रायपुर (राज्य ब्यूरो)। छत्तीसगढ़ सरकार प्रसिद्ध रंगकर्मी हबीब तनवीर और पर्यावरणविद् अनुपम मिश्र के नाम पर पुरस्कार देगी। गांधी जयंती के अवसर पर राजधानी के शहीद स्माक भवन में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इनकी घोषणा की।

'गांधी, युवा और नए भारत की चुनौतियां" विषय पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री बघेल ने वाटर रिचार्जिंग के क्षेत्र में बेहतर काम करने वाले व्यक्ति और संस्था को अनुपम मिश्र पुरस्कार देने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में प्रसिद्ध रंगकर्मी हबीब तनवीर के नाम पर भी पुरस्कार दिया जाएगा। कार्यक्रम में बघेल ने आशीष सिंह द्वारा लिखित पुस्तक 'सोनाखान 1857" और आमिर हाशमी द्वारा लिखित पुस्तक 'जोहार गांधी" का भी विमोचन किया।

राजीव युवा मितान क्लब के लगभग साढ़े तीन हजार युवा सदस्यों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री बघेल ने कहा कि पूरी दुनिया में जितनी भी क्रांति हुई है, वह युवाओं से हुई है। अन्याय के विरुद्ध प्रतिशोध की भावना जागृत हुई, परिवर्तन की अलख जगी। गांधीजी ने स्वावलंबन, प्रेम, सत्य और अहिंसा का रास्ता दिखाया और आजादी दिलाई। गांधीजी ने वस्त्र त्यागकर हिंदुस्तान की न्यूनतम आवश्यकताओं की परंपरा का निर्वहन किया। अगर आगे बढ़ना है, तो हमें भी न्यूनतम आवश्यकताएं रखनी चाहिए। उन्होंने युवाओं से कहा कि अपना समय और ऊर्जा नए विचारों और कामों के लिए खर्च करें।

गांधीजी चाहते थे कि युवा आत्मनिर्भर बनें, स्वावलंबी बनें, आगे बढ़ें। गांधीजी ने अहिंसा, सत्य और प्रेम से लड़ाई लड़ी। मेहनत और समर्पण से स्व-रोजगार गढ़कर स्वावलंबी बनना ही गांधीजी का रास्ता है। उन्होंने जरूरतमंद और पीड़ित मानवता की सेवा का रास्ता दिखाया। बघेल ने भेंट-मुलाकात के दौरान मिले बालोद के युवा किसान दिव्यांग धुर्वे का उदाहरण देकर युवाओं को स्वरोजगार के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि मेहनतकश स्व-सहायता समूहों की बहनों के चेहरे पर जो आत्मविश्वास का भाव है, वह हमारी सबसे बड़ी पूंजी है। मेहनत से आत्मविश्वास आता है, जिससे बड़ी से बड़ी लड़ाई जीती जा सकती है।

गांधी ने कर्म और श्रम का किया सम्मान

मुख्यमंत्री बघेल ने कहा कि आज का दिन महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री को याद करने का दिन है। महात्मा गांधी ने अपने जीवनकाल में जिन चीजों का प्रयोग किया, वह सभी वर्धा में स्थित मगन संग्रहालय में हैं। उन्होंने चरखा, कृषि औजारों पर लगातार शोध करवाया। गांधीजी ने कर्म और श्रम का सम्मान किया। वे किसानों के बीच जाकर खेतों में काम करते थे। चरखा चलाकर उन्होंने बुनकर का सम्मान किया। इसी तरह गांधीजी ने मेहनत और श्रम का सम्मान किया। श्रम के सम्मान से लाखों-करोड़ों लोग जुड़े और एकजुट होकर खड़े हुए, जिन्हें हराना मुश्किल था। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमें सामाजिक और आर्थिक रूप से आजादी प्राप्त करना अभी बाकी हैं। युवा हमारी ताकत हैं। युवा ऊर्जा को दिशा देने की जरूरत है। उन्हें अवसर देने के लिए सामूहिक और संगठित होकर प्रयास करने की जरूरत है।

पराली से होने वाले प्रदूषण को रोकेगा पैरा दान

सीएम बघेल ने कहा कि छत्तीसगढ़ ने स्वावलंबन और स्वरोजगार की दिशा में अपने कदम बढ़ाए हैं। राज्य सरकार ने गोबर, गोमूत्र की खरीदी शुरू की है। अब तक 20 लाख क्विंटल वर्मी कंपोस्ट हम बना चुके हैं। पूरे देश में सबसे ज्यादा आठ हजार 500 खाद बनाने की फैक्ट्री हमारे यहां है। इससे हमारा प्रदेश जैविक राज्य की ओर बढ़ रहा है। नौजवान जैविक कृषि से जुड़कर लाखों रुपये की आमदनी कर रहे हैं। छत्तीसगढ़ में पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी कई काम हो रहे हैं। हमने वाटर रिचार्जिंग करना शुरू किया। हमने पराली जलाने से होने वाले प्रदूषण से बचने के लिए किसानों से पैरा दान की अपील की। इससे जल, जंगल, जमीन की उपयोगिता बढ़ी है।

Posted By: Pramod Sahu

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