रायपुर। Fight From Corona: आयुर्वेद में स्वास्थ्य को बेहतर रखना मुख्य उद्देश्य है। शरीर स्वस्थ होगा और रोग प्रतिरोधक क्षमता अधिक होगी, तो निश्चित रूप से बीमारियां शरीर को नहीं घेर सकेंगी। इसके लिए रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने दिनचर्या सही होनी चाहिए। ब्रह्म मुहूर्त में उठें और रात नौ से 10 बजे के बीच सो जाएं। जो व्यक्ति इन नियमों का पालन करे वह हमेशा स्वस्थ रहेगा।

दिनचर्या के अलावा रुतचर्या का सही उपयोग करें। जैसी ऋतु हो वैसा आहार लें। इन दिनाें ग्रीष्म ऋतु है इसलिए हल्का आहार ग्रहण करें। आयुर्वेद में छह रस को महत्व दिया गया है। मधुर, आम्लेय, लवन, कटु, तिक्त और कषाय। वात, पित्त, कफ तीन प्रकार की बीमारी मुख्य होती हैं। कोरोना महामारी इन तीनाें का मिश्रण है। इसलिए मौसम के बदलने के अनुसार ही अपने खाने-पीने की आदतों में बदलाव करें।

बुखार, शरीर दर्द, सर्दी, खांसी के लक्षण से बचने के लिए पौष्टिक आहार को महत्व दें। दिन में न सोएं, केवल 10 मिनट की झपकी लें। त्रिकुट काढ़ा यानी सौंफ, कालीमिर्च, पिप्पली का काढ़ा बनाएं। इसमें दालचीनी, तुलसी डालकर पानी में खौलाकर छानकर पीएं। खांसी ठीक करने वासा द्रव्य, अडूसा, यष्टि मधु चूर्ण लें। ज्वर ठीक करने भुई नीम, चिरायता, पटोल का सेवन करें।

दस्त हो तो बेल का गूदा, रस लें। पित्त दोष के लिए उडुंबर यानी डुमर खाए। अश्वगंधा, गुरुची यानी गिलोय लें। नस्य अर्थात नाक में तेल डालें। अपनी पसंद के अनुसार, सरसों का तेल, नारियल का तेल या बादाम का तेल आप प्रयोग कर सकते हैं। सबसे जरूरी आयुर्वेद की दवा लेने से पहले डॉक्टर से अवश्य सलाह लें।

Posted By: Shashank.bajpai

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