रायपुर। साल 2019 में 13 अक्टूबर रविवार को पड़ रहे शरद पूर्णिमा पर सर्वार्थसिद्धि, अमृत सिद्धि और रवि योग का संयोग बन रहा है। इस संयोग में सोना, चांदी, कांसा, तांबा आदि धातुओं की खरीदारी करना शुभदायी होगा। साथ ही इस दिन किसी भी तरह के नए व्यापार की शुरुआत करने से व्यापार निरंतर बढ़ेगा। चूंकि इस दिन रविवार है और इसी दिन सर्व दोष नाशक रवि योग भी पड़ रहा है, इसलिए शरद पूर्णिमा विशेष फलदायी माना जा रहा है।

इस दिन 16 कलाओं से परिपूर्ण होगा चांद

ज्योतिषी डॉ.दत्तात्रेय होस्केरे के अनुसार हिन्दू पंचांग के क्वांर माह की पूर्णिमा तिथि पर चांद अपनी पूर्णता पर होता है और 16 कलाओं से युक्त होता है। ऐसी मान्यता है कि चांद की किरणों से अमृत रूपी शीतलता बरसती है, इसलिए इसे शरद पूर्णिमा कहा जाता है। अमृत रूपी किरणों को ग्रहण करने के लिए छत पर खीर रखकर इसका सेवन करने से शरीर को अलौकिक ऊर्जा की प्राप्ति होती है। स्वास्थ्य बेहतर होता है।

भगवान श्रीकृष्ण ने रचाई थी रासलीला

श्रीमदृभागवत कथा में उल्लेख है कि शरद पूर्णिमा की रात भगवान श्रीकृष्ण ने गोपियों के साथ रासलीला रचाई थी। 16 हजार 108 रानियों और गोपियों को यही अहसास हो रहा था कि श्रीकृष्ण उनके साथ हैं। जब गोपियों को अभिमान हो गया कि श्रीकृष्ण उनके साथ है तो वे अंतर्धान हो गए।

राधा-कृष्ण मंदिरों में लगेगा खीर का भोग

श्रीकृष्ण द्वारा रासलीला रचाए जाने की मान्यता के चलते राधा-कृष्ण मंदिरों में शरद पूर्णिमा की रात को खीर का भोग लगाकर भक्तों को वितरित किया जाएगा।

कोजागिरी पूर्णिमा के रूप में प्रसिद्ध

शरद पूर्णिमा की रात को कोजागरी पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। वैज्ञानिक भी मानते हैं कि शरद पूर्णिमा की रात पृथ्वी, चन्द्रमा और सूर्य खास वृत्ति में होते हैं। पृथ्वी के एकदम नजदीक चन्द्रमा होता है और सूर्य सबसे दूर होता है। इस वजह से चन्द्रमा का आकार काफी बड़ा दिखाई देता है।

मां लक्ष्मी निकलती है धरती भ्रमण करने

ऐसी भी मान्यता है कि शरद पूर्णिमा की रात मां पृथ्वी का भ्रमण करने निकलती है। इस मान्यता के चलते श्रद्धालु अपने घर की साफ-सफाई, पूजा करके रातभर जागकर मां लक्ष्मी की आराधना करते हैं।