रायपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

छोटे से सैंपल लेकर बड़ा खुलासा करने के मामले में असर संस्था हर साल छत्तीसगढ़ में रिपोर्ट प्रस्तुत कर रही है। इस साल प्रदेश के महासमुंद जिले में हुए सर्वे में असर की रिपोर्ट ने एक बार फिर बच्चों को पिछड़ा करार दिया है। रिपोर्ट का दावा है कि 40 प्रतिशत बच्चों को भावनाओं की समझ ही नहीं है। साथ ही वे पढ़ने-लिखने की समझ में कमजोर हैं।

महासमुंद में सर्वेक्षण करके असर की रिपोर्ट बताया कि आयु वर्ग 8 के केवल 60.5 प्रतिशत बच्चों ने ही प्राथमिक भावनाओं (खुशी, क्रोध, भय, उदास) की सही पहचान की थी, जबकि महासमुंद जिले के 62.4 प्रतिशत बच्चों ने चारों भावनाओं की सही पहचान की थी। इस प्रकार महासमुंद में आयु वर्ग के 8 बच्चों का सभी भावनाओं (खुशी, क्रोध, भय, उदास) की पहचान का प्रतिशत अन्य सभी सर्वेक्षित जिलों (राष्ट्रीय औसत) से भी अधिक है। लेकिन पढ़ना एवं सरल गणित हल कर पाने की दक्षता अभी भी हासिल नहीं कर पा रहे हैं।

मंत्री से कराया विमोचन

गुरुवार को स्कूल शिक्षा मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम ने अपने निवास कार्यालय में एन्युअल स्टेटस ऑफ एज्युकेशन रिपोर्ट (असर 2019ः अर्ली ईयर्स) का विमोचन किया। देश भर में किए गए सर्वेक्षण में महासमुंद के 60 गांवों के 1202 घरों का सैंपल लिया गया था। जिसमें 4 से 8 आयु वर्ग के लगभग 1503 बच्चों से बातचीत की गई है।

जहां माताएं पढ़ी-लिखी वहां अच्छी रिपोर्ट

असर टीम ने बताया कि जिन बच्चों की माताएं पढ़ी-लिखी हैं, उनके नामांकन की स्थिति और शैक्षणिक गतिविधियों में प्रदर्शन अन्य बच्चों की तुलना में बेहतर है। जिन बच्चों का संज्ञानात्मक विकास की गतिविधियों में प्रदर्शन अच्छा है । उनका प्रारंभिक भाषा और गणित में प्रदर्शन बहुत अच्छा दिखाई दे रहा है। इस आधार पर शिक्षा सत्र के शुरुआत में कुछ माह अकादमिक गतिविधियों के स्थान पर संज्ञानात्मक, सामाजिक और भावनात्मक विकास पर केंद्रित होना चाहिए। जिन बच्चों का आयु कके अनुरूप अपनी कक्षा में नामांकन हुआ है। उनका प्रदर्शन कम उम्र में नामांकन लेने वाले बच्चों की तुलना में बेहतर है।

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Posted By: Nai Dunia News Network

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