संदीप तिवारी, रायपुर। Off The Record: कुछ लोग व्यवस्था में रहकर चुपचाप भ्रष्टाचार करते हैं, तो कुछ खुलेआम धंधा करते हैं। छत्तीसगढ़ के स्कूल शिक्षा विभाग में कुछ ऐसा ही हो रहा है इन दिनों। कुछ दिन पहले एक अधिकारी ने जिला शिक्षा अधिकारियों यानी डीईओ की बैठक में अपनी निजी पत्रिका की न केवल ब्रांडिंग की, बल्कि इसकी सदस्यता ग्रहण करने के लिए दबाव भी बनाया।

दिलचस्प बात यह है कि जब इस बैठक की आड़ में एक अफसर पत्रिका की ब्रांडिंग कर रहे थे, उस समय विभाग के अन्य अधिकारी और मंत्री भी मौजूद थे। पता नहीं मंत्री को यह बात कैसे पच गई, लेकिन प्रदेश के अन्य शिक्षा अफसरों में यह बात चर्चा का विषय बन गई है। चर्चा है कि इस पत्रिका की वार्षिक सदस्यता के लिए प्रदेश के सभी डीईओ, डीएमसी, खंड शिक्षा अधिकारी और खंड स्रोत समन्वयकों पर दबाव बनाकर वसूली करने की बड़ी योजना है।

बच्चे ही नहीं, गुरुजी भी मार रहे बंक

राजधानी में ही शिक्षा व्यवस्था की धज्जियां उड़ रही हैं। कोरोना काल में स्कूलों से बच्चे तो बंक मार ही रहे हैं, साथ में गुरुजी भी कक्षाओं से बंक मार रहे हैं। लगातार शिकायतों के बाद जब अफसरों ने स्कूल नहीं आने वाले गुरुजी पर कोई कार्रवाई नहीं की तो खुद धरसीवां के गुमा गांव के सरपंच और यहां के अन्य जनप्रतिनिधियों ने प्राथमिक स्कूल गुमा का आकस्मिक निरीक्षण किया। यहां नौ में से सात शिक्षक स्कूल से गायब मिले। कमोबेश दूसरे स्कूलों में भी यही हालात हैं।

अफसर केवल एयर कंडीशनर कमरों में बैठकर योजनाएं बनाते हैं और जमीनी स्तर पर इसका अमलीजामा पहनाने की जिम्मेदारी उठाने वाले इनके नियमों की धज्जियां उड़ाते हैं। मामले में जिला शिक्षा अधिकारी एएन बंजारा और धरसीवां के बीईओ संजयपुरी गोस्वामी कहते हैं कि इनको नोटिस जारी कर दिए हैं, जवाब संतोषजनक नहीं मिला तो सख्त कार्रवाई होगी।

मान्यता का खेल

स्कूल हो या कालेज हर जगह मान्यता और संबद्धता को लेकर जमकर खेल चल रहा है। स्कूली शिक्षा विभाग में अभी तक तो केवल जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय तक मान्यता को लेकर खेल चलता था लेकिन इन दिनों संयुक्त संचालक कार्यालयों में भी यह धंधे के रूप में उभर रहा है। छोटी-छोटी औपचारिकताओं के नाम पर स्कूल प्रबंधकों को बार-बार घुमाया जा रहा है। इससे स्कूल प्रबंधकों को अपना स्कूल चलाने के लिए जेब ढीली करनी पड़ रही है।

आलम यह है कि मान्यता और मान्यता की नवीनीकरण की जो प्रक्रिया समय पर हो जानी चाहिए उसको अधिकारी सत्र के बीच में कर रहे हैं। इससे साफ जाहिर होता है कि यह मान्यता के नाम पर फाइल रोकने की मंशा है। एक बार मान्यता प्राप्त करने के बाद हर साल नवीनीकरण का धंधा चल रहा है। फिर भी स्कूल की गुणवत्ता जस की तस है।

गैस सिलिंडर के धंधे में नेताजी

एक नेताजी आजकल गैस सिलिंडर की धंधे में उतर आए हैं। मामले का पर्दाफाश भी हो गया। पिछले दिनों जब खाद्य विभाग के अधिकारी गैस सिलिंडरों से अवैध तरीके से गैस निकालते हुए पकड़े गए तो उन्हें बचाने के लिए नेताजी ने एड़ी-चोटी का बल लगा दिया। अब क्या था, खाद्य विभाग के अधिकारियों को बैकफुट पर जाना पड़ा।

गैस सिलिंडरों के अवैध धंधा कर रहे संचालकों पर कार्रवाई की बजाय कमजाेर लोगों को बली का बकरा बनाकर मामले का रफा-दफा कर दिया गया है। इस मामले को लेकर शहर में चर्चा आम हो गई है। कभी राशन दुकान तो कभी सिलिंडरों के धंधे में नेताजी संलिप्त नजर आ रहे हैं और आम आदमी के साथ लूट खसोट मची हुई है। ऐसे में अब हमें खुद ही जागरूक होना पड़ेगा, नहीं तो हम यूं ही लुटते रहेंगे और नेताजी ऐसे ही मजे करते रहेंगे।

Posted By: Shashank.bajpai

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