रायपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

जीएसटी के चलते बैंकों की महंगे हुए सेवा शुल्क के बाद अब आम आदमी का बोझ और बढ़ने वाला है। विभिन्ना बैंकों की अब एमसीएलआर दरें बढ़नी हैं। इसका सीधा-सीधा मतलब है कि लोन महंगे होंगे। बहुत-से बैंकों ने एमसीएलआर दरें बढ़ा दी हैं तथा कुछ बैंक बढ़ाने की तैयारी कर रही है। एमसीएलआर दर बढ़ने से आम आदमी को सबसे बड़ा नुकसान यह होता है कि उसका लोन महंगा हो जाता है। पहले की तुलना में ईएमआइ भी बढ़ जाती है। बैंकिंग सूत्रों का कहना है कि इस प्रकार से एमसीएलआर दर बढ़ने से आम आदमी पर सीधा असर पड़ने वाला है। इसका मुख्य कारण तो यही है कि एमसीएलआर दर से ही ब्याज दर तय होती है। इसस कम पर लोन नहीं दिया जा सकता।

यह है एमसीएलआर दर

एमसीएलआर वह दर होती है, जिस पर किसी बैंक से मिलने वाले ब्याज की दर तय होती है। इससे कम दर पर देश का कोई भी बैंक लोन नहीं दे सकता है, सामान्य भाषा में यह आधार दर ही होती है।

इन बैंकों ने एमसीएलआर दरों में किया इजाफा

एसबीआइ ने मार्च में एमसीएलआर दर बढ़ा दिया है। अब एसबीआइ का एमसीएलआर दर 0.25 फीसद तक बढ़ गया है। बताया जा रहा है कि बैंक के इस फैसले से होम लोन, ऑटो लोन आदि सभी महंगे हो जाएंगे। इसी प्रकार इलाहाबाद बैंक ने भी लेंडिंग रेट में 10 बेसिस प्वाइंट का इजाफा किया है। नई दर भी एक मई से लागू हो चुकी है तथा इस कदम से मौजूदा और नए होम लोन, ऑटो एवं पर्सनल लोन की ब्याद दरें बढ़ जाएंगी। बैंक की ओर से की गई नियामकीय फाइलिंग में बताया गया है कि उसने दो साल की अवधि (छह महीने की अवधि को छोड़कर) वाले लोन के लिए एमसीएलआर को 5 बेसिस प्वाइंट तक बढ़ा दिया है। एक साल की अवधि के लिए एमसीएलआर दर को बढ़ाकर 8.3 फीसद कर दिया गया है, जो कि पहले 8.25 फीसद हुआ करती थी। इसी प्रकार कर्नाटका बैंक ने अपनी एमसीएलआर को संशोधित कर दिया है और तथा एक साल की अवधि के लिए एमसीएलआर बढ़ाकर 8.80 फीसद हो गई है, जो कि पहले 8.75 फीसद हुआ करती थी, वहीं छह महीने की एमसीएलआर बढ़कर 8.45 फीसद हो गई है, जो कि पहले 8.35 फीसद थी।

14 पराग मिश्रा-01

5 बजकर 51 मिनट

सं. आरकेडी

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