LockDown in Raipur रायपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। शौक से नशा, नशे की लत, बाद में पूरे घर की बर्बादी। यह स्थिति कई घरों में देखी गई है। जो नशा करता है वह यही कहता है कि नशा छोड़ना उसके बस की बात नहीं है। चाहे नशा तंबाकू का हो, बीड़ी-सिगरेट का हो या शराब का हर नशा खराब है। लॉकडाउन ने नशे की गिरफ्त में पहुंचे लोगों को लत से मुक्ति पाने का मौका दिया है। शराब दुकानें बंद हैं। सिगरेट-गुटखा मिल तो रहे हैं, लेकिन तीन गुना महंगा। निजी अस्पताल के डॉक्टर अमर शर्मा का कहना है कि नशे की गिरफ्त में सबसे ज्यादा युवा वर्ग है। क्योंकि यह वर्ग स्पर्धा में फंसा हुआ है, जिससे तनाव में है। इससे मुक्ति पाने के लिए नशे को अपना रहा है। इसका प्रभाव एक समय के बाद संबंधित के अलावा उसके परिवार पर पड़ता है।

लॉकडाउन से नशा करने वाले बेचैन जरूर होंगे, उन्हें संयम बरतना चाहिए। नशे को लेकर नईदुनिया ने विशेषज्ञों से बात की। उनका कहना है-नशा शब्द एक है, इसके रूप अलग-अलग हैं। सभी ब्रांड की सिगरेट में निकोटिन की मात्रा समान नहीं होती है। एक सिगरेट में निकोटिन की औसत मात्रा 10 से 12 मिलीग्राम होती है। लत के शिकार युवा एक दिन में आठ से 10 तक सिगरेट पी जाते हैं।

स्मोकिंग के नुकसान को ऐसे समझें

स्ट्रांग सिगरेट में निकोटिन की मात्रा 24 से 28 ग्राम तक हो सकती है। तंबाकू में मौजूद निकोटीन का सबसे अधिक प्रभाव व्यवहार पर पड़ता है। गैर-संचारी रोग (एनसीडी) जैसे हृदय रोग, कैंसर, मधुमेह, सांस की बीमारियां इत्यादि विश्व स्तर पर होने वाली मृत्यु का प्रमुख कारण हैं। ये रोग तंबाकू के सेवन से जुड़े हैं। डब्ल्यूएचओ के आंकड़ों के अनुसार भारत में हर वर्ष एनसीडी से होने वाली मृत्यु का अनुपात 53 प्रतिशत है।

योग और प्राणायाम से दूर करें नशे का दुष्प्रभाव

जिन्हें नशे की लत है, उन्हें नशा नहीं मिलता है तो कई इफेक्ट होते हैं। ये मानसिक और शारीरिक दोनों तरह के होते हैं। नशा न मिलने पर सबसे ज्यादा प्रभाव दिमाग पर पड़ता है। इसे योग से नियंत्रित कर सकते हैं। जब हम गुस्से में होते हैं तो सबसे पहले सांस उखड़ती है, ठीक इसी तरह हर क्रिया में श्वांस की महत्वपूर्ण भूमिका है। प्राणायाम के जरिए श्वांस को नियंत्रित कर सकते हैं। भ्रामरी, कपालभाति, अनुलोम, विलोम, भस्त्रिका जैसी नाड़ी शुद्ध करने वाली यौगिक क्रियाओं का अभ्यास करें। इसके साथ ही कुछ फिजिकल ब्रीदिंग प्रैक्टिस भी जरूरी है। इसमें ब्रीदिंग पादहस्तासन, एंकल स्ट्रेच ब्रीदिंग आदि उपयोगी हैं।

आर्थिक के साथ सामाजिक नुकसान भी

अक्सर थाने में कई तलाक के केस ऐसे आते हैं, जिनमें पत्नी सिर्फ पति की नशे की लत से परेशान होकर तलाक लेना चाहती है। पुलिस भी इस बात को मानती है कि लगभग अपराध नशे की हालत में ही किए जाते हैं। इसके सामाजिक दुष्प्रभावों के साथ आर्थिक नुकसान भी है। निम्न आय वर्ग के परिवार में यदि किसी को नशे की लत है तो वह अपनी आमदनी का आधे से ज्यादा हिस्सा नशा में खर्च कर देता है।

ये विकल्प आजमाएं : अल्कोहल के आदी सुबह उठकर नींबू पानी पी सकते हैं। सूखा नशा करने वाले प्रोटीन डाइट बढ़ा सकते हैं। ज्यादा दर्द की स्थिति में कुछ दवाओं का सहारा भी ले सकते हैं।

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