संदीप तिवारी, रायपुर। Health News: इम्यूनिटी अर्थात शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता हर बीमारी से मुक्ति दिलाने का आखिरी रास्ता है। चाहे दवाई लें, चाहे आपरेशन किया जाए। आदमी स्वस्थ तो रोग प्रतिरोधक क्षमता से ही होता है। यह कहना है रायपुर एम्स के एसोसिएट प्रोफेसर एवं चिकित्सक शल्य चिकित्सा विभाग के डॉ. राधाकृष्णा रामचंदानी का। डॉ. चंदानी कहते हैं कि प्रकृति में अनगिनत जीव-जंतु हैं, जो बिना चिकित्सा के ही कई तरह की बीमारियों और चोट आदि से खुद ब खुद ही ठीक हो जाते हैं।

इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि उनको स्वयं पता होता है कि कैसे खुद की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाई जाए। यानी जब तक हमें अपनी प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के लिए कारगर उपाय पता नहीं होंगे, तो हम बीमारियों से खुद की सुरक्षा नहीं कर पाएंगे। हमारी जीवन शैली प्रकृति में अनुकूल किया जाए, तो हम कई तरह के बीमारियों के विरूद्ध अपनी प्रतिरोधक क्षमता बढ़ा सकते हैं। जरूरत है अपनी इच्छाशक्ति को बढ़ाने की। योग और प्राणयाम इसका एक सफल वैज्ञानिक प्रमाणिक माध्यम है। सच कहें तो योग श्रृंखलित जीवन का अन्य नाम है।

कोरोना काल में परंपराओं ने बचाया

डॉ. राधाकृष्णा रामचंदानी कहते हैं कि कोरोना काल में भारत जैसे परंपराओं और मान्यताओं वाले देश में कोरोना का उतना प्रभाव नहीं पड़ा, जितना दुनिया के विकसित देशों में इसका दुष्प्रभाव देखने को मिला है। इसका कारण हमारी सांस्कृतिक एवं परंपराओं वाली जीवनशैली है, जो कि कहीं न कहीं रोग प्रतिरोधक क्षमता से सीधे जुड़ी हुई है। न केवल कोरोना बल्कि, हर तरह की बीमारियों से सीधी लड़ाई हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता से होती है।

इसलिए इसका शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बरकरार रखना जरूरी है। इसके लिए हमें परंपरागत जड़ी-बूटियों का भी सहारा लेना पड़ सकता है। अश्वगंधा, गिलोय, तुलसी, हल्दी, आंवला जैसे जड़ी-बूटियां भी इम्यूनिटी को बढ़ाती हैं। कई बार लोगों के शरीर में विटामिन डी की कमी हो जाती है। इस कमी को पूरा करने के लिए हमें सुबह धूप में खड़े होकर सूरज की रोशनी लेनी चाहिए। इससे भी शरीर स्वस्थ और स्फूर्त रहता है।

आधुनिक जीवन शैली ने बीमारियों से घेरा

डॉ. राधाकृष्णा रामचंदानी कहते हैं कि बढ़ती उम्र, शुगर, बीपी तथा आधुनिकता वाली जीवनशैली के कारण कई बीमारियों में दूसरे संक्रमित बीमारियों का संक्रमण का शिकार होने की आशंका बहुत रहती है। खासकर कोरोना जैसे संक्रमण, जहां कोई कारगर दवाई नहीं है, वहां योग जीवन शैली में परिवर्तन तथा गहरे आत्मविश्वास के लिए बहुत जरूरी है। न केवल संक्रमण बल्कि और सारी बीमारियों तथा कैंसर जैसे बीमारियों से भी प्रतिरोधक क्षमता से ही बचा सकता है।

सुझावों पर किया अमल तो कोरोना से लड़ रहे लड़ाई

कोरोना काल में जब दवाई नहीं थी, तब भारत सरकार ने एहतियातन सक्रियता दिखाते हुए लोगों को अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए कई कारगर उपाय बताए। रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने लिए आयुष मंत्रालय ने सुझाव दिया था कि सुबह 10 ग्राम यानी एक चम्मच च्यवनप्राश का सेवन करें। इसके साथ यदि आपको मधुमेह है तो शुगर फ्री च्यवनप्राश का भी सेवन कर सकते हैं।

लोगों ने घरों पर हल्दी दूध का मिश्रण लेना शुरू कर दिया था। 150 मिली लीटर गर्म दूध में आधा चम्मच हल्दी पाउडर मिलाकर दिन में एक या दो बार पीने की सलाह लेने के बाद बच्चे, महिला और बुजुर्गों ने इसका खूब सेवन किया। हल्दी के बारे में तो जानते ही हैं कि आपकी रसोई में इससे बढ़िया कोई दवा नहीं है। हल्दी को दर्द निवारक भी कहा जाता है, इसीलिए चोट लगने पर हल्दी और चूने का लेप लगाया जाता है। तुलसी, दालचीनी, काली मिर्च, सूखी अदरख और मुनक्का से बनी हर्बल चाय या काढ़ा पीने वालों की संख्या बढ़ती दिखी।

विटामिन सी के लिए इनका कर रहे सेवन

विशेषज्ञों ने इस बात पर खूब जोर दिया कि कोरोना काल में हमें विटामिन सी सबसे ज्यादा लेना चाहिए। इसकी वजह से लोगों ने खट्टे फलों का सेवन करना शुरू कर दिया था। विशेषज्ञों के मुताबिक संतरा, मौसमी, स्ट्राबेरी, जामुन, नींबू और आंवला में विटामिन सी की भरपूर मात्रा होती है, जो शरीर में श्वेत रक्त कोशिका को बनाती है जो कि संक्रमण से लड़ने में शरीर की मदद करता है।

कोरोना काल में कफ और खांसी के इलाज में अदरक को रामबाण कहा गया है। अदरक का सेवन आपको संक्रमण और फ्लू से बचाता है। रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए भी अदरक का सेवन सब्जी, चाय, काढ़ा आदि के रूप में कर सकते हैं। अदरक कोलेस्ट्राल को भी नियंत्रित रखता है और पुराने दर्द में भी काम करने का गुण होता है।

हरी सब्जियों में पालक ऊपर

हरी सब्जियों में पालक सबसे महत्वपूर्ण सब्जी है। पालक विटामिन सी का सबसे बड़ा स्त्रोत है। इसमें कई तरह के एंटीआक्सिडेंट होते हैं, जो हमारे प्रतिरक्षा प्रणाली की संक्रमण से लड़ने की क्षमता को बढ़ाते हैं। पालक को धीमी आंच पर पकाना चाहिए, नहीं तो इसमें मौजूद पोषकतत्व नष्ट हो जाएंगे। पालक के हरे पत्ते खाने से भी यह लाभकारी है।

कई संस्थाओं ने माना प्रतिरोधक क्षमता के लिए लहसुन कारगर

नेशनल सेंटर फॉर कॉम्पिलमेंटरी एंड इंटीग्रेटिव हेल्थट्रस्टेड के अनुसार, लहसुन रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में कारगर है। इसके अलावा लहसुन निम्न रक्तचाप और धमनियों को सख्त बनाने में भी काफी मदद करता है। लहसुन में एलिसिन पाया जाता हो जो कि रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में काफी सहायक होता है। पौष्टिक आहार, हरी सब्जियां और फल इत्यादि भी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए और दूसरे माध्यम हैं। जीवन शैली का बदलना सही खान-पान करना और तनावमुक्त रहना।

ये सब कहीं न कहीं हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में सहायक हैं। योग और प्राणयाम इसका एक बेहतर माध्यम है। प्रकृति के शोषण के बदले दोहन वाली नीति से अगर हमारी जीवन शैली बनाई जाए तो हम हर बीमारी पर विजय पाकर एक बेहतर स्वस्थ जीवन के लिए अग्रसर हो सकते हैं। गैर मौसमी फल-सब्जियां खाने से थोड़ा बचना चाहिए, जिससे बीमारियां कम हों। कई बार गैर मौसमी फल-सब्जियों के सेवन से भी बीमारियां हो सकती है।

वैज्ञानिकों ने भी यह माना है कि भारत सहित दुनियाभर को अपनी चपेट में लेने वाले कोरोना वायरस ने उन लोगों को जल्दी संक्रमित किया, जिनके शरीर की प्रतिरोधक क्षमता अपेक्षाकृत कम थी। ऐसे में विशेषज्ञों की सलाह पर हमारे यहां शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के तरीकों पर खूब जोर दिया गया। अब जबकि कोरोना का प्रभाव अपने देश में कम होता दिख रहा है, ऐसे में आने वाले समय में भी हमें अपने खान-पान का ध्यान रखना जरूरी है ताकि किसी भी तरह के संक्रमण से बचने के लिए आगे भी हमारा शरीर पूरी तरह से मजबूत रहे।

Posted By: Shashank.bajpai

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