आवेश तिवारी, रायपुर। छत्तीसगढ़ में लोकसभा चुनाव का प्रथम चरण पूरा हो चुका है। अब कांग्रेस को धन के मोर्चे पर भारी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। दूसरे चरण के तहत मतदान 17 अप्रैल को होगा। प्रचार ख़त्म होने में महज कुछ ही दिन शेष हैं।

पैसे की जबरदस्त किल्लत के बीच लगभग सभी लोकसभा सीटों के कांग्रेस उम्मीदवारों में हाहाकार मच गया है। जानकारी मिली है कि लगभग सभी लोकसभा सीटों पर मांगे गए धन के सापेक्ष महज 20 से 30 फीसदी की ही राशि उपलब्ध कराई गई है, जिससे कमजोर आर्थिक स्थिति वाले उम्मीदवारों के लिए विरोधी दलों के उम्मीदवारों के खिलाफ मोर्चा लेना मुश्किल हो गया है।

पार्टी के एक बड़े नेता ने नईदुनिया को बताया कि पार्टी कोषाध्यक्ष मोतीलाल वोरा समेत सभी वरिष्ठ नेताओं से उम्मीदवारों के नाम की घोषणा के बाद लगातार धन उपलब्ध कराने को कहा जा रहा है, लेकिन हर बार बात आश्वासन पर ही जाकर समाप्त हो जा रही है। बताया गया कि इस पूरे मामले की जानकारी पार्टी उपाध्यक्ष राहुल गांधी को उनकी बालौद रैली के दौरान दे दी गई है।

ताजा घटनाक्रम में पता चला है कि प्रदेश के नेताओं ने शनिवार को छत्तीसगढ़ के प्रदेश प्रभारी बीके हरिप्रसाद और कोषाध्यक्ष मोतीलाल वोरा से इस संबंध में संपर्क साधा था, लेकिन वोरा जी ने दोटूक कह दिया है कि और पैसा देना संभव नहीं है, वहीं बीके हरिप्रसाद ने कहा है कि हम बातचीत कर समस्या के समाधान की कोशिश कर रहे हैं।

दरअसल धन की अनुपलब्धता की एक बड़ी वजह पार्टी की अंदरूनी गुटबाजी है। लोकसभा में टिकट के बंटवारे को लेकर प्रदेश कांग्रेस और पार्टी कोषाध्यक्ष मोतीलाल वोरा के बीच छत्तीस का आंकड़ा रहा है।

पार्टी सूत्रों की मानें तो रायपुर समेत कई सीटों पर मोतीलाल वोरा अपने उम्मीदवारों के नाम चाह रहे थे, लेकिन प्रदेश कांग्रेस के पदाधिकारियों ने मोतीलाल वोरा की दखलंदाजी की अनदेखी कर केन्द्रीय चुनाव कमेटी से सलाह करके उम्मीदवारों के नाम तय करा लिए , जिसके बाद मोतीलाल वोरा प्रदेश कांग्रेस के नेताओं से लगातार नाराज चल रहे हैं, जिसकी वजह से प्रदेश कांग्रेस के पैनल से चुनकर आए उम्मीदवारों को धन की कमी से दो चार होना पड़ रहा है। हांलाकि ओडिशा समेत कुछ अन्य राज्यों में भी आवश्यकता से बेहद कम धन का आवंटन किए जाने की बात सामने आ रही है।

धन की कमी की दूसरी वजह कांग्रेस पार्टी द्वारा छत्तीसगढ़ समेत देश के अन्य राज्यों की लोकसभा सीटों पर सर्वेक्षण के नतीजों के आधार पर किया गया वह त्रिस्तरीय वर्गीकरण है, जिसमे छत्तीसगढ़ की ज्यादातर सीटों को बी -और सी श्रेणी में रखा गया है ।

पार्टी सूत्रों का कहना है कि ए श्रेणी के अंतर्गत वे सीटें हैं, जिनमें जितने की प्रबल संभावना है ,जबकि बी श्रेणी के अंतर्गत कांटे की टक्कर वाली सीटें और सी श्रेणी के अंतर्गत वे सीटें हैं, जिनमें पार्टी को जीत मुश्किल लग रही है। हांलाकि पार्टी के कुछ नेता मान रहे हैं कि इस वर्गीकरण में भी गुटबाजी की राजनीति है।

जानबूझ कर जीत की संभावनाओं वाली सीटों को गलत श्रेणी में रखा गया है। दरअसल प्रदेश कांग्रेस इन विषम परिस्थितियों में पांच से छह सीटों पर जीत हासिल करने की उम्मीद कर रही है । पार्टी के एक बड़े नेता ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि हम सिर्फ आग्रह और अनुग्रह कर सकते हैं। अगले एक दो दिनों में वरिष्ठ नेताओं से मिलकर फिर से धन की उपलब्धता के लिए प्रयास किए जाएंगे ।

कहां-कहां कितना धन

पार्टी सूत्रों की मानें तो प्रदेश की 11 लोकसभा सीटों पर अब तक कांग्रेस पार्टी द्वारा बमुश्किल 12 से 15 करोड़ रुपए ही दिए गए हैं, जबकि प्रति लोकसभा सीट पांच-पांच करोड़ की मांग की गई थी । इनमें से बस्तर सीट पर जहां 10 को वोट पड़े हैं, वहां 1.5 करोड़ ,कांकेर में 1.5 करोड़ और नया लोकसभा सीटों पर एक एक करोड़ रुपए दिए गए हैं। बताया जाता है कि इन्हीं लोकसभा सीटों पर भाजपा प्रति प्रत्याशी 10 -10 करोड़ रुपए खर्च करने का लक्ष्य रखी हुई है।

अगर पार्टी के एक बड़े नेता की मानें तो दूसरे और तीसरे चरण के उम्मीदवारों को अधिकतम 1.5 करोड़ रुपए देने का अंतिम तौर पर फैसला ले लिया गया है। उससे ज्यादा पैसा देने से पार्टी साफ इंकार कर रही है। आलम यह है कि प्रदेश के नेताओं को सभा के लिए हेलिकॉप्टर किराए पर लेना मुश्किल हो रहा है। प्रदेश कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि जब एक एक पोलिंग बूथ पर इंतजाम के लिए न्यूनतम पांच हजार रुपए खर्च होते हैं तो इतने कम पैसों में चुनाव कैसे लड़ा जाएगा ये चिंता का विषय है ।

Posted By: