रायपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

फ्री आयुष्मान कार्ड को ई-कार्ड बनाने की शिकायतें स्वास्थ्य विभाग को बड़ी संख्या में मिली हैं। यह सिर्फ रायपुर नहीं, बल्कि हर जिले में पाया गया है कि कुछ लोग हैं, जो जरूरतमंदों को झांसा देकर ठग रहे हैं। यही वजह है कि अब आयुष्मान मित्रों को बायोमैट्रिक्स के माध्यम से सॉफ्टवेयर में अलग लॉग-इन करवाया जा रहा है। इसे लेकर संचालक स्वास्थ्य सेवाएं शिखा राजपूत तिवारी ने केंद्र से पत्राचार किया है। ऐसी ही शिकायतों के खिलाफ जांच कर संबंधित के विरुद्ध कार्रवाई भी की जा रही है।

राज्य में पूर्व में बने स्मार्ट कार्ड, राशन कार्ड, आधार कार्ड, वोटर कार्ड से आयुष्मान योजना का ई-कार्ड बनाया जा रहा है। इसे लेकर आयुष्मान मित्रों को जानकारी दी गई। बता दें कि कार्ड बनाने का ओटीपी इन्हीं आयुष्मान मित्रों के मोबाइल नंबर पर आता है। गड़बड़ी इसी स्तर पर हो रही है। अब इस व्यवस्था में सुधार करते हुए ओटीपी की व्यवस्था को बदलकर उसकी जगह बॉयोमेट्रिक्स सिस्टम लागू कर दिया गया है।

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जानें क्या है ई-कार्ड- स्मार्ट कार्ड की जगह पर अब केंद्र सरकार द्वारा ई-कार्ड बनाए जा रहे हैं। पूर्व में स्मार्ट कार्ड पंच कर इस योजना का लाभ लिया जाता था। केंद्र सरकार द्वारा दिए गए सॉफ्टवेयर में यही ई-कार्ड काम करता है। इसके चलते सभी हितग्राहियों के लिए ई-कार्ड बनाना अनिवार्य है। इसके जरिए ही इलाज होगा।

चॉइस सेंटर, व्यक्ति या संस्था अधिकृत नहीं-

योजनांतर्गत पंजीकृत समस्य 692 शासकीय व 573 निजी अस्पतालों तथा 211 निर्धारित कियोस्क केंद्रों में नियुक्त आयुष्मान मित्र द्वारा फ्री आयुष्मान भारत का ई-कार्ड बनाया जा रहा है। राज्य में च्वाइस सेंटर्स को इस कार्य के लिए अधिकृत नहीं किया गया है। कोई भी व्यक्ति या संस्था पैसे लेकर ई-कार्ड नहीं बना सकता है। अगर कोई ऐसा करता है तो उसके विरुद्ध 104 मेडिकल हेल्पलाइन नंबर पर शिकायत की जा सकती है।