रायपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

कांग्रेस सरकार ने महज आठ महीने के शासनकाल में छत्तीसगढ़ी संस्कृति को गांव से बाहर निकालकर शहरों में पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाई है। पहले राजिम कुंभ का नाम बदलकर पुरातन परंपरा वाली पहचान 'पुन्नी मेला' किया और वहां सुआ नृत्य, राउत नृत्य, पंथी नृत्य, कर्मा नृत्य जैसे आयोजन करवाए। इसके बाद गावों विशेष तौर पर मनाए जाने वाले 'हरेली' पर्व को राजधानी में उत्साह से मनाया गया। स्वयं मुख्यमंत्री ने बैलगाड़ी में बैठकर और गेड़ी पर चढ़कर ग्रामीणों को खुश किया। अब इसी परंपरा के दो और पर्व 'तीजा' और 'पोला' को भी धूमधाम से मनाने का फैसला किया है, ताकि आमजन सरकार से सीधे जुड़ सकें। इसकी जिम्मेदारी संस्कृति विभाग को दी गई है। पर्व को कुछ ही दिन शेष रहने से विभाग तैयारियों में जुट गया है।

पोला पर बैल श्रृंगार, गीत-नृत्य

खेती किसानी में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले बैलों की जोड़ी का आभार व्यक्त करने के लिए छत्तीसगढ़ के गांव-गांव में भादो अमावस्या तिथि पर 'पोला' पर्व मनाने की परंपरा है। इसे खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में मनाया जाता है। बैलों की पूजा करके उनका आकर्षक श्रृंगार किया जाता है। कई गांवों में बैल दौड़ प्रतियोगिता के जरिए मनोरंजन भी किया जाता है। इस बार 30 अगस्त को हर जिले के संस्कृति विभाग और गांव-गांव में पंचायतों के माध्यम से पोला पर्व पर छत्तीसगढ़ी गीत-नृत्य का भी आयोजन करने की रूपरेखा बनाई जा रही है।

तीजा पर व्रत रखने वाली महिलाओं को खिलाएंगे कड्ू भात

छत्तीसगढ़ी महिलाओं का सबसे बड़ा पर्व 'तीजा' पर महिलाएं लगभग 36 घंटे तक निर्जला (बिना पानी पीए) व्रत रखती हैं। व्रत रखने से पहले पूर्व संध्या पर 'कड़ू भात' (करेला-चावल) खाने की परंपरा निभाती हैं। इस बार यह परंपरा 31 अगस्त की रात्रि में निभाई जाएगी। चूंकि गांव-गांव में तीजा पर्व का उल्लास छाया रहता है, इसलिए दूसरे समाज के लोगों को भी इस परंपरा से जोड़ने की तैयारी की जा रही है। सूत्रों से पता चला है कि आंगनबाड़ी को महिलाओं को कड़ू भात खाने की परंपरा निभाने की जिम्मेदारी दी जा रही है। इसमें हर गांव में सैकड़ों महिलाएं शामिल होकर गीत, नृत्य, भजन का आनंद लेकर परंपरा निभाएंगी।

मुक्ताकाश मंच पर बिखरेगी छत्तीसगढ़ी संस्कृति की छटा

1 सितंबर को मनाए जाने वाले तीजा की पूर्व संध्या पर 31 अगस्त को मुक्ताकाश मंच पर छत्तीसगढ़ी गीत, नृत्य का आयोजन करने की तैयारी चल रही है। गीत-नृत्य का आनंद लेने के बाद तीजहारिनें कड़ू भात खाने की परंपरा निभाकर व्रत की शुरुआत करेंगी।