संदीप तिवारी, रायपुर। देश के सबसे चर्चित अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के दौरान जो तथ्य सबसे मजबूत आधार बने, उनमें छत्तीसगढ़ की अहम भूमिका है। भगवान श्रीराम का ननिहाल कहे जाने वाले छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के पुरातत्ववेत्ता और खोदाई दल के सदस्य पद्श्री डॉ. अरुण कुमार शर्मा इस प्रकरण में मुख्य गवाह रहे। हाईकोर्ट में अयोध्या में मंदिर था, इसका प्रमाण उन्होंने पेश किया था। उनकी मांग पर ही यहां खोदाई करवाई गई थी। यहां से मिले शिलालेख और मंदिर के अवशेष ही पूरे फैसले में प्रमुख आधार बने हैं। छत्तीसगढ़ का भगवान श्रीराम से गहरा नाता रहा है। यह उनका ननिहाल है और वे इस मामले में पक्षकार थे। मैं उनकी जन्मभूमि को जानता हूं और यह शिलालेख भी साबित किए।

पेश है डॉ. शर्मा से बातचीत के कुछ खास अंश

सवालः अयोध्या मामले में जो निर्णय आया है, उससे आप क्या महसूस कर रहे हैं ?

जवाबः यह कानून की जीत है, न्यायाधीशों ने जितना सौहार्दपूर्ण और संतुलित निर्णय दिया, वह काबिलेतारीफ है। धर्म और आस्था की लड़ाई को पाटा गया और संतुलित निर्णय दिया।

सवालः गवाह और राम जन्मभूमि की खोदाई के सदस्य कैसे बने ?

जवाबः भारतीय पुरातत्वविद् विभाग से रिटायर होने के बाद मैं अपने व्यक्तिगत सर्वे का काम कर रहा था, तभी विश्व हिंदू परिषद के तत्कालीन अध्यक्ष अशोक सिंघल ने 2003 में मुझसे टेलीफोन पर बातचीत की थी। उन्होंने प्रस्ताव दिया था कि धर्म के नाम पर चल रहे इस केस के रहस्य को सुलझाने में मदद करें। उनके इस प्रस्ताव को स्वीकार किया।

सवालः आपको खोदाई के दौरान क्या-क्या तथ्य मिले, जो इस निर्णय के लिए मजबूत आधार बने?

जवाबः मैं अकेले नहीं था। मेरे साथ भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग की टीम लगी हुई थी। खोदाई के दौरान चार प्रमाण मिले थे।

पहला प्रमाण - 750 साल पहले गहरवाल राजा ने राम मंदिर का निर्माण करवाया था। खोदाई में मिला शिलालेख सबसे बड़ा प्रमाण है। इसलिए श्रीराम मंदिर था।

दूसरा प्रमाणः मंदिर तोड़ा गया, लेकिन मस्जिद बनाने के लिए मंदिर की ही नींव को उपयोग में लाया गया था। इसलिए यहां श्रीराम का अयोध्या था।

तीसरा प्रमाण- मंदिर को तोड़कर मस्जिद बनाई गई, लेकिन मस्जिद के चार कोनों में चार मीनारें होना आवश्यक हैं, वह नहीं थीं। बजू टैंक भी नहीं पाया गया, इसलिए यह हिंदू आस्था का सबसे बड़ा केंद्र है।

चौथा प्रमाण- बाबर कभी अयोध्या नहीं आया, उसका सेनापति आया था। जिस मस्जिद की बात कही जा रही है, उसकी दीवारों पर मूर्तियां जड़ी हुई हैं। इसमें 84 पिलर पाए गए हैं। इसलिए यह राम जन्मभूमि है। अयोध्या में मंदिर था। मंदिर के 84 पिलर थे। दीवारों में हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियां गढ़ी गई थीं। मंदिर में 700 साल पुराना शिलालेख मिला था, जो इस बात का पुख्ता प्रमाण देता है कि मंदिर को तोड़कर ही मस्जिद का निर्माण करवाया गया था।

सवालः इस पूरे मामले में आप किस बात को लेकर गर्व महसूस करते हैं ?

जवाबः मुझे गर्व है कि रामलला पक्षकार रहे और वे इसके प्रमुख गवाह। जब विश्व हिंदू परिषद के तत्कालीन अध्यक्ष अशोक सिंघल ने 2003 में मुझसे बातचीत की थी। उन्होंने प्रस्ताव दिया था कि धर्म के नाम पर चल रहे इस केस के रहस्य को सुलझाने में मदद करें तो मैंने कहा था कि धर्म के नाम से केस चल रहा है तो मैं जरूर सहयोग करूंगा। मैं मुख्य गवाह बना ।

सवालः कोर्ट में सुनवाई के दौरान कोई ऐसा तर्क, जिसे आपने रखा हो और इस मामले में नया मोड़ आया रहा हो?

जवाबः पहले मैंने कोर्ट में कहा कि बाबरी मस्जिद केस चला रहे हैं तो आप हमें बताइए कौन-सी मस्जिद है ? यहां मुख्य न्यायाधीश रफात आलम थे। मैंने उनसे पूछा कि मस्जिद क्या होती है तो उन्होंने बताया कि तीन गुंबज होते हैं, एक मीनार होती है, बजू टैंक होता है। तब मैंने कहा- यहां गुंबज कहां है और मीनार कहां? मैंने कहा था- नमाज पढ़ी ही नहीं गई।'

सवालः श्रीराम जन्मभूमि में खोदाई की बात कब आई और प्रक्रिया कैसे शुरू हुई ?

जवाबः दोनों पक्षों के राजी होने के बाद कोर्ट ने कहा था कि खोदाई करके देख लिया जाए कि यहां क्या था? खोदाई की जिम्मेदारी भारत की प्रमुख संस्था भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने संभाली। रिपोर्ट में आ गया है कि यह मंदिर ही था और कमेटी बनाई गई। कमेटी की रिपोर्ट को मानना और हाईकोर्ट में हिंदुओं के पक्ष में निर्णय हुआ। इसके बाद मुसलमानों ने फिर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और अब कोर्ट ने फिर संतुलित फैसला सुनाया।

सवालः छत्तीसगढ़ से भगवान श्रीराम का क्या नाता है ?

जवाबः ऐसा माना जाता है किचंदखुरी भगवान राम की मां कौशल्या का मायका है। देश में उनका एकमात्र मंदिर यहां है। इस लिहाज से छत्तीसगढ़ राम भगवान का ननिहाल हुआ। ग्रंथों में इस बात का भी उल्लेख है कि लव-कुश का जन्म सिरपुर (जिला महासमुंद) स्थित तुरतुरिया में हुआ। रामवन गमन मार्ग छत्तीसगढ़ से ही जाता है, दंडकारण्य भी छत्तीसगढ़ में ही है। अगर इन सभी तथ्यों को माना जाए तो छत्तीसगढ़ से भगवान श्रीराम का गहरा युग-युगांतर का नाता है।

Posted By: Nai Dunia News Network