रायपुर (राज्य ब्यूरो)। CG Politics: भगवान राम और गोमाता के बाद अब प्रदेश में भगवान कृष्ण के नाम को लेकर राजनीति शुरू हो गई है। सरकार कृष्ण कुंज के नाम से शहरी क्षेत्रों में उद्यान विकसित करने जा रही है। भाजपा कह रही है कि भगवान राम के अस्तित्व को नकारने वाली कांग्रेस सरकार राम वनगमन पथ तो नहीं बना पाई, अब श्रीकृष्ण की शरण में पहुंच गई है।

वहीं, मुख्यमंत्री भूपेश बघेल कह रहे हैं कि भाजपा को भगवान राम में कोई आस्था नहीं है। उसे राम की याद केवल वोट के लिए आती है। प्रदेश की संस्कृति और परंपरा में राम, कृष्ण और शिव रचे-बसे हैं। कृष्ण-कुंज योजना के माध्यम से सांस्कृतिक महत्व के पेड़ों को सहेजने की पहल की जा रही है। यह भावी पीढ़ी को बेहतर कल की ओर ले जाएगी।

छत्तीसगढ़ में राम वन गमन पथ के तहत 75 स्थल चिह्नित किए गए हैं, जहां श्रीराम ने छत्तीसगढ़ में वनगमन के दौरान भ्रमण किया। इनमें से 51 स्थलों पर प्रभु राम ने भ्रमण के दौरान कुछ समय व्यतीत किए। प्रदेश सरकार ने प्रथम चरण के लिए नौ स्थान चिह्नित किए गए हैं। इनमें सीतामढ़ी-हरचौका (कोरिया), रामगढ़ (अंबिकापुर), शिवरी नारायण (जांजगीर-चांपा), तुरतुरिया (बलौदाबाजार), चंदखुरी (रायपुर), राजिम (गरियाबंद), सिहावा-साऋषि आश्रम (धमतरी), जगदलपुर (बस्तर) और रामाराम (सुकमा) शामिल हैं। कांग्रेस सरकार पहली बार जन्माष्टमी के अवसर पर प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में कृष्ण कुंज का लोकार्पण किया है।

इस दौरान मुख्यमंत्री बघेल रायपुर के तेलीबांधा केकृष्ण-कुंज पहुंचे और कदंब का पौधा लगाया। यहां 1.68 हेक्टेयर में 383 पौधे रोपे गए हैं। मुख्यमंत्री बघेल ने सत्ता में आने के बाद राम वनगमन पथ बनाकर प्रदेश की राजनीति में श्रीराम नाम के मास्टर स्ट्रोक को भाजपा से छीन लिया था। अब कृष्ण कुंज से भाजपा को एक और झटका लगा है।

मुख्यमंत्री बघेल ने कहा कि छत्तीसगढ़ की संस्कृति के साथ आगे बढ़ाने के लिए सरकार हर संभव कोशिश कर रही है। साथ ही प्राकृतिक संसाधनों को सहेजने का कार्य भी सरकार कर रही है। उन्होंने कहा कि कर्म योगी, ज्ञान योगी, भक्ति योगी के साथ भगवान कृष्ण अर्थशास्त्री भी थे। उन्होंने कृषि से गोपालन को जोड़ा था। हमारी सरकार भी इसी रास्ते पर चल रही है। उन्होंने कृष्ण कुंज को सहेजने को छत्तीगसढ़ी संस्कृति का हिस्सा बताया।

मुख्यमंत्री के दावों पर पूर्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि यह न राम के हैं, न कृष्ण के, यह सिर्फ सत्ता के हैं। देश में 70 साल सत्ता में रहने के बाद भी कांग्रेस ने न राम मंदिर निर्माण के बारे में सोचा, न ही कृष्ण जन्मभूमि के बारे में विचार किया। कांग्रेस ने श्रीराम को कल्पनिक बताया। कालनेमी श्रीराम का नाम लेंगे, तो लोग समझ जाते हैं कि ठगने के लिए आए हैं।

Posted By: Pramod Sahu

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