रायपुर राज्य ब्यूरो। इस (जून) महीने के खत्म होते ही केंद्र सरकार राज्यों को वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) क्षतिपूर्ति देना बंद कर देगी। इससे प्रदेश सरकार को प्रत्येक वर्ष करीब तीन से पांच हजार करोड़ का नुकसान होगा। छत्तीसगढ़ सहित अन्य उत्पादक राज्य इसे अगले पांच वर्ष तक के लिए बढ़ाने की मांग कर रहे हैं।

प्रदेश के वाणिज्य कर मंत्री टीएस सिंहदेव ने मंगलवार को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को पत्र लिखकर जीएसटी क्षतिपूर्ति बंद किए जाने पर आपत्ति दर्ज कराई है। सिंहदेव ने कहा कि छत्तीसगढ़ खनन और विनिर्माण वाला राज्य है। उपभोक्ता राज्य नहीं होने के कारण राजस्व का बड़ा नुकसान होगा। सिंहदेव ने वर्ष 2018 से अब तक राज्य के राजस्व में हुए नुकसान का जिक्र करते हुए कहा कि इस परिस्थिति में सामाजिक क्षेत्र में पूंजी शीर्ष विकास और निवेश करना असंभव हो जाएगा।

राज्यों का नहीं बढ़ पाया राजस्व

बता दें कि देश में 2017 में जीएसटी लागू करते समय केंद्र सरकार ने इसकी वजह से उत्पादक राज्यों को होने वाले राजस्व के नुकसान की पूर्ति के लिए पांच वर्ष तक क्षतिपूर्ति देने का वादा किया था। यह उम्मीद की गई थी कि इन पांच वर्षों में राज्य अपना राजस्व बढ़ा लेंगे, लेकिन कोरोना सहित अन्य कारणों से ऐसा नहीं हो पाया।

सेंट्रल जीएसटी और स्टेट जीएसटी के प्रविधान में बदलाव का प्रस्ताव

मंत्री सिंहदेव ने सेंट्रल जीएसटी और स्टेट जीएसटी के प्रविधान में बदलाव का प्रस्ताव दिया। उन्होंने कहा कि सीजीएसटी और एसजीएसटी के 50-50 फार्मूले की जगह एसजीएसटी 80-70 और सीजीएसटी को 20-30 प्रतिशत में बदल दिया जाना चाहिए। सिंहदेव ने संविधान और संघीय ढांचे का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य सरकारों के लिए मजबूत और स्वतंत्र वित्तीय संसाधनों के बिना संघीय संरचना निरर्थक हो जाएगी।

जीएसटी लागू होने से ऐसे हो रहा राज्य को नुकसान

मंत्री सिंहदेव ने अपने पत्र में केंद्रीय वित्त मंत्री को बताया कि वैट की जगह जीएसटी लगाने से राज्यों को किस तरह नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। प्रदेश में अकेले लोहा से 1600 करोड़ स्र्पये का वैट मिलता था, लेकिन जीएसटी में सिर्फ 350 करोड़ मिल रहा है, यानी 1250 करोड़ का नुकसान हो रहा है। वैट और जीएसटी के अंतर में कोयला से 600 करोड़, धान से 590 करोड़ और तेंदूपत्ता से 100 करोड़ का नुकसान राज्य को उठाना पड़ रहा है।

वित्तीय वर्ष राजस्व नुकसान

2018-19 2 हजार 786 करोड़

2019-20 3 हजार 176 करोड़

2020-21 3 हजार 620 करोड़

2021-22 4 हजार 127 करोड़

उत्पाद वैट जीएसटी अंतर

लौह और स्टील 1600 करोड़ 350 करोड़ 1250 करोड़

कोयला 800 करोड़ 200 करोड़ 600 करोड़

धान 590 करोड़ - 0 करोड़ 590 करोड़

तेंदूपत्ता 110 करोड़ 10 करोड़ 100 करोड़

एल्यूमीनियम 19करोड़ 5करोड़ 14करोड़

मदिरा 18करोड़ 0करोड़ 18करोड़

किराना 15करोड़ 25करोड़ 10करोड़

टिंबर 15करोड़ 20करोड़ 5 करोड़

खाद्य तेल 55करोड़ 12करोड़ 43करोड़

ट्रैक्टर 25करोड़ 12करोड़ 13करोड़

Posted By: Ashish Kumar Gupta

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