रायपुर। Raipur Local Edit : राज्य के आदिवासी बहुल बलरामपुर जिला अस्पताल ने स्वच्छता में कीर्तिमान स्थापित करके अनुकरण उपस्थित किया है। इसे राज्य स्तर पर स्वच्छता में प्रथम पुरस्कार मिला है। इस पुरस्कार में अकेले इसका ही नहीं, बल्कि सरगुजा संभाग के कई अस्पतालों का दबदबा देखा जा सकता है। उन्हें स्वच्छता के निर्धारित मापदंडों का पालन करने के लिए पुरस्कार के लिए चुना गया है। बलरामपुर जिला अस्पताल सहित जिन अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों का चयन पुरस्कार के लिए हुआ है, वे पूर्व में गंदगी समेत तमाम विसंगतियों, कमियों से जूझ रहे थे, लेकिन प्रबंधीय दृढ़-निश्चय, सेवाभावना, लगन, प्रशासनिक सहयोग और जनसहभागिता से उन्होंने खुद को बदहाली से उबारकर आदर्श उपस्थित किया। राज्य के तमाम अस्पतालों को इनसे प्रेरणा लेनी चाहिए।

कायाकल्प योजना के तहत स्वच्छता, साफ-सफाई, संक्रमण नियंत्रण समेत कुल छह मानकों पर खुद को साबित करने के बाद जिला अस्पतालों, उपमंडलीय अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर को सम्मानित किया जाता है। सरकार स्वास्थ्य योजनाओं के माध्यम से आखिरी व्यक्ति तक स्वास्थ्य सुविधाओं को पहुंचा रही है। आयुष्मान भारत, मातृ वंदना योजना, खूबचंद बघेल स्वास्थ्य सहायता योजना, सुपोषण अभियान, दाई-दीदी क्लीनिक योजना, श्री धन्वंतरि जेनेरिक मेडिकल स्टोर योजना आदि के माध्यम से लोगों के स्वास्थ्य का ध्यान रखा जा रहा है।

टीकाकरण लक्ष्यों की प्राप्ति, संस्थागत प्रसव में वृद्धि, मातृ मृत्यु दर, शिशु मृत्यु दर में कमी स्वास्थ्य सुविधाओं के सकारात्मक संकेत हैं। यह तो ठीक है, लेकिन बुनियादी अवसंरचना विकास, स्वास्थ्य सुविधाओं में वृद्धि, डाक्टरों की उपलब्धता, दवा, जांच और उपचार सेवा, एंबुलेंस आदि पर ध्यान देने और बजट उपलब्ध कराने की आवश्यकता है।छोटे-छोटे प्रयास बड़ी सफलता दिलाते हैं। कायाकल्प योजना के माध्यम से सरकार ने स्वास्थ्य कर्मचारियों को प्रोत्साहन दिया।

नतीजा यह हुआ कि जो अस्पताल स्वास्थ्य सुविधाओं को नजरअंदाज करते थे, अब एक टीम की तरह कार्य कर रहे हैं। स्वास्थ्य सुविधाओं की गुणवत्ता, चिकित्सा उपकरण, डाक्टर और कर्मचारियों की उपलब्धता, मरीजों के प्रति व्यवहार आदि में उल्लेखनीय बदलाव आया है। कोरोना काल में अस्पतालों द्वारा मानकों का पालन करना एक चुनौती थी, जिससे बेहतर ढंग से निपटा गया।

हालांकि, सभी अस्पताल ऐसा करने में सफल नहीं रहे हैं। यहां से उन अस्पतालों, सरकार, प्रशासन और नागरिकों को स्वमूल्यांकन करना होगा कि आखिर चूक कहां हो रही है। साथ ही योजना के निर्धारित मानकों से खुद के प्रयासों को समन्वित करना होगा। स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर करने के लिए रणनीति, संसाधन और इच्छाशक्ति का होना आवश्यक है।

आशा की जानी चाहिए कि राज्य के अन्य अस्पताल भी स्वच्छता और उत्तम चिकित्सा देने के लिए प्रेरित होंगे। यह भी अपेक्षा है कि अस्पतालों को गंदगी से बचाए रखने के लिए जनता का भी पूरा सहयोग मिलेगा। इलाज कराने आए लोग और उनके स्वजन सफाई का पूरा ध्यान रखेंगे।

Posted By: Shashank.bajpai

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