रायपुर। Spiritual News: प्रभु श्रीराम और कृष्ण कभी भूतपूर्व नहीं होते, वे अभूतपूर्व हैं, वे सदैव वर्तमान है इसलिए आज भी संदर्भित हैं। जो वर्तमान में होता है, समाज में वही माननीय होता है, सम्माननीय होता है। वास्तव में हम उन्हें ही अपना आदर्श बनाते हैं, इसलिए प्रयास करें कि सदैव वर्तमान में रहें। यह संदेश भाटागांव त्रिमूर्ति चौक पर सप्त सोपान, सप्त संकल्प पर आधारित श्रीमद भागवत कथा में आचार्य युगल किशोर महाराज ने दिया।

वर्तमान ही निर्माण की आधारशिला

यदि हम खुद को राम भक्त कहते हैं, तो हमें वर्तमान में रहना सीखना होगा। वास्तव में वर्तमान ही निर्माण की आधारशिला है। हमारी गति बड़ी विचित्र है। हम या तो भूतकाल के दुख में डूबे रहते हैं या भविष्य कि चिंता में रहते हैं, इसलिये कभी भी वर्तमान का आनंद नहीं ले सकते।

अध्यात्मिक उद्योग है कथा

आचार्य ने कहा कि वर्तमान को जीने की शैली हम सत्संग में ही सीख सकते हैं। लोगों में बड़ी भ्रांति है कि वे भागवत कथा के महत्व को समझ नहीं सकते, इसलिए वे अपना समय देने से कतराते हैं। आचार्यश्री ने कहा कि सही मायने में कथा आध्यात्मिक उद्योग है। यदि उद्योग में हम अपना धन, समय और ऊर्जा लगाते हैं, तो केवल धन की प्राप्ति होती है, लेकिन इस आध्यात्मिक उद्योग में आप अपना समय, संपत्ति और ऊर्जा लगाते हैं, तो आपको मानवता की प्राप्ति होती है।

श्रीराम-कृष्ण को बनाएं आदर्श

हमारी जीवनशैली से करुणा, दया, सहायता का भाव दूर चला गया है। श्रीराम मर्यादा, तो कृष्ण उत्सव हैं। दोनों की लीला सुनने और देखने से मन के विकार मिटते हैं। इसलिए प्रयास करें अपने जीवन में राम और कृष्ण को आदर्श बनाएं।

Posted By: Shashank.bajpai

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