रायपुर। Ajit Jogi Memories: पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के निधन के बाद अब उनके बेटे अमित जोगी के लिए पिता की विरासत संभाले रखने की बड़ी चुनौती भी सामने हैं। जोगी की पार्टी जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जकांछ) की एकजुटता कैसे बनी रहे, इसकी रणनीति भी बनानी होगी। नए पार्टी संगठन को एक धागे में पिरोने का काम अजीत जोगी ने किया था। कांग्रेस से अलग होने के बाद जोगी ने दमदारी के साथ चुनाव लड़ा और पांच विधानसभा सीट पर जीत दर्ज की। पार्टी सूत्रों की मानें तो अजीत जोगी के जाने के बाद विधायकों से लेकर संगठन के पदाधिकारियों को संगठन में रोक पाना कठिन है। पार्टी का एक वर्ग कांग्रेस के साथ जाने को तैयार है।

विधानसभा चुनाव में अपेक्षाकृत बेहतर परिणाम नहीं आने के बाद जकांछ के बड़े नेताओं सहित कई युवा नेताओं ने कांग्रेस का हाथ थाम लिया था।

परेश बागबहरा जैसे कुछ नेता भाजपा के साथ चले गए। अब पार्टी के मजबूती के साथ मैदान में डटे रहने के लिए विधायकों की मजबूती जरूरी है।

जकांछ के अब चार विधायक हैं, जिसमें रेणु जोगी, धर्मजीत सिंह, देवव्रत सिंह और प्रमोद शर्मा हैं। रेणु जोगी के कांग्रेस की अंतरिम राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी के साथ अच्छे संबंध है।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भी रेणु जोगी को बराबर तवज्जो देते रहे हैं। देवव्रत सिंह पुराने कांग्रेसी हैं और टिकट नहीं मिलने के कारण जकांछ से चुनाव लड़े और जीते। वरिष्ठता के आधार पर धर्मजीत सिंह को जकांछ विधायक दल का नेता बनाया गया है।

अजीत जोगी के बाद अब संगठन में नए सिरे से बदलाव की संभावना जताई जा रही है। कांग्रेस के आला नेताओं की मानें तो पार्टी का एक गुट जकांछ का कांग्रेस में विलय कराने पर विचार कर रहा है।

हालांकि यह प्रारंभिक जानकारी है, लेकिन कुछ विधायकों ने अजीत जोगी के रहते हुए भी कांग्रेस के साथ आने का प्रस्ताव दिया था।

लोकसभा चुनाव में भी जकांछ के कुछ विधायकों ने कांग्रेस के पक्ष में खुलकर काम किया था। चर्चा है कि केंद्रीय संगठन अगर तैयार होता है, तो जकांछ के चारो विधायकों को पार्टी में शामिल भी किया जा सकता है।

इस संभावना को लेकर एक गुट आगे बढ़ भी रहा है। हालांकि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और मंत्री टीएस सिंहदेव की पसंद के बाद ही केंद्रीय संगठन इस दिशा में कोई निर्णय लेगा। दोनों नेता अजीत जोगी के कांग्रेस में वापसी के सख्त खिलाफ थे।

धर्मजीत ले सकते हैं जोगी की जगह

जकांछ के उच्च पदस्थ सूत्रों का मानना है कि आने वाले कुछ दिनों में संगठन में भी बदलाव होगा। अजीत जोगी की जगह नए राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव हो सकता है। इसके लिए धर्मजीत सिंह सबसे मजबूत दावेदार हैं। अमित जोगी प्रदेश अध्यक्ष है और संगठन में सक्रिय होने के कारण विधानसभा का चुनाव भी नहीं लड़े थे।

Posted By: Himanshu Sharma

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