मृगेंद्र पांडेय, रायपुर। Bijapur Naxalite Attack: छत्तीगसढ़ के बीजापुर में हुए नक्सली हमले ने जंगलों में लोहा ले रहे जवानों को अंदर तक झकझोर दिया है। जवान अब आर-पार की लड़ाई लड़ने के मूड में आ गए हैं। प्रदेश में ऐसा पहली बार हो रहा है कि जवान अब इंटरनेट मीडिया पर आम आदमी से समर्थन की मांग कर रहे हैं। इसके लिए 'आखिर कब तक' कैंपेन शुरू किया है।

बीजापुर में तैनात छत्तीसगढ़ पुलिस के डीएसपी अभिषेक सिंह ने 'आखिर कब तक' कैंपेन शुरू करते हुए लिखा है कि जंगलों में नक्सल अभियान को हम देख लेंगे। आप सिर्फ हमारा साथ दीजिए। यह जवानों का जोश है कि अपने तीन अप्रैल को बीजापुर नक्सली मुठभेड़ में 22 साथियों को खोने के बाद भी उनकी मांद में घुसकर जवाब देने को पूरे जज्बे के साथ तैयार हैं।

मूल रूप से उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिला निवासी और बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के पूर्व छात्र डीएसपी अभिषेक सिंह ने लिखा है, सिर्फ वीर शहीदों को श्रद्धांजलि और नमन लिखने से काम नहीं चलेगा। मैं तो अपनी ड्यूटी करूंगा ही, पहले से और अधिक दृढ़ता के साथ, लेकिन लिखूंगा भी। लिखूंगा अपने भाइयों के शौर्य के बारे में, लिखूंगा उनकी शहादत के बारे में...।

आपसे बस एक सहयोग चाहिए। आप इंटरनेट मीडिया पर इन वीरों को जिंदा रखिए। शहीदों के स्वजनों को जो दुख झेलना पड़ा है, वो किसी और को न झेलना पड़े, इसके लिए आप सवाल कीजिए। फेसबुक पर कैंपेन के समर्थन में हजारों लोगों का संदेश आ चुका है। सूरज गुप्ता ने लिखा, मत भूलिए की नक्सलियों के सफाए में सबसे कारगर भूमिका सलवा जुड़ूम ने निभाई थी।

ग्रामीणों ने खुद ही छोटे-छोटे हथियारों के साथ नक्सलियों से मोर्चा लेना शुरू किया था। हम सच को सच नहीं कह पा रहे हैं। गद्दार को गद्दार नहीं कह पा रहे हैं। हमारे जवान एक गिनती बन कर रह गए हैं। कब तक चलेगा यह सब...। मजीद अहमद ने लिखा है- बिल्कुल सर, हम सब आपके साथ हैं। हमारे जवानों की शहादत व्यर्थ नहीं जाने देंगे।

नक्सलियों का दायरा सिमटता जा रहा : डीजीपी

डीजीपी डीएम अवस्थी ने कहा कि हमलावर नक्सली देखने में गरीब लगते हैं, लेकिन इन्हें मदद पहुंचाने वाले देशद्रोही हैं। ऐसे लोगों को सरकार तोड़ रही है और पुलिस यहां नक्सलियों से सीधी लड़ाई कर उन्हें खत्म करने की कोशिश कर रही है। नक्सलियों के खिलाफ आपरेशन होंगे तो नक्सली हमलावर होंगे ही। हम लगातार नक्सल मांद तक घुसते जा रहे हैं। पिछले चार-पांच साल में काफी दबाव बना है। हम उनके कब्जे से काफी इलाका मुक्त कराने में सफल हुए हैं। उनका दायरा अब सिमटता जा रहा है।

Posted By: Azmat Ali

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