रायपुर। Chhattishgarh News: पौष्टिक आटा खाने के शौकीन लोगों को अब बाजार से मिलावटी या गेहूं की अधिक मात्रा वाला आटा खरीदने की जरूरत नहीं होगी। क्योंकि इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रिसर्च के रूप में पौष्टिक आटा तैयार कर रहा है। इसकी मांग लगातार लोगों में बढ़ती जा रही है। कृषि विवि के अंतर्गत चल रहे कृषि विज्ञान केंद्र (टेकारी) में ओम साई राम स्वसहायता समूह की महिलाओं को विशेष प्रशिक्षण देकर मल्टीग्रेन आटा तैयार किया गया। महिलाएं अभी तक लगभग दो क्विंटल पौष्टिक आटा बेच चुकी हैं। वहीं समूह की महिलाएं उत्पादन की खपत को बढ़ाने में लग गई हैं। इसके लिए वह शहर के किराना स्टोर, सोसायटी, बड़ी संख्या में संचालित निजी संस्थाओं तक पहुंचाने में जुट गई है। ज्ञात हो कि बाजार में मिल रहे पौष्टिक आटे में 91 फीसद केवल गेहूं तो नौ फीसद मल्टीग्रेन का आटा पाया जाता है। इसकी तुलना में कृषि विवि के कृषि विज्ञान केंद्र में तैयार हो रहे पौष्टिक आटे में गेहूं का आटा नहीं गया है।

नए रोजगार से जोड़ने की पहल

इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डा. एसके पाटील ने बताया कि समूह के माध्यम से जुड़ी ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत करने के साथ ही उन्हें एक नए रोजगार से जोड़ने की पहल शुरू की गई है। बाजार में बिकने वाले मल्टीग्रेट आटा की अपेक्षा तैयार हो रहा आटा काफी पौष्टिक है, क्योकि इसे कई अनाजों को मिलाकर तैयार किया गया है।

कई अनाजों को मिलाकर तैयार

डा. पाटील ने बताया कि मल्टीग्रेन आटा में सोयाबीन, चना, मक्का, रागी, ज्वार एवं बाजरा को निश्चित अनुपात में मिलाकर तैयार किया गया है। वहीं समूह की महिलाओं की मानंे तो बाजार में बिक रहे विभिन्न् (पौष्टिक) आटा की अपेक्षा सस्ता और स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है। केवीके प्रभारी गौतम राय की मानें तो मल्टीग्रेन आटा में प्रति 100 ग्राम 25.23 प्रतिशत प्रोटीन, 17.31 प्रतिशत फाइबर एवं 354.55 किलो कैलोरी पाई जाती है, जबकि बाजार में उपलब्ध पौष्टिक आटे में 91 फीसद केवल गेहूं तो नौ फीसद मल्टीग्रेन का आटा पाया है।

डेढ़ सौ स्र्पये में 750 ग्राम

महिला स्वसहायता समूह द्वारा तैयार किया गया मल्टीग्रेन आटा कानसेंट्रेट 150 स्र्पये प्रति 750 ग्राम की दर पर विश्वविद्यालय परिसर में स्थित उत्पाद विक्रय केंद्र माध्यम से विक्रय किया जाता है। 750 ग्राम मल्टीग्रेन आटा कानसेंट्रेट में उपभोगता 7.5 किलोग्राम गेहूं का आटा मिलाकर बाजार के समतुल्य मल्टीग्रेन आटा तैयार कर सकते हैं। यह प्रशिक्षण महिला स्वसहायता समूहों के सदस्यों को स्वरोजगार का एक नया अवसर प्रदान करेगा एवं यह प्रयास कुपोषण दूर करने में भी सहायक होगा।

Posted By: kunal.mishra

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