पंकज दुबे, रायपुर (नईदुनिया)। छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित क्षेत्र के नाम से जाने जाना वाला बस्तर अब काफी के लिए भी जाना जाएगा, क्योंकि यहां के किसान काफी की फसल लेने लगे हैं। दरभा ब्लाक के 34 किसान खुद की बंजर जमीन में काफी की खेती कर रहे हैं। उद्यानिकी कालेज जगदलपुर के प्रोफेसर डा. केपी सिंह ने बताया कि सौ एकड़ जमीन में लगभग एक लाख अरेबिका व रोबस्टा किस्म के काफी के पौधे इसी माह (सितंबर) में रोपे गए। चार वर्ष बाद लगभग सात से 10 क्विंटल प्रति एकड़ पैदावार शुरू हो जाएगी।

फसल को तैयार करने में जो भी खर्च आ रहा है उसका वहन उद्यानिकी कालेज जगदलपुर और जगदलपुर जिला प्रशासन कर रहे हैं। किसानों को कुछ भी खर्च नहीं करना पड़ रहा है, बल्कि उन्हें मनरेगा के तहत मजदूरी भी मिलेगी। उत्पादन में भी उनकी हिस्सेदारी रहेगी।

पड़ोसी राज्यों से देखने आते हैं किसान

दरभा के पास कोलेंग मार्ग पर प्रयोग के तौर पर 2017 में लगभग 20 एकड़ में काफी के पौधे रोपे गए। इसकी गुणवत्ता की जांच के बाद बस्तर काफी के नाम से इसे स्थानीय बाजार में उतारा गया था। इस काफी की फसल को देखने के लिए पड़ोसी राज्यों- झारखंड, ओडिशा, बंगाल, तमिलनाडु, केरल के बड़े किसान बस्तर आते हैं। बताया गया है कि एक एकड़ में काफी की फसल लेने के लिए 80 हजार रुपये से लेकर एक लाख रुपये तक खर्च एक बार आता है। इसके बाद 30 वर्ष तक फसल आती रहती है।

प्रोसेसिंग यूनिट लगाने का प्रस्ताव

जगदलपुर के कलेक्टर रजत बंसल ने बताया कि बस्तर की भौगोलिक परिस्थिति और मौसम काफी की फसल के लिए अनुकूल है। इसके बेहतर उत्पादन की संभावनाओं को देखते हुए स्थानीय किसानों की भागीदारी बढ़ाई गई है। यहां काफी की प्रोसेसिंग यूनिट लगाने का भी प्रस्ताव है। जिला पंचायत के मुख्य कार्यकारी अधिकारी इंद्रजीत सिंह ने बताया कि बंजर जमीन को उपजाऊ बनाने में यह सफल प्रयास होगा। इससे किसान काफी उत्साहित हैं।

लगाए गए हैं अरेबिका व रोबस्टा के पौधे

इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डा. संजय पाटिल ने बताया की काफी की खेती से किसान हर साल 50 हजार प्रति एकड़ आमदनी कर सकते हैं। कृषि विश्वविद्यालय और कालेज के विशेषज्ञों का पूरा सहयोग किसानों को रहेगा। बस्तर में जो काफी के पौधे लगाए गए हैं, वह बेहतर किस्म के हैं।

2014 में पहली बार मनाया गया अंतरराष्ट्रीय काफी दिवस

साल 2014 में अंतरराष्ट्रीय काफी संगठन ने एक अक्टूबर को प्रत्येक साल अंतरराष्ट्रीय काफी दिवस मनाने का फैसला किया और पहली बार यह दिवस मनाया गया। यह दिवस काफी उत्पादक किसानों के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिए मनाया जाता है।

काफी के बारे में जानें मुख्य बातें

- इथियोपिया का बकरी चरवाहा काल्दी ने विश्व में सबसे पहले काफी बींस की खोज की।

- अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के अनुसार तेल के बाद काफी दुनिया की वह दूसरी उपयोगी वस्तु है, जिसका सबसे अधिक कारोबार किया जाता है।

- भारत विश्व का छठवां सबसे बड़ा काफी उत्पादक देश है। भारत विश्व की कुल चार प्रतिशत काफी का उत्पादन करता है।

Posted By: Nai Dunia News Network

नईदुनिया ई-पेपर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

नईदुनिया ई-पेपर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

डाउनलोड करें नईदुनिया ऐप | पाएं मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और देश-दुनिया की सभी खबरों के साथ नईदुनिया ई-पेपर,राशिफल और कई फायदेमंद सर्विसेस

डाउनलोड करें नईदुनिया ऐप | पाएं मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और देश-दुनिया की सभी खबरों के साथ नईदुनिया ई-पेपर,राशिफल और कई फायदेमंद सर्विसेस

ipl 2020
ipl 2020