रायगढ़ (नईदुनिया प्रतिनिधि) । छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग द्वारा आज कलेक्टोरेट परिसर में बैठक सह उन्मुखीकरण कार्यशाला का आयोजन किया गया। जिसमें आयोग की अध्यक्ष तेजकुंवर नेताम उपस्थित रही। आयोग की अध्यक्ष ने कहा कि जिले में नशा मुक्ति के लिए पूरी संजीदगी से प्रयास किए जाए ताकि कोई भी बधाा इस बुरी आदतों के चंगूल में न फंसे। उन्होंने कहा कि ऐसे बधो जो नशे की लत में आकर अपना जीवन बर्बाद कर रहे है, उन बधाों को इन बुरी आदत से बाहर निकाले। जिसके लिए सबसे पहले उन दुकानदारों पर निगरानी रखें, जिनके माध्यम से वे इन

सामग्रियों को खरीद रहे है।

आयोग को इस बात की शिकायत मिली है कि कुछ दुकानों में ऐसे सामग्रियों का विक्रय किया जा रहा है, उन दुकानों पर नजर रखें और उन पर कड़ी कार्यवाही करें। इस मौके पर आयोग के सदस्य पुष्पा पाटले, आशा यादव, सोनल कुमार गुप्ता, आगस्टिन बर्नाड, पूजा खनुजा एवं बृजेन्द्र सिंह ठाकुर उपस्थित रहे।

आयोग की अध्यक्ष नेताम ने कोविड के दौरान माता-पिता खोने वाले बधाों के संबंध में जानकारी ली। जिस पर संबंधित विभागीय अधिकारी ने बताया कि ऐसे 18 बधो जिन्होंने अपने माता एवं पिता दोनों खो चुके है उन्हें महतारी दुलार योजना अंतर्गत निश् शुल्क शिक्षा उपलब्ध कराया जा रहा है एवं छात्रवृत्ति भी प्रदाय की जा रही है। पीएम केयर योजना के माध्यम से उन्हें राशि प्रदाय किया गया है। साथ ही जिला कलेक्टर भीम सिंह की विशेष पहल पर रेडक्रास के माध्यम से एक-एक लाख रुपये प्रदाय किया गया है एवं उन बधाों को एक-एक जिला स्तरीय अधिकारी गोद लिए है। ऐसे सभी बधो अपने नजदीकी रिश्तेदार के यहां सुरक्षित है। उन बधाों के लिए स्वामी आत्मानंद स्कूल में स्पेशल सीट की व्यवस्था की गयी है।

आयोग की अध्यक्ष नेताम ने जिले में बाल विवाह, बाल श्रम एवं बाल अधिकारों से संबंधित स्थिति एवं उसके संबंध किए गए प्रयासों के बारे में जानकारी ली। उन्होंने सख्त हिदायत दी कि कहीं भी बाल विवाह एवं बाल श्रम के प्रकरण सामने न आए। उत्सव एवं शादी समय में इस पर विशेष निगरानी रखें। साथ ही स्पॉट पर जाकर देखें कि कहीं बाल श्रम तो नहीं हो रहा है, तभी वस्तुस्थिति का पता चल पाएगा। संबंधित अधिकारी ने जानकारी देते हुए बताया कि ग्राम स्तर पर संचालित बाल संरक्षण समितियों एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की सहायता से निगरानी रखी जा रही है तथा कोटवारों के माध्यम से बाल विवाह रोकथाम हेतु मुनादी करायी जा रही है। बाल श्रमिक की रोकथाम हेतु जिले में समय-समय पर रेस्क्यू कार्यक्रम चलाया जा रहा है।

आयोग की अध्यक्ष ने ऐसे स्कूलों में बधाों को न बैठाये उनके लिए अलग से वैकल्पिक व्यवस्था करायें। साथ ही सभी स्कूलों में बधाों के लिए खेल व्यवस्था सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि अगर स्कूल के आसपास नशीली वस्तुओं की बिक्री हो रही हो तो कोटपा एक्ट के प्रावधानों के तहत स्कूल परिसर एवं उसके आसपास के 100 मीटर के दायरे के अंदर से उक्त दुकान को दूसरी जगह पर स्थानांतरित करायें एवं अधिनियम का उल्लंघन करने वाले व्यक्ति अथवा प्रतिष्ठान के विरूद्घ कार्यवाही करना सुनिश्चित करें। विशेष आवश्यकता वाले बधाों के लिए उपलब्ध शिक्षा के संसाधनों की समीक्षा की। संबंधित विभागीय अधिकारी ने बताया कि जिले में विशेष आवश्यकता वाले बधाों के लिए किशोर न्याय अधिनियम के तहत नई उम्मीद बाल देखरेख संस्था संचालित है वर्तमान में संस्था में 57 बालक निवासरत है। उक्त बालकों की शिक्षा हेतु विशेष शिक्षक नियुक्त है जिनके द्वारा बधाों की क्षमता एवं आवश्यकतानुसार शिक्षा दी जाती है।

जिले में कुल आठ बाल देखरेख संस्था संचालित है, जिसमें बधाों के खेलकूद हेतु इंडोर व आउटडोर गेम की व्यवस्था की गयी है। जहां विभिन्न प्रकार की खेलकूद व अन्य गतिविधियों से जिला एवं राज्य स्तर पर आयोजन कर संस्था के बधाों को पुरस्कृत कर प्रोत्साहित किया जाता है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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