रायपुर। भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रदेश मीडिया प्रभारी उमेश घोरमोड़े ने राजधानी रायपुर में लॉकडाउन के दरमियान सभी प्रकार की मंडियों थोक फुटकर ग्रॉसरी दुकानें बंद रखते हुए सीधे किसानों व उत्पादकों से आपूर्ति की शर्त पर फल सब्जी ग्रासरी के विक्रय की अनुमति केवल ठेले वालों को दिए जाने के प्रदेश सरकार के निर्णय को अव्यवहारिक बताया है। उन्होंने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को याद दिलाते हुए कहा कि 16 अप्रैल 2020 को वाहवाही लूटने और दूसरे राज्यों से छत्तीसगढ़ के प्रबंधन को बेहतर बताने की जल्दबाजी में प्रदेश में छत्तीसगढ़ हॉट ऐपलांच किया था, जिसमे सब्जियों की घर पहुंच सेवा की व्यवस्था की बात करते हुए सीएम भूपेश बघेल ने वाहवाही लूटी थी।

छत्तीसगढ़ सरकार को बताना चाहिए कि छत्तीसगढ़ हॉट ऐप कहां गुम हो गया? बेहतर प्रबंधन का दावा करने वाले मुख्यमंत्री भूपेश बघेल सहित अन्य कांग्रेस के नेताओं को अब क्या छत्तीसगढ़ की जनता की चिंता नहीं या फिर कांग्रेस के सभी नेता असम से आये प्रत्याशियों की चिंता में इतने मसगुल हो चुके हैं कि छत्तीसगढ़ की जनता उन्हें याद ही नहीं आ रही?

भाजयुमो के प्रदेश मीडिया प्रभारी उमेश घोरमोड़े ने कहा कि कोरोना संकट के बीच लगातार अन्य राज्यों से बेहतर प्रबंधन का दावा करने वाली छत्तीसगढ़ सरकार के कुप्रबंधन के चलते छत्तीसगढ़ की जनता कालाबाजारी का शिकार हो रही हैं। राजधानी रायपुर में लॉकडाउन से पूर्व दो दिनों में प्रदेश सरकार के नाक के नीचे व्यापारियों ने मनमाने दाम पर जनता को लूटा, अब 26 अप्रैल तक लॉकडाउन बढ़ाने के दरमियान अव्यवहारिक आदेश से जनता पुनः मनमानी और कालाबाजारी का शिकार होगी यही नजर आ रहा हैं।

उन्होंने प्रदेश सरकार से पूछा हैं कि 26 अप्रैल तक ठेले वालो तक वस्तुओं की आपूर्ति मांग के अनुरूप कैसे होगी? क्या वस्तुओं की आपूर्ति और सप्लाई चेन पर आदेश जारी करने से पूर्व गंभीरता से विचार नहीं किया गया? क्या ऐसे अव्यवहारिक प्रबंधन से जनता तक वस्तुएं पहुंच पाएंगी? उन्होंने कहा कि सबसे महत्वपूर्ण क्या ऐसे अव्यवहारिक निर्णय जिसमे सप्लाय चेन का ध्यान ही नहीं रखा गया हैं से क्या जनता तक, प्रत्येक गली मोहल्लों तक ठेले वाले पहुंच पाएंगे?

जिन गली मोहल्लों में ठेले से आपूर्ति नहीं हो पाएगी वे कहां से अपनी आवश्यकता की पूर्ति करें प्रदेश सरकार को बताना चाहिए? भाजयुमो प्रदेश मीडिया प्रभारी उमेश घोरमोड़े ने कहा कि प्रदेश सरकार का यह निर्णय ना सिर्फ जनता के लिए परेशानी खड़ा करने वाला हैं बल्कि कालाबाजारी और मनमानी को बढ़ावा देने वाला है। उन्होंने प्रदेश सरकार से पूछा हैं कि वस्तुओं के मूल्यों का निर्धारण कैसे होगा और जनता तक सही मूल्य पर वस्तुएं कैसे पहुंचेगी?

उदाहरण के तौर पर कोई वस्तु यदि बाजार मूल्य से अधिक मनमाने दाम पर अलग अलग गली मोहल्लों और कालोनी में बेची जाती हैं तो सरकार उस पर नियंत्रण कैसे करेगी अच्छे प्रबंधन का दावा करने वाले मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को बताना चाहिए? साथ ही उन्हें यह भी बताना चाहिए कि क्या ऐसे अव्यवहारिक आदेश से छत्तीसगढ़ की जनता जो पहले ही दवाइयों रेमडेसिवीर इंजक्शन आदि की कालाबाजारी से परेशान हैं अब क्या गली मोहल्लों और अपने घर की चौखट पर ठगे जाने मजबूर नहीं होगी?

Posted By: Shashank.bajpai

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