धरमजयगढ़ (नईदुनिया न्यूज)

वनमण्डल धरमजयगढ़ क्षेत्र में हाथियों का उत्पात थमने का नाम नहीं ले रहा है। हाथी आए दिन गांवों में आ धमकते हैं और जान-माल को क्षति पहुंचाते हैं। सरकारी रिकार्ड के अनुसार यहां वर्ष 1996 में पहले-पहल हाथियों के आने की जानकारी है। इसके बाद यह वनमण्डल क्षेत्र हाथियों के अनुकूल होने के कारण लगभग स्थाई डेरा जैसा हो गया है। यह क्षेत्र हाथियों के लिए इतना अनुकूल है कि यहां प्रजनन भी कर रहे हैं और संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।

किसानों के लिए चिंता का सबब

हाथियों का झुण्ड क्षेत्र के किसानों की खड़ी फसल के लिए चिंता का सबब हैं। हाथी के आने की सूचना मात्र से किसानों के माथे पर चिंता की लकीर खींच जाती है। इन दिनों पिᆬर हाथियों का रुख खेतों की ओर होने लगा है। हाथियों के झुण्ड को खेतों में घुसने से रोकन को लेकर किसानों का प्रयास वन विभाग से सहयोग के बाद भी विफल साबित हो रहा है। हाथियों के लगातार फसल की ओर रुख करने से किसान काफी चिंतित हैं। दिन डूबते हाथियों के जंगल से निकलकर खेतों में आ धमकने से किसानों का खेती से मन उचटने लगा है। फसल उपजाने की पैतृक व्यवस्था से किसानों का मोह भंग होता जा रहा है।

विभाग की योजनाओं पर लगा ग्रहण

आबादी क्षेत्र में हाथियों का आमद रोकने के लिए वन विभाग वर्ष 2002 से ही योजनाए बनने में लगी है किन्तु कोई योजना धरातल पर कामयाब होता नजर नहीं आया। वनमण्डल में इतने अफसर आये और हाथियों को खदेडने का असपᆬल प्रयास कर चले गए। धरातल पर आज भी हाथी व मावन के बीच द्वन्द कामय है। करोड़ों रुपये खर्च कर हाथी व मानव के बीच के द्वंद को विभाग कम नहीं कर पा रहा है। सर्वप्रथम हाथियों को भगाने के लिए तेज आवाज का सहारा लिया गया और फटाखों में लाखों रुपये खर्च किए गए। इसके बाद दीगर प्रांतों से हाथी विशेषज्ञ की टीम को बुलाया गया, यह भी असपᆬल रही। ग्रामीणों द्वारा मिर्च का धुंआ और मशाल जैसे प्रयोग भी असफल रहे। कुमकी हाथी भी लाए गए लेकिन असफल रहे। तार फेसिंग के जरिये करेंट प्रवाह कर हाथियों को आबादी क्षेत्र में आने से रोकने का प्रयास भी पूरी तरह विफल रहा। अब लोगों को जंगल की ओर जाने से रोकने और नुक्क़ड नाटक के माध्यम से जागरूक करने जैसे प्रयास ही वन विभाग द्वारा किए जा रहे हैं।

वन मंडल क्षेत्र में 40 हाथी कर रहे हैं विचरण

वनमण्डल क्षेत्र के विभिन्ना रेंजों में 40 हाथी विचरण कर रहे हैं। वनमण्डल धरमजयगढ़ के छाल रेंज के बनहर, लोटान, हाटी व पुरूंगा क्षेत्र के जंगल में पांच नर हाथी और एक मादा के साथ एक शावक इन दिनों विचरण कर रहे हैं। वही धरमजयगढ़ रेंज के रुपुंगा में बारह हाथी में तीन नर छह मादा के साथ तीन शावक है। धरमजयगढ़ रेंज के गेरसा, ओंगना,पोटिया क्षेत्र में 20 हाथी विचरण कर रहे हैं। ओंगना में तीन नर, चार मादा और दो शावक विचरण कर रहे हैं। गेरसा पोटिया में छह नर, तीन मादा के साथ दो शावक विचरण कर रहे हैं। बाकारुमा रेंज के अंतर्गत धौराभाठा आरएफ 12 में एक मादा हाथी का होना बताया जा रहा है।

इन गांव में फसल को हाथियों से नुकसान

हाथियों द्वारा फसल क्षति की बात करें तो धरमजयगढ़ रेंज के रुपुंगा जंगल के आरएफ 459 ओंगना जंगल के आरएफ 393 व गेरसा जंगल के आरएफ 405 के आसपास के खेतों में लगी पᆬसल को हाथियों द्वारा नुकसान पहुंचाया गया है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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