रायपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

प्रदूषण में प्रमुख कारण माने जा रहे पराली, जिससे आने वाले दिनों में गोठानों में रह रहे पशुओं के लिए चारा तैयार किया जाएगा। इससे एक तरफ जहां इसे जलाने की जरूरत नहीं होगी। वहीं गोठानों में मवेशियों के लिए चारे की दिक्कत से भी छुटकारा मिलेगा। रायपुर जिला पंचायत ने पिछले दिनों वनचरौदा गोठान में बेलर मशीन से ट्रायल कर पराली का गठ्ठर तैयार किया। इससे काफी अच्छा रिस्पांस मिला है। विभागीय सूत्रों की माने तो तीन बेलर मशीन के लिए शासन से स्वीकृति लेने के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। फाइनल होते ही बेलर मशीन की खरीदी कर जिले के गोठानों में संचालित किया जाएगा, जिसकी निगरानी गोठान समिति के माध्यम से होगी।

मशीन खरीदी पर सब्सिडी

किसानों के लिए वरदान साबित मानी जा रही बेलर मशीन को लेकर राज्य सरकार की तरफ से राज्योत्सव में मुख्यमंत्री ने घोषणा की थी। मशीन की खरीदी करने पर किसानों को सब्सिडी दी जाएगी। कृषि विभाग से जुड़े सूत्रों की माने तो बेलर मशीन कुछ जिलों में दिया भी गया है, लेकिन बड़ी संख्या में देने के लिए शासन आदि से स्वीकृति आना बाकी है।

एक एकड़ में 40 गठ्ठर

जिला पंचायत विभाग के अधिकारी निलेश सिंह बघेल ने बताया कि ट्रायल के रूप में बेलर मशीन से गोठानों के लिए चारा तैयार होगा। साथ ही पशुपालकों को भी चारे की समस्या नहीं होगी। बेलर मशीन की क्षमता को देखे तो लगभग एक एकड़ में 40 से 50 बंडल तैयार होगा। इसे तैयार करने में लगभग एक घंटे 30 मिनट लगेंगे। यदि पैरा सूखा है तो प्रति बंडल का वजन 10 किलो, नमी है तो 30 किलो का गट्ठर तैयार होगा। वहीं प्रति घंटा टैक्टर चार्ज 700 रुपये के करीब खर्च होगा।

अवशेष मान कर जलाते हैं पराली

कुछ दशक पहले तक पारंपरिक तरीके से खेती होती थी, जिस में पशुओं का भी खासा योगदान था। उन के लिए भी चारा चाहिए होता था। उस समय गेहूं और धान के अवशेष चारे के रूप में इस्तेमाल होते थे। मौजूदा समय हार्वेस्टर, रीपर जैसी फसल काटने की मशीनें आ गई हैं, जो फसल में फल वाले ऊपरी हिस्से को काट देती हैं और बाकी नीचे फसल का पूरा तना बच जाता है, जिसे फसल अवशेष मान कर पराली को जलाया जाता है।

जमीन की उर्वरक क्षमता होती है कम

कृषि कॉलेज एवं अनुसंधान केंद्र मर्रा पाटन के डीन डॉ.अजय वर्मा ने बताया कि पराली जलाने से केवल वायु प्रदूषण ही नहीं होता बल्कि जमीन में नाइट्रोजन, फास्फोरस, सल्फर और पोटेशियम जैसे पोषक तत्वों के अलावा जमीन की उर्वरक क्षमता भी कम हो जाती है। इससे किसान खेतों में उत्पादकता बढ़ाने के लिए रासायनिक उर्वरक का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करते हैं।

बेलर मशीन क्या है

धान व गेहूं, गन्ने की कटाई के बाद खेत में पड़े पलारी, अवशेष को गठ्ठरों तैयार करने वाली बेलर मशीन है। जो कि एक सामान्य साइज की मशीन है, जिससे तैयार गठ्ठर का साइज 700 से 1000 एमएम होगा। इसमें 25-40 एचपी ट्रैक्टर से संचालित किया जाएगा।

फैक्ट फाइल

-पराली का बना यह रोल किसानों के मवेशियों का चारा (कुट्टी) बनेगा।

-आसानी से लाने-ले जाने के कारण गोठानों में भी काम आ सकेगा।

-खेत में आसानी से ट्रैक्टर के साथ बेलर मशीन को चलाया जा सकता है।

-बेलर मशीन से किसानों की आय बढ़ाने में होगी मददगार।

-मशीन की कीमत तीन लाख से शुरू।

-चारा के साथ खाद के रूप में भी कर सकेंगे उपयोग।

Posted By: Nai Dunia News Network

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