रायपुर। जीएसटी इंटेलिजेंस के रॉडार पर छत्तीसगढ़ के एक दर्जन से ज्यादा बड़े कारोबारी हैं। फर्जी कंपनियों के नाम पर जीएसटी चोरी करने वाली कई कंपनियों को डायरेक्ट्रेट जनरल ऑफ जीएसटी इंटेलिजेंस (डीजीजीआइ) का नोटिस जारी हुआ है।

जीएसटी विंग के आला अधिकारी के मुताबिक, प्रदेशभर में कई ऐसी बोगस कंपनियां हैं, जो फर्जी इनवायस बनाकर जीएसटी चोरी कर रही हैं। कंपनियां देश के अलग-अलग हिस्सों में माल की सप्लाई दिखाती हैं। ऐसे में पूरे नेटवर्क को ट्रेस कर पाना आसान नहीं होता है। इसी का फायदा उठाकर जीएसटी चोरी का पूरा खेल चलता है। जिन रजिस्टर्ड कंपनियों के नाम पर इनवायस जारी होते हैं, वैसी कंपनियां सिर्फ कागजों में ही होती हैं। प्रदेश में चल रही ऐसी कंपनियों की संख्या सैकड़ों में है।

जीएसटी विंग ने बोगस फर्म के नाम पर बिल जारी करके लाखों स्र्पये की टैक्स चोरी करने वाली राजधानी की चार, बिलासपुर की दो और भिलाई के सात कारोबारियों को नोटिस भेजकर जवाब तलब किया है। आला अधिकारियों के अनुसार छत्तीसगढ़ के कारोबारी ओडिशा और पश्चिम बंगाल की बोगस कंपनियों के नाम पर गड़बड़ी कर रहे हैं। जीएसटी के नए साफ्टवेयर से इस तरह की गड़बड़ी पकड़ी जा रही है। विभाग द्वारा कार्रवाई के चलते कुछ व्यापारियों ने चोरी किए जीएसटी को शासन को जमा करना भी शुरू कर दिया।

अधिकारियों ने बताया कि 23 अगस्त को बिजली कारोबारियों की जांच में खुलासा हुआ कि कंपनी ने बिक्री किए सामान की मात्रा को आधा बताया। बाकी सामान की बिक्री अवैध पर्ची से कर दी। ऐसा करके बेचे गए आधे माल का ही जीएसटी जमा किया गया। बिजली कारोबारी ने ऐसा करके करीब एक करोड़ की जीएसटी चोरी की।


ऐसे होती है जीएसटी चोरी

अधिकारियों ने बताया कि जीएसटी चोरी का यह पूरा खेल बोगस कंपनियों के द्वारा संचालित किया जाता है। इसमें टैक्स चोरी करने वाला व्यक्ति बोगस कंपनी के नाम पर पहले तो इनवॉयस जारी करता है। कागजों पर ही ऐसे माल की सप्लाई भी हो जाती है, जो कभी बनता ही नहीं। बोगस कंपनी के नाम से आरटीजीएस के जरिए पेमेंट हो जाता है। उस रकम को खाते से निकाल लिया जाता है। इसके आधार पर कंपनियां इनपुट टैक्स क्रेडिट ले लेती हैं।


केस-1

लोहा कंपनी में फर्जी बिल पर चल रहा था कारोबार

केंद्रीय वस्तु एवं सेवाकर आसूचना महानिदेशालय ने फरवरी में 141 करोड़ रुपए की जीएसटी चोरी करने वाले श्याम सेल्स कार्पोरेशन के संचालक को गिरफ्तार किया था। छत्तीसगढ़ में जीएटी चोरी के मामले में जेल भेजे जाने की पहली कार्रवाई है। पिछले काफी समय से फर्जी बिल के आधार पर कारोबार करने की शिकायत के बाद जीएसटी इंटेलिजेंस की टीम ने छापा मारा था।

केस-2

आय कम दिखाकर जीएसटी चोरी

जुलाई के पहले सप्ताह में जीएसटी महानिदेशालय ने वीआईपी रोड स्थित एक होटल में छापा मारा था। जांच के दौरान वहां 20 लाख रुपये से ज्यादा की टैक्स चोरी पकड़ी गई। जीएसटी इंटेलिजेंस द्वारा वित्तीय वर्ष 2019-20 में पहली कार्रवाई की गई थी।


छह माह के कारावास की सजा का है प्रावधान

जीएसटी कानून के तहत 5 करोड़ से अधिक की जीएसटी चोरी होने पर गैर जमानती धारा लगाई जाती है। सीजीएसटी एक्ट की धारा के अनुसार फर्जी बिल के माध्यम से आइटीसी प्राप्त कर उसका दुरुपयोग करने वाले व्यापारियों पर भी सजा के तौर पर 6 महीने के कारावास का प्रावधान है।

Posted By: Hemant Upadhyay

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