रायपुर। पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी ने डिजिटल एजुकेशन के नाम पर प्रदेशों के स्कूलों में किये जा रहे डिजिटलाइजेशन में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की आशंका जताया है। जोगी ने बताया कि स्कूलों में डिजिटल एजुकेशन के लिए केंद्र सरकार ने शिक्षा विभाग को करीब 350 करोड़ का बजट दिया था। जोगी ने आरोप लगाया कि इस डिजिटल एजुकेशन के लिए विभाग ने जो टेंडर जारी किए, उस टेंडर में नियमों को ताक पर रखकर काम किया गया।

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जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ के प्रमुख जोगी ने रविवार को प्रेसवार्ता में बताया कि इस काम के लिए जो निविदा बुलाई गई थी, उमें कंपनियों के लिए एक शर्त यह थी कि टेंडर में भाग लेने वाली कंपनी ने पूर्व में करीब 100 करोड़ रुपये का वर्क आर्डर का काम किया हो। इस शर्त के आधार पर दो कंपनियां ने टेंडर में हिस्सा लिया। जोगी ने आरोप लगाया है कि इसमें से एक कंपनी को इतने बड़े वर्क आर्डर का अनुभव नहीं था।

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जोगी ने कहा कि अमान्य दस्तावेजों के आधार पर कंपनी का चयन कर नियमों की धज्जियां उड़ाई गई है। जोगी ने कहा है कि इसी डिजिटल एजुकेशन के मॉडल के रूप में पिछले दिनों मुख्यमंत्री के हाथों में पाटन में एक स्कूल में उदघाटन भी कराया गया है।

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जोगी ने इस मामले में अफसरों की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि 4330 स्कूलों में डिजिटल एजुकेशन का काम होना है, ऐसे में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की आशंका जताई है। जोगी ने इस संबंध में मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर इस प्रकरण की लोक आयोग और स्थानीय एजेंसी से जांच कराने की मांग की है। वहीं केंद्र से भी इस मामले में जांच की मांग की गई है।

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