अरुण उपाध्याय, रायपुर।Ajit Jogi In Memories: अक्टूबर, वर्ष 2000 का अंतिम सप्ताह चल रहा था। मध्यप्रदेश को विभाजित कर छत्तीसगढ़ राज्य बनाने की दिशा में तेजी से काम चल रहा था। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह लगातार दौरे कर राज्य गठन की तैयारियों का जायजा ले रहे थे। इस बीच कांग्रेस सरकार से छत्तीसगढ़ का पहला मुख्यमंत्री कौन होगा? इसे लेकर भी सियासत तेज थी।

रायपुर से भोपाल और दिल्ली तक दावेदार सक्रिय थे और अपने- अपने हिसाब से गोटी जमाने में लगे हुए थे। इन सबके बीच अजीत जोगी रायपुर में लो प्रोफाइल में दिख रहे थे। कभी पार्टी की बैठकों में शामिल होते, तो कभी मयूरा होटल के बाहर बड़े नेताओं की प्रेस कांफ्रेंस के बाद पत्रकारों के गले पर हाथ डाल कर हंसी- मजाक करते हुए दिख रहे थे। वे खुद पत्रकारों की चर्चा में शामिल हो जाते कि आखिर मुख्यमंत्री कौन बन रहा है?

अटकलों के बीच रायपुर को राजधानी और बिलासपुर को न्यायधानी बनाने का फैसला लिया जा चुका था। अक्टूबर में दिग्विजय सिंह अंतिम बार राज्य पुनर्गठन से पहले रायपुर के दौरे पर पहुंचे। रात में एयरपोर्ट पर उनका सरकारी विमान उतरा, पूरा मीडिया यही जानने को आतुर था कि वे दिल्ली से किसका नाम मुख्यमंत्री के लिए लेकर आए हैं। एयरपोर्ट पर दिग्विजय सिंह ने पत्ता नहीं खोला। खास बात यह थी कि अजीत जोगी को छोड़ कर कांग्रेस के बाकी सभी दावेदारों के नाम चर्चा में थे और यही दावेदार पूरी तरह सक्रिय नजर आ रहे थे। किसी को समझ में नहीं आ रहा था कि किसके नाम पर मुहर लगने वाली है।

दिग्गी राजा ने कांग्रेस विधायक दल की बैठक बुलाई। इस बैठक में जोगी भी अन्य विधायकों की भांति सम्मिलित हुए। बैठक में दिग्विजय ने कांग्रेस हाइकमान द्वारा भेजा गया नाम सबके सामने रखा और विधायक दल के नेता के रुप में समर्थन करने का आग्रह किया। यह नाम किसी और का नहीं अजीत जोगी का था। जोगी की इस राजनीति के सामने तमाम दिग्गज नेता धराशायी हो गए। किसी को समझ में नहीं आया कि ये क्या हो गया! जोगी ने बता दिया कि राजनीति में सफलता पाने के लिए चर्चा में रहना जरुरी नहीं है, ऊपर से नीचे तक अपनी साख मजबूत होनी चाहिए। उस वक्त स्वर्गीय विद्याचरण शुक्ल का नाम सीएम की दौड़ में सबसे आगे था। जोगी का नाम आते ही शुक्ल समर्थक जमकर नाराज हो गए। सीएम के नाम की घोषणा के बाद दिग्विजय जब विद्याचरण से मिलने उनके बंगले पहुंचे तो उनके समर्थकों ने उनसे अभद्र व्यवहार किया था। इध्ार अचानक सीएम बनने से जोगी के समर्थकों की संख्या में बेतहाशा बढ़ोतरी हो गई। रायपुर कलेक्टर रहते हुए अजीत जोगी जिस बंगले में रहे थे, उसे ही उन्होंने मुख्यमंत्री निवास के रुप में चुना और वहीं रहे।

छत्तीसगढ़ राज्य बनने से पहले जोगी ने सांसद के रुप में राजनीति तो की, मगर तब केवल चर्चा में रहते थे। लीडर बन कर पूरी ताकत से उभर नहीं पा रहे थे। छत्तीसगढ़ राज्य बना तो उन्होंने इसे मौके के रुप में देखा और सफलतापूर्वक भुनाया भी। इसका नतीजा यह हुआ कि छत्तीसगढ़ में राजनीति का पूरा समीकरण ही बदल गया। शुक्ल बंधुओं के अलावा जोगी भी पूरी ताकत से खड़े दिखाई दिए। मुख्यमंत्री के लिए उनके नाम पर मुहर लगते ही सभी को अहसास हो गया था कि कांग्रेस हाइकमान सोनिया गांधी का भरोसा वे जीत चुके हैं। इसी संकेत ने उस वक्त कांग्रेस के भीतर की धाराओं की दिशा बदल दी थी।

नए छत्तीसगढ़ राज्य में भाजपा विपक्ष की भूमिका में अपने पांव जमाने का प्रयास कर रहा था, तब जोगी की राजनीति ने पार्टी को तगड़ा झटका दिया था। विपक्ष को कमजोर करने के लिए जोगी ने अचानक ही 12 भाजपा विध्ाायकों को कांग्रेस में शामिल कर लिया। दलबदल की इसी घटना के बाद पूरे देश में बहस छिड़ गई और आखिरकार इसका नतीजा दलबदल कानून के रुप में सामने आया था। दलबदल का काम इतने गुपचुप तरीके से हुआ कि 12 विधायकों से बातचीत की किसी को भनक तक नहीं लगी।

मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने विपक्ष की राजनीति नहीं छोड़ी। किसानों के धान की सरकारी खरीदी का वक्त आया, तो उन्होंने केंद्र सरकार पर मदद देने के लिए दबाव बनाया। इसके लिए वे पूरे मंत्रिमंडल के साथ दिल्ली पहुंच गए और धरना तक दे दिया। उस वक्त तत्कालीन खाद्य मंत्री शरद यादव को जोगी से वार्ता करनी पड़ी और मदद का भरोसा दिलाया था। जोगी ने सादगी को भी अपनाया। मंत्रिमंडल के सदस्यों से चर्चा किए बिना ही उन्होंने लाल बत्ती प्रथा समाप्त करने का निर्णय लिया। उनके समेत सभी मंत्रियों, अफसरों की सरकारी गाड़ियों से लाल बत्ती उतर गई। यह एक ऐसा फैसला था, जिसे भाजपा सरकार ने भी बदलने का साहस नहीं दिखाया।

सादगी से मुख्यमंत्री का कार्यकाल समाप्त होने वक्त तक जोगी ने राजनीति में दांव-पेंच करना नहीं छोड़ा। यही कारण है कि विधानसभा चुनाव में हार के बाद भी उन्होंने भाजपा की सरकार बनने का रास्ता रोकने का प्रयास किया। यह अलग बात है कि उनकी रणनीति बुरी तरह फेल हुई और इसका खामियाजा भी भुगतना पड़ा। इस हार के बाद भी जोगी हारे नहीं, मजबूती से डटे रहे। सड़क हादसे के बाद सभी को जोगी के भविष्य की चिंता थी, लेकिन उन्होंने अपनी जीवटता से बता दिया कि इच्छा शक्ति मजबूत हो तो हर तस्वीर बदल सकते हैं।

Posted By: Himanshu Sharma

नईदुनिया ई-पेपर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

नईदुनिया ई-पेपर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

डाउनलोड करें नईदुनिया ऐप | पाएं मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और देश-दुनिया की सभी खबरों के साथ नईदुनिया ई-पेपर,राशिफल और कई फायदेमंद सर्विसेस

डाउनलोड करें नईदुनिया ऐप | पाएं मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और देश-दुनिया की सभी खबरों के साथ नईदुनिया ई-पेपर,राशिफल और कई फायदेमंद सर्विसेस

जीतेगा भारत हारेगा कोरोना
जीतेगा भारत हारेगा कोरोना