मृगेंद्र पांडेय, रायपुर। Birthday Special: राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के पांचवें सरसंघचालक केसी सुदर्शन ने छत्तीसगढ़ में प्रचारक के रूप में संघ की मजबूत नींव रखी थी। रायपुर में 18 जून 1931 जन्में सुदर्शन ने सागर विश्वविद्यालय से टेलीकाम, टेलीकम्युनिकेशन में बीई की डिग्री ली और 23 साल की उम्र में पूर्णकालिक प्रचारक बने। प्रचारक के रूप में उनको 1964 में रायगढ़ की जिम्मेदारी दी गई थी।

सुदर्शन की प्रारंभिक शिक्षा रायपुर, दामोह, मंडला और चंद्रपुर में हुई। इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने वाले सुदर्शन ने संघ में पहली बार सोशल इंजीनियरिंग का प्रयोग किया। उनके कार्यकाल में ही राष्ट्रीय मुस्लिम मंच का गठन किया गया। संघ के सामाजिक समरसता के कार्यक्रम को आगे बढ़ाने में भी सुदर्शन का महत्वपूर्ण योगदान है।

विदिशा और इंदौर में जैविक कृषि के केंद्र किया था शुरू

श्रीसुदर्शन प्रेरणा मंच के अध्यक्ष डा. राजेंद्र दुबे बताते हैं कि सुदर्शन ने जैविक कृषि, आधुनिक गौपालन जैसे कार्यक्रम शुरू किए। नवाचार को लेकर उनकी गंभीरता का अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने प्लास्टिक से बिजली और गोबर से बिजली बनाने के प्रयोग किए। मध्य प्रदेश के विदिशा और इंदौर में जैविक कृषि के केंद्र शुरू किए, जो आज भी सक्रिय है। छत्तीसगढ़ में संघ की मजबूत नींव रखने में उनका बहुत बड़ा योगदान है। बिलासपुर, रायगढ़, जशपुर, अकलतरा में सबसे लंबे समय तक उन्होंने काम किया। यही कारण है कि उनके काम का असर आज भी बिलासपुर संभाग की राजनीति में देखने को मिलता है।

आयुर्वेद पर था भरोसा

श्रीसुदर्शन प्रेरणा मंच के भास्कर किन्हेकर ने बताया कि सुदर्शन अच्छे वक्ता के साथ ही अच्छे लेखक भी थे। उनका आयुर्वेद पर बहुत विश्वास था। लगभग 20 वर्ष पूर्व भीषण हृदयरोग से पीड़ित होने पर चिकित्सकों ने बाइपास सर्जरी के लिए कहा, लेकिन उन्होंने देसी इलाज करना बेहतर समझा। उन्होंने खुद को लौकी के ताजे रस के साथ तुलसी, काली मिर्च का सेवन करके ठीक कर लिया था। हालांकि अंतिम दिनों में उनको हार्ट अटैक आया और रायपुर के एक निजी अस्पताल में इलाज चला। उन्होंने अंतिम सांस 15 सितंबर 2012 को रायपुर स्थित संघ कार्यलय जागृति मंडल में ली।

संघ की शाखाओं में भी किए नए प्रयोग

भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सच्चिदानंद उपासने ने बताया कि सुदर्शन ने संघ की शाखाओं में भी नए प्रयोग किए। 1969 से 1971 तक जब वे अखिल भारतीय शारीरिक प्रमुख थे, उस दौरान योग और खेल को शामिल कराया। आपातकाल के दौरान उन्होंने संगीतमय व्यायाम के अपने जीवन में उतारा। शाखा पर होने वाले प्रात:स्मरण के स्थान पर एकात्मता स्तोत्र और एकात्मता मन्त्र को भी उन्होंने प्रचलित कराया।

Posted By: Azmat Ali

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