रायपुर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। छत्तीसगढ़ कांट्रेक्टर्स एसोसिएशन की लगातार हुई बैठकों के दौर के बाद प्रदेश के सभी निर्माण विभागों की टेंडर प्रकिया का पूरी तरह बहिष्कार करने का एलान कर दिया गया है। इसके साथ ही शनिवार से अब प्रदेश का कोई भी कांट्रैक्टर न तो आनलाइन, न ही मैन्युअल टेंडर फार्म भरेगा और न ही किसी को भरने देंगे। एसोसिएशन के सभी जिला अध्यक्षों की बैठकों में यह फैसला लिया गया।

बता दें कि पिछले एक सप्ताह से कांट्रेक्टर एसोसिएशन अपनी जायज मांगों को लेकर आंदोलनरत है। प्रदेश अध्यक्ष वीरेश शुक्ला के नेतृत्व में लगातार बैठकों का दौर चला, जिसमें करोड़ों रुपये से लेकर सभी श्रेणी के पंजीकृत हजारों ठेकेदार शामिल हुए। महंगी निर्माण सामग्री के दामों में 50 से 60 फीसद बढ़ोतरी के कारण निर्माण कार्य करने में सभी ने असमर्थता जताई है।

एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष बीरेश शुक्ला ने बताया कि प्रदेश भर के कांट्रेक्टर एकजुट है। एसओआर और बाजार मूल्य में निर्माण सामग्री इतनी महंगी हुई है कि कांट्रेक्टर बाजार और बैंकों से कर्ज लेकर पूरी तरह से कर्ज में डूबते जा रहे हैं। ऐसे हालात में निर्माण कार्यों को न तो पूरा कराने की स्थिति में है और न ही अब किसी तरह की टेंडर प्रक्रिया में हिस्सा लेंगे। निर्माण विभागों में अनुबंध के बाद निर्माण सामग्री के दामों में हुई बढ़ोतरी की वजह से ऐसा निर्णय लेने को मजबूर हुए है।

एसोसिएशन के इस फैसले का बिल्डर एसोसिएशन आफ इंडिया ने भी अपना पूरा समर्थन देने की घोषणा की है। बिल्डर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष केसी राव ने है कहा कि छत्तीसगढ़ शासन के सभी निर्माण विभागों के शेड्यूल आफ रेट (एसओआर) और बाजार मूल्य में करीब 60 फीसद का अंतर आया है, इसलिए छत्तीसगढ़ कांट्रेक्टर एसोसिएशन ने जो फैसला लिया है, वह ठेकेदारों को कर्ज में डूबने से बचाने वाला हितकारी निर्णय है।

छत्तीसगढ़ कांट्रेक्टर्स के प्रदेश अध्यक्ष बीरेश शुक्ला और बिल्डर एसोसिएशन आफ इंडिया के प्रदेश अध्यक्ष केसी राव ने संयुक्त रूप से बताया कि सभी निर्माण प्रमुखों को एसओआर दर और बाजार मूल्य के अंतर की राशि की स्वीकृति समेत 15 सूत्री मांगों पत्र सौंपकर शासन-प्रशासन का ध्यान दिलाया गया है।

इसके साथ ही मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से मुलाकात करने का भी समय मांगा गया है, ताकि निर्माण कार्यों को लेकर जो स्थिति उत्पन्न हुई है उसका समाधान हो सके। महंगे निर्माण मटेरियल के कारण प्रदेश में निर्माण कार्यों की गति पूरी तरह से रुक गई है। इसके साथ ही अब टेंडर लेने की स्थिति में ठेकेदार नहीं है, इसलिए शासन से सहानुभूति पूर्वक विकट समस्या का समाधान करने का एसोसिएशन ने आग्रह किया है।

Posted By: Sanjay Srivastava

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