रायपुर। संसदीय सचिव के पद को असंवैधानिक बताते हुए 15 वर्ष तक भाजपा सरकार पर हमलावर रही कांग्रेस, सत्ता में आते ही खुद संसदीय सचिवों की नियुक्ति की तैयारी में है।

मौजूदा सरकार में मंत्री मोहम्मद अकबर ने संसदीय सचिवों की नियुक्ति रद्द करने के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया था। अब कह रहे हैं कि संसदीय सचिवों के मामले में हाईकोर्ट के आदेश और निर्णय का पालन करेंगे। मंत्री टीएस सिंहदेव भी 'नईदुनिया" से विशेष बातचीत में संसदीय सचिव बनाए जाने पर विचार होने की बात कह चुके हैं।

संख्या बढ़ाकर 13 या 15 भी कर सकते हैं

संसदीय सचिवों की नियुक्ति का संविधान में प्रावधान नहीं है, लेकिन छत्तीसगढ़ में इसे लाभ का पद नहीं माना जाता है। इसलिए कांग्रेस सरकार न केवल संसदीय सचिवों की नियुक्ति पर विचार कर रही है बल्कि संख्या भी बढ़ाने की तैयारी में है। । मंत्री टीएस सिंहदेव का कहना है कि सीमा नहीं है। 11 की जगह 13 या 15 संसदीय सचिव भी बनाए जा सकते हैं।


हाईकोर्ट ने नियुक्ति रद करने से कर दिया था इंकार

भाजपा सरकार में 11 संसदीय सचिवों को मंत्रियों की तरह सुविधाएं और काम करने का अधिकार मिला हुआ था। विपक्ष में रहते हुए अकबर और आरटीआइ कार्यकर्ता राकेश चौबे ने अलग-अलग याचिका लगाई थी। दोनों ने नियुक्तियों को रद करने की अपील की थी। चार-पांच माह पहले अदालत ने आदेश दिया कि संसदीय सचिव अपने पद पर बने रहेंगे, लेकिन इस संबंध में मिलने वाले अधिकार और अतिरिक्त सुविधाओं का उपभोग नहीं कर सकेंगे।


सुप्रीम कोर्ट में लंबित है मामला

हाईकोर्ट से याचिका खारिज होने के बाद आरटीआइ कार्यकर्ता चौबे ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई थी। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करते हुए भाजपा सरकार से जवाब मांगा था। चौबे के मुताबिक अभी तक सुप्रीम कोर्ट में जवाब नहीं भेजा गया है।