रायपुर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। Raipur Municipal Corporation In Action: राजधानी रायपुर और उससे लगे आस-पास के इलाकों में दूसरों की और सरकारी खाली जमीनों पर कब्जा कर प्लाटिंग करके बेचने की कोशिश करने वाले 26 लोगों पर पिछले दो दिन के भीतर कानून का फंदा कसते ही हड़कंप मच गया है। शहर से लगे माना, नवा रायपुर, मुजगहन, डूंडा, बोरियाखुर्द, बोरियाकला, सरोना, चंगोराभाठा, डूमरतालाब, गोगांव, गोंदवारा, बिरगांव, भनपुरी, सिलतरा, खम्हारडीह, कचना आदि इलाके की खाली जमीनों पर कब्जा कर प्लाटिंग करने के सौ से अधिक शिकायतें रायपुर और बिरगांव नगर निगम तक पहुंची थी।

निगम अमले ने मौके का निरीक्षण कर अवैध प्लाटिंग को हटाकर सड़क को काटा ताकि जमीन खरीदने वाले समझ सके कि यह अवैध प्लाटिंग की जमीन है। ऐसे करीब 70 छोटे-बड़े बिल्डर और उनके सहयोगियों पर एफआईआर दर्ज करने निगम की तरफ से अलग-अलग पुलिस थाने में शिकायत की गई। इन शिकायतों पर अब जाकर पुलिस ने एफआईआर दर्ज करना शुरु कर दिया है।

नईदुनिया ने पड़ताल की तो पता चला कि दूसरों की जमीन पर जबरिया कब्जा कर उसे प्लाटिंग कर बेचने की कोशिश करने वाले बिल्डर, उनके पार्टनर से सत्तापक्ष से जुड़े कुछ लोगों के शामिल होने से शिकायत के बाद भी निगम के अधिकारी कार्रवाई करने से पीछे भी हटे। यहीं कारण है कि जमीन पर अवैध कब्जे की शिकायत लगातार बढ़ती गई। छोटी शिकायतों पर तो पुलिस और नगर निगम ने कार्रवाई की, लेकिन जिस जमीन पर बड़े भू-माफियाओं के नाम जुड़े निकले, उन शिकायतों को जांच के नाम पर या तो रद्दी की टोकरी में डाल दिया गया या फिर पीड़ित पक्ष को कोर्ट जाने की सलाह देकर जिम्मेदारों ने अपने हाथ खींच लिए।

रायपुर जिले में पिछले कई सालों से दूसरे की खाली और सरकारी जमीन पर कब्जा कर उसे बेचने का खेल चला आ रहा है। खासकर शहर के आउटर इलाके की खाली जमीन छोटे-बड़े बिल्डरों के निशाने पर है। प्रशासन चाहकर भी इस पर लगाम कसने में नाकाम है। हालांकि, कुछ शिकायतों पर नगर निगम अमले ने कार्रवाई भी की है, लेकिन ये वह जमीन है, जो सरकारी है। आम लोगों की जमीन पर कब्जे की शिकायतों पर न तो पुलिस कार्रवाई कर रहा है और न ही प्रशासन ही कारगर कदम उठा रहा है। पुलिस प्रशासन पर दबाव बनाने के लिए बिल्डरों ने सत्तापक्ष के नेताओं को भी साध रखा है। यही वजह है कि करोड़ों की जमीन हथियाने का खेल आउटर इलाके में चल रहा है।

आउटर की जमीन निशाने पर

अवैध प्लाटिंग को लेकर सबसे ज्यादा खेल आउटर इलाके में किया जा रहा है। कुछ साल पहले ही गोगांव, गोंदवारा, भनपुरी, सिलतरा में 25 एकड़ से ज्यादा सरकारी जमीन को ग्रीनलैंड में तब्दील करने का पर्दाफाश हुआ था। वहां कई लोगों ने सरकारी और घास जमीन पर अवैध प्लाटिंग और कब्जा कर लोगों को बेचने की कोशिश की थी। इन सभी जगहों की जमीन पर निगम ने बाउंड्रीवाल बनाकर उसे ग्रीनलैंड में तब्दील किया था।

निगम के सूत्रों ने बताया कि जिस कृषि भूमि पर बिना अनुमति के अवैध प्लाटिंग की गई है, वहां सबसे पहले कार्रवाई की जा रही है। खेती की जमीन पर अवैध प्लाटिंग होने पर पूरे क्षेत्र की जमीन को फिर से ग्रीनलैंड में बदला जाएगा।मास्टर प्लान में जो क्षेत्र कृषि या आमोद-प्रमोद का है और वहां अवैध प्लाटिंग की गई है उसे फिर से ग्रीनलैंड में तब्दील किया जाएगा।

फर्जी दस्तावेज कर लेते हैं तैयार

दूसरों की खाली जमीनों को जानबूझकर बिल्डर विवादों में लाते हैं। जमीन मालिक उस जमीन को खोने के डर से विवश होकर सस्ती दरों पर भी बेचने के लिए तैयार हो जाता है। ऐसे में मध्यस्थता निभाने के लिए क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि या बड़े छुटभैय्ये नेता आगे आते हैं। उनके द्वारा इन जमीनों को अपने खास लोगों को सस्ती दरों पर दिलवा दिया जाता है।

इस तरह से महंगी जमीन भी सस्ती दर पर भू-माफियाओं को मिल जाती है। ऐसी कई शिकायतें पुलिस के पास पहुंचती है, जिसमें जमीन पर जानबूझकर कब्जा करने या उसके फर्जी दस्तावेज तैयार करने का मामला सामने आता है। पुलिस ऐसे लोगों को चिह्नित जरूर करती है, लेकिन उन पर कार्रवाई करने में सालों लगा देती है।

वर्जन-

अवैध प्लाटिंग की करीब 70 शिकायते अलग-अलग पुलिस थानों में की गई है। थाने से जमीन के बी वन खसरा समेत अन्य दस्तावेज मांगे गए है। किन-किन लोगों ने जमीन पर प्लाटिंग की है, उनके नाम का मिलान करने के बाद एफआईआर दर्ज की जा रही है। अब तक 26 कब्जाधारी और उनके सहयोगियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जा चुकी है।

-दिनेश कोसरिया, कमिश्नर-जोन क्रमांक दस

Posted By: Shashank.bajpai

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