रायपुर। महिलाओं में मेटास्टैटिक ब्रेस्ट कैंसर के केस बढ़ते जा रहे हैं। इस बीमारी से रक्त प्रणाली और लसिका (लिम्फैटिक) के माध्यम से शरीर के अन्य हिस्सों में फैल जाता है। धीरे-धीरे शरीर के अन्य हिस्सों में मेटास्टैटिक के तौर पर नए ट्यूमर का निर्माण होने लगता है और शरीर के अंग जैसे लिवर, मस्तिष्क, हड्डी और फेफड़े को प्रभावित करने लगता है। इस प्रकार के स्तन कैंसर में उपचार के बाद भी कैंसर दूसरे हिस्से में वापस आ सकता है। इसे सर्जरी, दवाओं के जरिये नियंत्रित किया जा सकता है। ऐसे मामलों में उपचार के दौरान मरीज को सकारात्मक होना जरूरी है।

पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय के सभागार में स्तन रोग पर आयोजित राष्ट्रीय अधिवेशन के अंतिम दिन शनिवार को प्रथम सत्र में अजमेर मेडिकल कॉलेज की पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. कुमकुम सिंह ने उक्त बातें कहीं।

ब्रेस्ट आंकोप्लास्टी के बारे में डॉ. आनंद मिश्रा ने कहा कि यदि स्तन में कोई गांठ हो जाती है तो आंकोसर्जन की टीम स्तनों को सुरक्षित रखते हुए केवल गांठ वाले हिस्से को सावधानीपूर्वक निकालती हैं, जिससे स्तनों के आकार में कोई परिवर्तन नहीं आता है।

आजकल यह सर्जरी भी समय के साथ उन्नत हो चुकी है। बिना किसी बड़े निशान या धब्बे के शल्य क्रिया के जरिये गांठ को बाहर निकाल दिया जाता है। आंकोप्लास्टी ब्रेस्ट सर्जरी में कोशिश की जाती है कि पूरे स्तन को न निकालकर उसके रोगग्रस्त हिस्से को ही निकाला जाये।

ब्रेस्ट कैंसर को किया जा सकता है जड़ से खत्म

डॉ. आशुतोष गुप्ता ने कीमोपोर्ट इन्सर्शन के तरीके पर वीडियो के माध्यम से जानकारी दी। कीमोथेरेपी के बाद जब नसें दिखनी या मिलनी बंद हो जाती हैं तो एक डिवाइस जिसे कीमोपोर्ट कहते हैं, को छाती पर इन्सर्ट करके नस तक आसानी से पहुंचा जा सकता है।

मोडिफाइड रेडिकल मेस्टेक्टॉमी के बारे में डॉ. चिंतामणि ने बताया कि स्तन कैंसर जो ऑपरेशन से निकाला जा सकता है। इसमें सबसे ज्यादा किये जाने वाले ऑपरेशन हैं मोडिफाइड रेडिकल मेस्टेक्टॉमी। इसमें बीमारी को जड़ से निकाल दी जाती है, उसके बाद रेडियेशन दिया जाता है।

डॉ. अनुराग श्रीवास्तव ने कहा कि स्किन स्पेरिंग मेस्टेक्टॉमी में चमड़ी को बचाते हुए स्तन को निकाला जाता है। इसी प्रकार ब्रेस्ट रिकंस्ट्रक्शन में पीठ की मांसपेशियों का इस्तेमाल करके स्तन को फिर से बनाया जा सकता है।

चिकित्सकों को दिया गया स्मृति चिन्ह

अधिवेशन के दूसरे सत्र में मोडिफाइड रेडिकल मेस्टैक्टॉमी, स्किन रिपेयरिंग मेस्टैक्टॉमी, ब्रेस्ट रिकंस्ट्रशन और कीमोपोर्ट इन्सर्शन के तरीकों को वीडियो के माध्यम से बताया गया। कार्यक्रम में सफदरजंग अस्पताल नई दिल्ली के वरिष्ठ सर्जन डॉ. चिंतामणी, एम्स नई दिल्ली के सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. अनुराग श्रीवास्तव, अजमेर मेडिकल कॉलेज की पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. कुमकुम सिंह, नई दिल्ली के यूसीएमएस अस्पताल की सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. नवनीत कौर तथा केजीएमसी लखनऊ के एंडोक्राइन सर्जरी के विभागाध्यक्ष डॉ. आनंद मिश्रा विशेष तौर पर शामिल हुए। सर्जन डॉ. संदीप चंद्राकर, डॉ. मंजू सिंह, डॉ. अंजना निगम, डॉ. अमित अग्रवाल, डॉ. राजेंद्र रात्रे के साथ एएसआइ छत्तीसगढ़ चैप्टर के अध्यक्ष डॉ. एफ. एच. फिरदौसी, सचिव डॉ. संतोष सोनकर समेत सर्जिकल क्लब रायपुर के अध्यक्ष डॉ. सुभाष अग्रवाल, सचिव डॉ. वैभव जैन समस्त पदाधिकारी उपस्थित थे। कार्यक्रम में शामिल सभी विशेषज्ञों, प्रतिनिधियों और सदस्यों को सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. शिप्रा शर्मा ने स्मृति चिन्ह भेंट करके धन्यवाद ज्ञापन किया।

Posted By: Sandeep Chourey

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