रायगढ़। मेडिकल कालेज अस्पताल के पोस्टमार्टम घर मे रखा फ्रीजर लगभग 8 माह से खराब पड़ा है। जिसमें शव को रखने से गर्मी की वजह से सड़ांध की बदबू से यहां कार्य करने वाले कर्मचारी से लेकर पुलिस कर्मियो को काफी दि-तों का सामना करना पड़ रहा है किंतु माकूल व्यवस्था बनाने के बजाए जिम्मेदार अधिकारी जिम्मेदारी से मुंह मोड़ लिए है।

गौरतलब हो कि गर्मी के मौसम में जब किसी अज्ञात शव को शिनाख्त के लिए रोका जाता है, तो शव से निकलने वाली दुर्गंध से सांस लेना भी मुश्किल हो जाता है। इस वजह से अस्पताल कर्मियों द्वारा मौखिक रूप से खराब फ्रिज के मरम्मत के लिए संबंधित अधिकारियों को कर्मचारियों द्वारा अवगत कराया जा चुका है लेकिन कोई भी इस तरफ ध्यान नहीं दे रहा है। इससे पोस्टमार्टम हाउस में तैनात कर्मचारियों को परेशानियों का सामना करना पड; रहा है। तो शव मि हालत खराब होने की आशंका भी बनी हुई है।

जिला उद्योगिक हब होने के कारण यहां आए दिन सडक़ दुर्घटना सहित कंपनियों में हो रहे हादसे के कारण हर दिन मेडिकल कालेज अस्पताल के मरच्यूरी में दो से तीन शव पहुंचता है। जिसे पोस्टमार्टम के लिए परिजनों के इंतजार में शव मरच्यूरी में लगे फ्रीजर में रखा जाता है ताकि शव खराब न हो सके। लेकिन दि-त यह है कि विगत कई माह से मरच्यूरी का फ्रीजर खराब पड;ा हुआ है। ऐसे में अब गर्मी की शुरूआत हो चुकी है, अगर तेज गर्मी पड;ेगी तो फ्रीजर नहीं चलने की स्थिति में शव भी खराब हो सकती है। जिससे अस्पताल के कर्मचारियों सहित परिजनों को भी दि-त का सामना करना पड; सकता है। व्यवस्था बदला नही बदला शव घर का फ्रिज

मुर्दा घर में शव रखने हेतु 3 फ्रीजर मौजूद हैं। सभी फ्रीजर बरसों पुराने होने के कारण अकसर ही खराब रहते है। अस्पताल सूत्रों के मुताबिक विभाग द्वारा एक निजी कंपनी से फ्रीजर ठीक करने हेतु अनुबंध किया हुआ है जो शिकायत मिलने के बाद फ्रीजर ठीक करने पहुंचती है। लेकिन अधिकारी वर्ग की उदासीनता के चलते उक्त कम्पनी मो सुचित सम्भवतः नही किया गया है इसी वजह से फ्रीजर ठीक नहीं करवाए है, जिस कारण स्थिति बंद से बदतर होती जा रही है।

हर वर्ष करोड़ो रुपये का फंड होता है आवंटित

शासन द्वारा जब से जिला अस्पताल को स्वर्गीय लखीराम मेमोरियल मेडिकल कालेज अस्पताल के नाम से संचालित किया जा रहा है तब से यहां अस्पताल के मरम्मत, रख रखाव, फर्नीचर समेत अन्य कार्यों के लिए करोड़ों रुपए का फंड आवंटित की जाती है, लेकिन इन फंडों में कभी भी मुर्दा घर को व्यवस्थित करने का कोई प्लान शामिल नहीं किया जाता है जिसका दंश वर्तमान जिले में मरने के बाद अस्पताल के शव घर मे रखे लाश झेल रहे है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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