रायपुर। रायपुर नगर निगम के अधिकारियों की मिलीभगत से किए जा रहे भारी भ्रष्टाचार के मामले पर निगम के भाजपा पार्षद दल ने जमकर हमला बोला है। भाजपा कार्यालय एकात्म परिसर में नेता प्रतिपक्ष मीनल चौबे, वरिष्ठ पार्षद सूर्यकांत राठौर, मृत्युजंय दुबे,डा.प्रमोद साहू और भाजपा जिला अध्यक्ष जयंती पटेल ने संयुक्त पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि तेलीबांधा थाना चौक से वीआईपी रोड टर्निंग तक डिवाइडर सुंदरीकरण करने दो करोड़ का काम बिना वर्क आर्डर जारी किए अपने चहेते ठेकेदार को महापौर और आयुक्त ने देकर 80 प्रतिशत काम भी करवा लिया। वहीं इस मामले में रायपुर नगर निगम के महापौर एजाज ढेबर का कहना है कि जिस काम का पैसे का भुगतान ही नहीं हुआ है, उस मामले को लेकर विपक्ष द्वारा आर्थिक अपराध ब्यूरों में शिकायत करना समझ से परे है। विपक्ष का काम केवल आरोप लगाना रह गया है।

नेता प्रतिपक्ष मीनल चौबे ने बताया कि 26 अक्टूबर को जोन क्रमांक 10 से जनसंपर्क अधिकारी नगर पालिक निगम के नाम एक ज्ञापन जारी किया जाता है, जिसके साथ निविदा आमंत्रण सूचना की प्रति संलग्न है, जिसकी एक प्रति महापौर को भी भेजी जाती है। निविदा में स्पष्ट शब्दों में लिखा है कि उपरोक्त कार्यों में मैनुअल पद्धति से निविदा आमंत्रित की जाती है। कार्य को 12 भागों में ऐसा बांटा गया जिसमें आनलाइन टेंडर की गुंजाइश न रहे। 30 अक्टूबर को इस निविदा आमंत्रण का प्रकाशन होता है, उसके बाद फाइल मुख्यालय में तकनीकी स्वीकृति के के बाद वित्तीय स्वीकृति के लिए जाती है। जिसमें अनटाइड फंड से महापौर-आयुक्त के हस्ताक्षर से आगे की कार्रवाई के लिए फाइल भेजी जाती है।

सवाल यह है कि राज्य शासन के स्पष्ट निर्देश है कि एक ही प्रकार के कार्य के लिए अलग-अलग टेंडर करना निषेध है बावजूद इसके समान प्रवृत्ति के कार्य का 12 अलग-अलग टेंडर क्यों किया गया? महापौर और आयुक्त के हस्ताक्षर वाली वित्तीय स्वीकृति यह साबित करती है कि दोनों ने राज्य शासन के आदेश की अवहेलना की।इसके पीछे मंशा यही थी कि इस काम का टेंडर मैनुअल हो आनलाइन ना हो। यहीं नहीं बिना एनएचएआई की सहमति पत्र के जोन से टेंडर निकालना असंवैधानिक है। निगम की इस कार्य प्रणाली के संज्ञान में आने के बाद कहां जाता है कि यह काम क्रेडाई के द्वारा करवाया जा रहा है। क्या क्रेडाई शहर में कहीं भी कभी भी अपने मन से काम कर देगी, जब क्रेडाई वहां काम कर रही है तो नगर निगम अनटाइड फंड से लगभग दो करोड़ की स्वीकृत राशि का भुगतान किसको किया जाना था?

रावतपुरा फेस टू के नाली निर्माण पर भी उठी उंगली

नेता प्रतिपक्ष मीनल चौबे ने कहा कि निगम की गैर जिम्मेदाराना कार्यप्रणाली का दूसरा उदाहरण रावतपुरा फेस टू के नाली निर्माण का काम है।17 मई को यहां पर एक करोड़ की लागत से नाली, रोड निर्माण का काम टुकड़ों-टुकड़ों में तोड़ा गया। पांच अलग-अलग पार्ट में टेंडर निकाला गया और एक ही व्यक्ति को काम दिया गया। कायदे से उपरोक्त कार्य का भी सिंगल टेंडर हो सकता था पर आनलाइन से बचने के लिए कार्य को विभाजित किया गया।आश्चर्य की बात है कि इसी वार्ड के एक भाग में 14 वे वित्त आयोग से पिछले वर्ष दो करोड़ का काम हुआ था,उसे भी 16 अलग-अलग भागों में बांटा गया और मैनुअल टेंडर किया गया।

ईओडब्ल्यू में दस्तावेजी शिकायत

भाजपा पार्षद दल ने ईओडब्ल्यू दफ्तर में जाकर निगम प्रशासन द्वारा किए जा रहे अनियमितताओं की दस्तावेज के साथ शिकायत की। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि हमारे पास सारे दस्तावेज हैं। इस मौके पर उप नेता प्रतिपक्ष मनोज वर्मा,वरिष्ठ पार्षद मृत्युंजय दुबे प्रमोद साहू माजूद रहे।

Posted By: Abhishek Rai

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