आकाश शुक्ला, रायपुर। Raipur Column Sehatnama: अस्पतालों में ड्यूटी को लेकर अधिकारी और कर्मचारियों के बीच अंतर्कलह समय-समय पर सामने आती रहती है। हाल ही में जिला अस्पताल में चिकित्सा अधिकारियों और एक चिकित्सक के बीच ऐसा ही मामला सामने आया। उक्त चिकित्सा अधिकारी अपने विभाग में एक चिकित्सक की पदस्थापना चाहते थे। इसके लिए पूरी ताकत लगा रहे थे।

मगर सफल नहीं हुए तो थक हार कर चिकित्सा अधिकारी ने चिकित्सक को रिलीव करने का मन बनाया। इसकी जानकारी जूनियर डाक्टर को हुई कि उसकी पदस्थापना दूसरे विभाग में होने वाली है तो उसने अस्पताल केप्रमुख को पत्र लिखकर अपने कार्य की जानकारी देते हुए दायित्व से भी अवगत कराया। अप्रत्यक्ष रूप से यह भी बता दिया कि चिकित्सा अधिकारियों के अंर्तकलह की वजह से उन्हें बलि का बकरा बनाया जा रहा है। स्थिति को देखते हुए आला अधिकारी को उनकी पदस्थापना को निरस्त करना पड़ा।

रिश्तेदारी बनीं साहब का सिरदर्द

कहते हैं रिश्ता जितना मजबूत हो, विश्वास भी उतना मजबूत होता है, लेकिन कई बार यह रिश्ता हमारे विश्वास से ज्यादा हमारे लिए सिरदर्द बन जाता है। कुछ ऐसा ही हुआ शहर के एक बड़े अस्पताल के प्रभारी केसाथ। प्रभारी होने केनाते उनके आदेश का हर कोई पालन करता है। यह बात उनके एक रिश्तेदार को पता चली तो उक्त रिश्तेदार ने इसका जमकर दुरुपयोग किया। वह अस्पताल केदवा काउंटर पर मिलने वाली दवा से लेकर एंबुलेंस केड्राइवर की फीस तक में डाक्टर साहब को बार-बार फोन लगाकर डिस्काउंट ले लिया।

उसने ऐसा एक या दो बार नहीं, बल्कि कई बार किया। परेशान डाक्टर ने थक हार कर यह कह दिया कि रिश्तेदार सिर दर्द है भाई। हद तो तब हो गई जब रिश्तेदार ने अपने डाक्टर साहब रिश्तेदार का नाम कई जगह बताकर अपने काम करवा लिए। इसकी जानकारी डाक्टर साहब को काफी देर बाद पता चली।

साहब ने किया अधिकारों का हनन

सरकार ने आमजन को वैसे तो कई अधिकार दिए हैं, लेकिन सूचना का अधिकार मौजूदा दौर में सबसे मजबूत अधिकार है। मगर इस अधिकार को लोगों तक पहुंचाने वाले जिम्मेदार कहीं न कहीं इन अधिकारों का हनन कर लेते हैं। स्वास्थ्य विभाग और सरकारी अस्पताल बैठे जिम्मेदार से इन दिनों लोगों को सूचना के अधिकार की पूरी जानकारी नहीं मिल रही है। वे आधी-अधूरी जानकारी देकर टरका दे रहे हैं।

इसके कारण आवेदक न सिर्फ परेशान हो रहे हैं, बल्कि जानकारी लेने को अपील में जाने केबाद भी भटक रहे हैं। विभाग से आरटीआइ के तहत मांगी गई जानकारी आवेदक को अधूरी पकड़ा दी जा रही है। विभाग और अस्पताल में हुए भ्रष्टाचार को छुपाने के लिए ही ऐसा किया जा रहा है, हालांकि विभाग की इस हरकत पर वरिष्ठ अधिकारियों की नजर है कि सूचना देने के लिए जवाबदेही निभाई जा रही है या नहीं।

साहब के आदेश डरा बाबू

शहर के विश्वविद्यालय प्रशासन में इन दिनों साहब के एक आदेश को लेकर चर्चाएं गर्म है। साहब ने आदेश जारी किया है कि विश्वविद्यालय प्रशासन में काम करने वाले सभी बाबू कोई भी जानकारी आम लोग, यहां तक मीडिया तक में सीधे डायरेक्ट नहीं देंगे। जो भी जानकारी मांगी जाएगी वह पहले उन तक लाई जाए। इसके बाद वह उस जानकारी को अपने माध्यम से संबंधित व्यक्ति तक पहुंचाएंगे।

इस फरमान के बाद इन दिनों विभाग में माहौल कुछ अलग है। विभाग में काम करने वाले बाबू किसी भी व्यक्ति को किसी तरह की जानकारी देने से साफ इंकार कर रहे, जबकि अंदरखाने लेनदेन में की बातें आती हैं तो साहब से पहले जेब में जाने वाले नंबर याद आते हैं। इधर, साहब भी आदेश के बाद बाबू के रवैये से खुश हैं। बाबू हमेशा की तरह वही बातें पहुंचा रहे जो उन तक जाना है।

Posted By: Shashank.bajpai

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