श्रीशंकर शुक्ला, रायपुर। छत्तीसगढ़ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट भारतमाला परियोजना अटक गई है। दरअसल योजना के अंतर्गत टेडेसरा से आरंग तक बनने वाले फोरलेन पर ग्रहण लगता दिखाई दे रहा है। लखौली टोल प्लाजा और धमधा टोल प्लाजा के संचालकों ने इसका विरोध किया है, क्योंकि फोरलेन बन जाने से दोनों टोल प्लाजा पर गाड़ियों की संख्या कम हो जाएगी, उनके व्यापार पर असर पड़ेगा। इसलिए दोनों ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआइ) से मुआवजे की मांग है। अधिकारियों का कहना है कि पहले यह प्रोजेक्ट विभाग की पहली प्राथमिकता में था, लेकिन अब पेंडिंग में डाल दिया गया है।

वजह साफ है कि टोल प्लाजा वालों को मुआवजा देने पर प्रोजेक्ट की लागत तीन गुना बढ़ जाएगी। इतना खर्चा करना एनएचएआइ के लिए संभव नहीं है। हालांकि एनएचएआइ ने दोनों टोल प्लाजा के संचालकों से मुआवजे की अनुमानित राशि की जानकारी मांगी है, लेकिन उन्होंने अभी तक जानकारी नहीं दी है।

बता दें कि टेडेसरा से रायपुर से सटे आरंग तक 92.230 किलोमीटर के फोरलेन के निर्माण की स्वीकृति करीब चार साल पहले मिली थी। फोरलेन के निर्माण में करीब 1500 करोड़ खर्च होना है तथा रायपुर से दुर्ग तक कुल साढ़े चौदह सौ करोड़ की लागत से भू-अधिग्रहण का काम किया जाना है। एनएचएआइ के अधिकारियों ने भू-अधिग्रहण के लिए सर्वे कर लिया है। लेकिन शासकीय स्वीकृति अभी तक अधिकारियों को नहीं मिली है कि कितना पैसा किसको देना है।

इनका कहना है

टेडेसरा से आरंग तक बनने वाले 92.230 किलोमीटर का इकोनॉमिक कॉरिडोर बनाना है, लेकिन आरंग से टेडेसरा के बीच आने वाले टोल नाका की वजह से दिक्कत आ रही है।

- बीएल मीना, अनुविभागीय अधिकारी, एनएच, क्षेत्रीय कार्यालय, रायपुर।

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Posted By: Hemant Upadhyay