रायपुर (मृगेंद्र पांडेय)। कांग्रेस में राष्ट्रीय अध्यक्ष की कमान संभालने के बाद मल्लिकार्जुन खरगे ने चुनावी राज्यों के संगठन पर फोकस किया है। छत्तीसगढ़ के प्रदेश प्रभारी को बदलने के बाद अब प्रदेश अध्यक्ष बदलने की चर्चा तेज हो गई है। प्रदेश अध्यक्ष के रूप में मोहन मरकाम का कार्यकाल पूरा हो गया है। राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव के कारण मरकाम के कार्यकाल को बढ़ाया गया था, लेकिन अब संकेत मिल रहे हैं कि जल्द ही नए प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति हो जाएगी। मरकाम को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के विरोधी कैंप का माना जाता है। हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस की जीत के बाद सीएम बघेल का कद बढ़ा है। ऐसे में संकेत मिल रहे हैं कि नया प्रदेश अध्यक्ष आदिवासी वर्ग और बघेल की पसंद का होगा। हालांकि मरकाम कैंप भी एक बार फिर वापसी के लिए पूरा जोर लगा रहा है।

मरकाम के करीबी सूत्रों की मानें तो केंद्रीय संगठन के सामने तीन दिक्कतें आ रही हैं। पहला, फरवरी में कांग्रेस का राष्ट्रीय अधिवेशन है। इसमें देशभर के करीब दस हजार प्रतिनिधि आएंगे। मरकाम पिछले साढ़े तीन साल से प्रदेश अध्यक्ष हैं। ऐसे में राष्ट्रीय अधिवेशन की तैयारी से पहले उन्हें हटाने से अधिवेशन की तैयारी पर असर पड़ सकता है। दूसरा, मरकाम को अभी नहीं हटाते हैं तो फरवरी के बाद किसी को भी प्रदेश अध्यक्ष बनाने से चुनावी संभावनाओं पर असर पड़ सकता है। प्रदेश प्रभारी से लेकर प्रदेश अध्यक्ष तक नया होने के कारण प्रत्याशी चयन में असमंजस की स्थिति बन जाएगी। तीसरा, प्रदेश अध्यक्ष बदलने के बाद प्रदेश कार्यकारिणी बदली जाएगी, जो चुनावी साल में पार्टी के पक्ष में नहीं जाएगा। इन तर्कों को मरकाम कैंप ने राष्ट्रीय अध्यक्ष से मिलकर रख दिया है। अब अंतिम निर्णय राष्ट्रीय अध्यक्ष को लेना है।

बस्तर के आदिवासी चेहरे पर खेल सकते हैं दांव

कांग्रेस के उच्च पदस्थ सूत्रों की मानें तो किसी भी परिस्थिति में मोहन मरकाम को हटाया जाता है तो बस्तर के किसी आदिवासी नेता पर पार्टी दांव खेल सकती है। इस दौड़ में पूर्व आइएएस और कांकेर से विधायक शिशुपाल सोरी और बस्तर सांसद दीपक बैज का नाम आ रहा है। सोरी को सीएम कैंप का समर्थन है। वहीं दीपक को दिल्ली दरबार के दखल के कारण मौका मिल सकता है।

विधानसभा उपाध्यक्ष के लिए मरकाम के नाम की चर्चा

पार्टी के उच्च पदस्थ सूत्रों की मानें तो अगर प्रदेश अध्यक्ष पद से मोहन मरकाम को हटाया जाता है तो उन्हें विधानसभा उपाध्यक्ष का पद देकर संतुष्ट करने की कोशिश की जा सकती है। विधानसभा उपाध्यक्ष मनोज मंडावी के निधन के बाद यह पद रिक्त है। ऐसा कर पार्टी जातिगत समीकरण को भी साधने में सफल होगी।

Posted By: Vinita Sinha

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