रायपुर। राज्य सरकार एडवांस कार्डियक इंस्टिट्यूट (एसीआइ) क ी कैथलैब मशीन का उपचार नहीं कर पा रहा है। स्थिति यह है कि जुलाई में मशीन आउटडेटेड हो गई है तो वहीं बीते दो महीने में दो बार बंद हो चुकी है। एक बार तो बच्चों के दिल के सुराख बंद करने की सर्जरी प्लान थी और मशीन रात में बंद हो गई। आनन-फानन में इंजीनियर बुलाए, आधी रात में मशीन बनी और अगले दिन प्रोसिजर हो पाईं। एसीआइ में मरीजों का तांता लगा रहता है, क्योंकि जरुरतमंद मरीज निजी अस्पताल में लाखों रुपये खर्च नहीं कर सकता।

अब मशीन खराब है तो डॉक्टर भी बेदह परेशान हैं, क्योंकि भविष्य में कभी भी मशीन धोखा दे सकती है। बिगड़ी तो अब बनना मुश्किल है। यही कारण है कि एसीआइ प्रबंधन ने स्वास्थ्य विभाग को पत्र लिखा, जिसमें उल्लेख है- उपकरणों की खरीदी के लिए 16.50 करोड़ मंजूर हैं। इनमें से 3.50 करोड़ रुपये के उपकरण कम कर, इस राशि से मशीन अपग्रेड करवा दें।

सोचिए, डॉक्टर्स मरीजों के उपचार के लिए इस हद तक सोच सकते हैं, तो सरकार क्यों नहीं? बता दें कि कैथलैब मशीन अगर बिगड़ी और कंपनी ने बनाने से इंनकार कर दिया तो समझिए नई मशीन में 10 करोड़ रुपये खर्च आएगा। अपग्रेडेशन में सिर्फ 3.50 करोड़ रुपये खर्च होंगे, मशीन की लाइफ 10 साल बढ़ जाएगी। सरकार के 6.50 करोड़ रुपये बच जाएंगे।

राज्य पड़ोसी राज्यों के मरीज आते हैं एसीआइ- एसीआइ को छोड़ प्रदेश के किसी भी सरकारी अस्पताल, मेडिकल कॉलेज में कॉर्डियक सर्जन और कॉर्डियोलॉजिस्ट नहीं हैं। यहां सुपरस्पेशलिस्ट को 70-80 हजार रुपये मिलता है, निजी अस्पतालों में दो-तीन लाख तक। ये तो भला हो इन डॉक्टर्स का जो इलाज को सेवा समझकर, सेवाएं दे रहे हैं। बता दें कि छत्तीसगढ़ के बाहर के मरीजों को भी एसीआइ पर भरोसा है।

ये है एडवांस कॉर्डियक इंस्टिट्यूट का हाल- पूर्व की भाजपा सरकार ने एस्कॉर्ट हॉस्पिटल से भवन खाली करवाकर प्रदेश का पहला दिल का अस्पताल एडवांस कॉर्डियक इंस्टिट्यूट (एसीआइ) की स्थापना की। इस उद्देश्य से की दिल की हर बीमारी का एक जगह संपूर्ण इलाज हो सके। इसलिए तो डॉ. आंबेडकर अस्पताल के मेडिसीन विभाग से कॉर्डियोलॉजी, कॉर्डियक थोरोसिक सर्जरी यूनिट को अलग कर एसीआइ में विभाग का दर्जा दिया गया। मगर आज दिनांक तक सुविधाएं मुहैया नहीं करवाई गईं। सुपरस्पेशलिस्ट सुविधाओं के अभाव में सेवा दे रहे हैं। जानें क्या है अभाव...-

कॉर्डियोलॉजी विभाग- कैथलैब मशीन का अपग्रेडेशन नहीं हुआ है, जबकि फाइल वर्षों से चल रही है। डॉ. स्मित श्रीवास्तव एक मात्र कॉर्डियोलॉजिस्ट हैं, जबकि मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए कम से कम दो और कॉर्डियोलॉजिस्ट की जरुरत है। स्टाफ नर्स, तकनीशियन भी चाहिए। सेटअप में 200 पद हैं।

कॉर्डियक थोरोसिक सर्जरी- इस विभाग में दिल की सर्जरी होती हैं। विभाग में डॉ. केके साहू व डॉ. निशांत सिंह चंदेल पदस्थ हैं दोनों कॉर्डियक सर्जन हैं। दो साल के इंतजार, लंबी लड़ाई के बाद इन्हें हार्ट लंग्स मशीन मिली। इंस्टॉल भी हो गई,लेकिन सिर्फ इस मशीन से सर्जरी नहीं हो सकती। 100 से अधिक उपकरणों की लिस्ट ढाई साल पहले सीजीएमएससी को भेजी गई है, लेकिन सप्लाई नहीं हुई। ओपन हार्ट सर्जरी के मरीजों को लौटाया जा रहा है।

- कैथलैब मशीन को जैसे-तैसे चलाया जा रहा है। बच्चों की हार्ट प्रोसिजर प्लान की थी, उसी दिन रात में मशीन बंद हो गई। बिल्कुल, रिस्क में प्रोसिजर कर रहे हैं। वह इसलिए, ताकि मरीज न लौटें। उनका एसीआइ पर विश्वास है। मशीन का अपग्रेडेशन बेहद जरूरी है। - डॉ. स्मित श्रीवास्तव, विभागाध्यक्ष, कॉर्डियोलॉजी, एसीआइ

Posted By: Nai Dunia News Network

नईदुनिया ई-पेपर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

नईदुनिया ई-पेपर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

डाउनलोड करें नईदुनिया ऐप | पाएं मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और देश-दुनिया की सभी खबरों के साथ नईदुनिया ई-पेपर,राशिफल और कई फायदेमंद सर्विसेस

डाउनलोड करें नईदुनिया ऐप | पाएं मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और देश-दुनिया की सभी खबरों के साथ नईदुनिया ई-पेपर,राशिफल और कई फायदेमंद सर्विसेस

Raksha Bandhan 2020
Raksha Bandhan 2020