सरसींवा। एक ओर छत्तीसगढ़ सरकार किसानों के धान का एक-एक दाना समर्थन मूल्य पर खरीदने की बात कर रही है वहीं सरसींवा समिति के खरीदी केंद्रों में इस वर्ष सैकड़ों किसानों का लगभग 620 एकड़ रकबा घट गया है। इससे किसान आक्रोशित हैं एवं आंदोलन की बात कर रहे हैं। इधर प्रशासन किसानों का पूरा जमीन आनलाइन नहीं होने से रकबा घटने की बात कर रहा है। नायब तहसीलदार अश्वनी चंद्रा ने इस संबंध में बताया कि भुइयां आनलाइन में जैसा रकबा दर्ज है उसी हिसाब से रकबा घटा-बढ़ा है । सोमवार को भारी संख्या में किसानों ने स्थानीय सहकारी समिति में जाकर रकबा कम होने पर प्रदर्शन की, जिस पर रकबा घटे किसानों से एक-एक आवेदन देने का आग्रह किया गया।

ज्ञात हो कि गत वर्ष सरसींवा समिति के सभी चारों खरीदी केंद्रों सरसींवा, बालपुर, पेन्ड्रावन एव बम्हनपुरी में 4216 किसानों से 154 हजार 338 क्विंटल धान समर्थन मूल्य पर खरीदी गई और जिनका पंजीयन लगभग 4613 हेक्टेयर था । इस वर्ष पंजीकृत किसानों की संख्या बढ़कर 4875 हो गया है पर रकबा 4364 हेक्टेयर हो गया है। किसानों का कहना है कि पटवारी द्वारा गिरदावरी रिपोर्ट प्रमाण-पत्र देने के बाद भी रकबा कम होना एक सोचनीय विषय है। सरसींवा समिति ही नहीं वरन मनपसार, सोहागपुर एवं भटगांव समिति के अंतर्गत आने वाले खरीदी केंद्र के किसानों ने इस वर्ष रकबा कम होने की बात कही है। जबकि उनके द्वारा गत कई वर्षों से धान बेचा जा रहा है, पर इस वर्ष रकबा कम होना समझ से परे है।

स्थानीय समिति से प्राप्त जानकारी के अनुसार जयप्रकाश, किशन, प्रदीप खंडेलवाल, रमन इतवारी, चक्रधर, अनुज, आजुराम, भीमप्रसाद, रामेश्वर जैसे किसानों का पांच से 12 एकड़ रकबा कम हुआ है। प्रदीप खंडेलवाल ने बताया कि हम पंजीकृत किसान हैं और पिछले कई वषोर् से समर्थन मूल्य पर धान बेच रहे हैं। मैं पूर्व से ही पंजीकृत किसान हूं। इस वर्ष मेरे द्वारा संशोधन के लिए कोई आवेदन नहीं दिया गया है, उसके बाद भी मेरा गत वर्ष की तुलना में लगभग 11 एकड़ रकबा कम हो गया है। ऐसा क्यों हुआ अधिकारी भी नही बता पा रहे हैं । पुनः जोड़ने के लिए आवेदन पत्र समिति में जमा करवाया जा रहा है ।

कांग्रेस की कथनी और करनी में अंतर : सुभाष जालान

इस संबंध में भाजपा नेता एवं जिला सहकारी केंद्रीय बैंक रायपुर के पूर्व डायरेक्टर सुभाष जालान से बात करने पर उन्होंने छत्तीसगढ़ सरकार को किसान विरोधी बताते हुए कहा कि अब स्पष्ट दिख गया कि कांग्रेस की कथनी और करनी में कितना अंतर है। कहती कुछ और हैं और करती कुछ और। किसानों के एक-एक दाना धान खरीदी की बात किये हैं, लेकिन आज समर्थन मूल्य पर धान खरीदी हो इस दृष्टि से पूर्व के पंजीकृत किसानों के रकबा में छेड़खानी कर पंजीयन का रकबा घटा दिया गया है, जबकि पिछले कई वर्षों से उन्ही पंजीकृत रकबा के अनुसार किसानों द्वारा धान बेचे जा रहे हैं । आज बिलाईगढ़ विधानसभा के हजारों किसानों का लगभग चार हजार से अधिक एकड़ रकबा कैसे कम हो गया । कांग्रेस के सिर्फ दो वर्ष के कार्यकाल में चार हजार एकड़ रकबा कम होना शासन की एक सोची समझी रणनीति है, जिससे धान खरीदी कम हो ।

Posted By: Nai Dunia News Network

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