रायपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

बायोडीजल जैविक स्त्रोतों से प्राप्त डीजल के जैसा ही गैर-परंपरागत इंधन है। बायोडीजल नवीनीकरणीय ऊर्जा स्त्रोतों से बनाया जाता है। यह परंपरागत ईंधनों का एक स्वच्छ विकल्प है। बायोडीजल में कम मात्रा में पेट्रोलियम पदार्थ को मिलाया जाता है और विभिन्ना प्रकार की गाड़ियों में प्रयोग किया जा सकता है। यह विषैला नहीं होने के साथ-साथ बायोडिग्रेडेबल भी है। इसको भविष्य का इर्धन माना जा रहा है। इतना ही नहीं बल्कि बायोडीजल को एक से पांच प्रतिशत की मात्रा में डीजल में मिलाने से इर्धन की गुणवत्ता बढ़ाई जा सकती है। यह बातें नैनोटेक्नोलॉजी एवं पर्यावरण विषय पर आयोजित सम्मेलन में पहुंचे वक्ताओं ने कही।

एनआइटी रायपुर में दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का गुरुवार को शुभारंभ किया गया। यह आयोजन मानव संसाधन मंत्रालय व तकनीकी शिक्षा गुणवत्ता सुधार कार्यक्रम के संयुक्त तत्वाधान में किया गया। इस मौके पर कनाडा से पहुंचे डॉ. अजय दलाई ने बायो ऊर्जा उत्पादन व क्लाइमेट चेंज पर बात रखते हुए कहा कि बायोडीजल को एक से पांच प्रतिशत की मात्रा में डीजल में मिलाने से इर्धन की गुणवत्ता बढ़ाई जा सकती है। डॉ. दलाई ने छात्रों के समक्ष अपने अनुभवों को साझा किया और उनके प्रश्नों एवं दुविधाओं के उत्तर दिए। साथ ही उन्होंने कनाडा में उच्च शिक्षा की संभावनाओं पर मार्गदर्शन प्रदान किया। कार्यक्रम का शुभारंभ संस्थान के निदेशक डॉ. एम रावाणी समेत पहुंचे विशेषज्ञों ने दीप प्रज्जवलित कर किया।

पानी की सहायता से बनाया जा सकता है इर्धन

सम्मेलन में दूसरे व्याख्यान सत्र में एनआइटी दिल्ली के डॉ. अनिल वर्मा ने इलेक्ट्रो केमिकल सेल में ग्रेफीन के उपयोग पर अपनी बात रखी। उन्होंने विभिन्ना प्रकार की बैटरी व सेल के बारे में बताया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार कार्बन डायऑक्साइड और पानी की सहायता से ईंधन बनाई जा सकती है। डॉ वर्मा ने रेडॉक्स फ्लो बैटरी और इस क्षेत्र से जुड़ी चुनौतियों पर भी चर्चा की।

नैनोटेक्नोलॉजी उभरता विषय

कार्यक्रम में कॉफ्रेंस सचिव डॉ. धर्मपाल ने बताया कि नैनोटेक्नोलॉजी एक उभरता हुआ विषय है, जो विज्ञान एवं अभियांत्रिकी के विभिन्ना क्षेत्रों में उपयोगी है। नैनोटेक्नोलॉजी ने विशेष रूप से बायोमेडिसिन, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऊर्जा एवं पर्यावरण जैसे क्षेत्रों में नया प्रतिमान स्थापित किया है। साथ ही डॉ. धर्मपाल ने बताया कि नैनोटेक्नोलॉजी एक उभरता हुआ विषय है। उन्होंने बताया कि कांफ्रेंस में स्वीकृत सभी रिसर्च पेपर्स एससीआई स्कोपस इंडेक्सड इंडियन कैमिकल सोसायटी के जर्नल्स में प्रकाशित किए जाएंगे। इस मौके पर केमिकल इंजीनियरिंग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. वीके सिंह , डीन-फैकल्टी वेलफेयर डॉ. एबी सोनी, डीन रिसर्च एवं कंसल्टेंसी डॉ. एस गुप्ता और डॉ. मणिवनन समेत बड़ी सख्या में स्टूडेंट्स उपस्थित रहे।

Posted By: Nai Dunia News Network

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