रायपुर। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने केंद्र सरकार से छत्तीसगढ़ में भारतीय खनन ब्यूरो (आईबीएम) के कार्यालय की स्थापना की मांग करते हुए यह भी कहा है कि छत्तीसगढ़ में केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रम एनएमडीसी द्वारा बैलाडीला में निकाले जा रहे लौह अयस्क की आपूर्ति में राज्य के स्थानीय उद्योगों को प्राथमिकता मिलना चाहिए। राज्य निर्माण के बाद यहां औद्योगिक विकास की दृष्टि से खनिज गतिविधियों में तेजी आई है। राज्य का अधिकांश खनिज धारित क्षेत्र केंद्र और राज्य शासन के सार्वजनिक उपक्रमों के पास है। अगर छत्तीसगढ़ में इस ब्यूरो का ऑफिस खुल जाए, तो प्रदेश के सार्वजनिक उपक्रमों और निजी क्षेत्र के उद्योगों को अपनी खनिज संबंधी कार्ययोजना की स्वीकृति के लिए ब्यूरो के नागपुर कार्यालय पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। मुख्यमंत्री ने शुक्रवार को अपने निवास कार्यालय में केंद्रीय खनिज सचिव अरुप के. पुजारी के साथ एक बैठक में यह मांग रखी।

डॉ. सिंह ने बैठक में कोयला, लौह अयस्क और बॉक्साइट जैसी मुख्य खनिजों की रायल्टी की दरें बढ़ाने के लिए वर्तमान दरों के पुनरीक्षण की भी मांग की। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार को वित्तीय वर्ष 2013-14 में मुख्य खनिजों से 3036 करोड़ रुपए और गौण खनिजों से 180 करोड़ रुपए की रायल्टी मिली है। मुख्य खनिजों की रायल्टी की दरें बढ़ने पर राजस्व में और भी वृद्धि हो सकती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यहां रेत जैसी गौण खनिजों के व्यापार का अधिकार पंचायतों और नगरीय निकायों को सौंपा गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि खनिज आधारित उद्योग भी राज्य के आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। प्रदेश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में खनिजों का योगदान दस प्रतिशत है। यहां 80 प्रतिशत बड़े उद्योग खनिज आधारित हैं। भिलाई इस्पात संयंत्र, बाल्को एल्युमिनियम संयंत्र, ताप बिजली संयंत्र, सीमेंट संयंत्र और 90 से ज्यादा स्पंज आयरन उद्योग छत्तीसगढ़ में हैं। एनएमडीसी द्वारा बैलाडीला में लौह अयस्क खदानों का संचालन किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ की यह मांग रही है कि एनएमडीसी को इन खदानों से निकलने वाले लौह अयस्क की आपूर्ति में स्थानीय उद्योगों को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए। वैसे भी छत्तीसगढ़ सरकार की खनिज नीति में यह प्रावधान किया गया है कि खनिजों पर आधारित उद्योग संबंधित खदानों वाले इलाकों में लगें, ताकि उन खनिजों का उपयोग राज्य के उद्योगों में हो और देश के साथ-साथ प्रदेश को भी आर्थिक दृष्टि से फायदा पहुंचे। प्रदेश में स्पंज आयरन और स्टील के अनेक उद्योग हैं। एनएमडीसी से कच्चे माल के रूप में लौह अयस्क सबसे पहले उन्हें मिलना चाहिए। एनएमडीसी को इस बारे में एक स्पष्ट नीति बनानी चाहिए।

रेत की कीमत पर चिंता

मुख्यमंत्री ने केंद्रीय खनिज सचिव से चर्चा के दौरान रेत उत्खनन के मामलों में ग्रीन ट्रिब्यूनल से क्लीयरेंस की अनिवार्यता का जिक्र करते हुए कहा कि इससे कई दिक्कतें आ रही हैं और निजी मकान तथा सरकारी निर्माण कार्यों के लिए भी रेत की आपूर्ति में कठिनाई हो रही है। रेत की कीमतें बढ़ने लगी हैं। इसे ध्यान में रखकर प्रक्रिया का सरलीकरण होना चाहिए, ताकि जनता को भी राहत मिल सके। खनिज सचिव सुबोध कुमार सिंह ने बताया कि छत्तीसगढ़ कोयला, डोलोमाइट और टिन अयस्क उत्पादन में देश में पहले, लौह अयस्क में दूसरे, बॉक्साइट में पांचवें और लाइमस्टोन उत्पादन में सातवें नंबर पर है।

रेल कॉरिडॉर भी प्रस्तावित

बैठक में राज्य की तीन प्रस्तावित रेल कॉरिडॉर परियोजनाओं की भी जानकारी दी गई। केंद्रीय सचिव को बताया गया कि उत्तरी रेल कॉरिडॉर कटघोरा से परसा होते हुए सूरजपुर तक, पूर्वी कॉरिडॉर धरमजयगढ़-घरघोड़ा होते हुए भूपदेवपुर तक और पूर्व-पश्चिम कॉरिडॉर गेवरा रोड से पेण्ड्रा रोड तक प्रस्तावित है। इसके अलावा दल्लीराजहरा से रावघाट होते हुए जगदलपुर तक रेल लाइन परियोजना पर भी काम चल रहा है। खनिज नीति में वैल्यू एडीशन को बढ़ावा देने की नीति भी शामिल है। केंद्रीय खनिज सचिव ने कहा कि छत्तीसगढ़ में कई खदान क्षेत्रों में संबंधित कंपनियों द्वारा पर्यावरण की रक्षा के लिए सघन पौधरोपण भी करवाया गया है। बैठक में मुख्य सचिव विवेक ढांड, एसीएस डीएस मिा, प्रमुख सचिव एन. बैजेन्द्र कुमार, अमिताभ जैन व अमन कुमार सिंह भी मौजूद थे।