित पार्टियों को उनके डीओ के आधार पर कोयला आवंटित किया जाता है। कोयले की कमी की वजह से कुसमुंडा खदान से रोड सेल बंद है। उधर गेवरा और दीपका क्षेत्र से डीओ होल्डरों को पिछले कुछ दिनों से कम कोयला मिल रहा। ऐसी स्थिति में उन्हें घटिया कोयला दिया जा रहा। कहा जा रहा है कि खदानों में रोड सेल को देने के लिए पर्याप्त स्टाक नही है। इसलिए किसी भी तरह खानापूर्ति करने के साथ काम चलाया जा रहा है। रोड सेल से प्राप्त होने वाले कोयला को जब संबंधित पार्टियों के पास भेजा जाता है, तो वह गुणवत्ता के आधार पर इसे रिजेक्ट कर देते हैं या फिर राख की मात्रा बता कर भुगतान में कटौती कर देते हैं।

गैर बिजली सेक्टरों को भी जारी रहेगा आपूर्ति

केंद्रीय कोयला मंत्री प्रल्हाद जोशी बुधवार को कोरबा पहुंचे और उनके दौर के बीच मंगलवार को एसईसीएल की ओर से जारी किया गया एक पत्र इंटरनेट मीडिया में वायरल हो गया। यह कहा गया कि कोयला संकट गहराने की वजह से एसईसीएल ने छत्तीसगढ़ के 250 से अधिक गैर पावर सेक्टरों को कोयले की आपूर्ति बंद कर दी है। इस मामले में एसईसीएल के जनसंपर्क अधिकारी डा सतीश चंद्र का कहना है कि प्रतिदिन कितना रैक चाहिए, इसके लिए पत्र रेल प्रबंधन को भेजा जाता है। मंगलवार को भी उसी परिपेक्ष्‌य में पत्र भेजा गया था, जिसमें स्पष्ट इस बात का उल्लेख था कि यह व्यवस्था केवल मंगलवार के लिए है। गैर पावर सेक्टरों में कोयला आपूर्ति बंद किए जाने की खबर भ्रामक रूप से फैलाई गई। सभी उद्योग को कोयला देने के लिए एसईसीएल प्रतिबद्ध है।

फिर 36 रैक में अटका

एसईसीएल ने 11 अक्टूबर को छह माह बाद 40 रैक कोयला परिवहन किया था। पर दूसरे दिन 12 अक्टूबर को संख्या घट कर 38 में अटक गई। तीसरे दिन 13 अक्टूबर को 36 रैक ही कोयला ही छत्तीसगढ़ समेत अन्य प्रदेश में स्थित विद्युत संयंत्र को रवाना हो सके। कोल इंडिया भले ही इन तीन दिनों में सर्वाधिक कोयला परिवहन का दावा कर रही, पर अभी हालात सुधरते नहीं दिख रहे। जानकारों का कहना है कि स्थिति सामान्य होने में अभी वक्त लगेगा।

तीनों महाप्रबंधक से मंत्री ने कहा- करो या जाओ

कोयला मंत्री प्रल्हाद जोशी बुधवार को कोरबा प्रवास के दौरान सार्वजनिक रूप से एसईसीएल के अधिकारियों को दो टूक कहा कि निर्धारित लक्ष्‌य के अनुसार कोयला का उत्पादन व डिस्पैच करें। वरना जाने के लिए तैयार रहे। भले ही हर सप्ताह निदेशक स्तर के अधिकारी खदानों में पहुंच रहे और उनकी निगरानी में ही कार्य चल रहा। बावजूद इसके कोयला मंत्री जोशी ने कुसमुंडा, गेवरा व दीपका के महाप्रबंधकों को कार्य में सुधार लाने की हिदायत दी है। प्रवास के दौरान जोशी के जिस तरह सख्त तेवर रहे, उससे अधिकारियों में हड़कंप मच गया है। अब उनके सामने करो या जाओ जैसी स्थिति है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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