रायपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

महासमुंद जिले के पिथौरा थाना क्षेत्र में सालों पुरानी मूर्ति मिली है। मिली जानकारी के मुताबिक एक जनवरी को ग्रामीणों ने मूर्ति को जंगल में देखा था। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई। मौके पर पहुंची पुलिस ने मूर्ति को अपने कब्जे में लेकर मामले की जांच में शुरू कर दी है। इसके बाद 15 जनवरी को प्राचीनतम मूर्ति को महंत घासीदास संग्रहालय लाया गया, जहां मूर्ति का परीक्षण किया जा रहा है।

पिथौरा के जंगल में मिली यह मूर्ति समपादस्थानक मुद्रा में है। मूर्ति को देखकर ऐसा लग रहा है मानो तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ की है। इसका दाहिना हाथ खंडित है। मूर्ति के घुटने तक वस्त्र और कानों में कुंडल का अंकन मिलता है। वहीं मूर्ति के सिर के पीछे पांच फण युक्त नाग बना हुआ है। इसके दोनों हाथ घुटने तक हैं। पुरातत्व विभाग के अधिकारी और संग्रहाध्यक्ष प्रतापचंद पारख के मुताबिक काले रंग के ग्रेनाइट पत्थर से बनी दो फूट की यह मूर्ति करीब 500 साल पुरानी है। कुछ हिस्सों पर छेनी से वार किया गया है। विश्वविद्यालय के प्रोफेसर्स द्वारा एक बार पुनः मूर्ति की जांच की जाएगी।

चोरी कर लाने का संदेश

पिथौरा इलाके में ऐसा कोई भी इलाका नहीं है, जहां पर इस तरह की मूर्ति हो, किंतु मूर्ति की कला को देखकर माना जा रहा है कि उक्त मूर्ति संभवतः सिरपुर की हो सकती है। मूर्ति पर कुछ निशान नजर आ रहे हैं। इसके पीछे की ओर भी हथियार से खरोच के निशान हैं। इससे संदेह है कि मूर्ति को स्थापित स्थल से निकालने के लिए हथियार का प्रयोग किया गया होगा। लेकिन अभी स्पष्ट नहीं हो पाया है कि मूर्ति कहां की है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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