रायपुर (राज्य ब्यूरो)। राज्य में पूर्ण शराब बंदी लागू करने की अनुशंसा के लिए गठित राजनीतिक समिति की मंगलवार को बैठक हुई। समिति के अध्यक्ष व विधायक सत्यनारायण शर्मा की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में शराबबंदी वाले राज्यों का अध्ययन दौरा करने का फैसला किया गया गया है। यह राजनीतिक समिति की तीसरी बैठक थी।

समिति के अध्यक्ष शर्मा ने बताया कि पूर्ण शराबबंदी के लिए की जाने वाली आवश्यक तैयारी के अध्ययन के लिए दल का गठन किया जाएगा। अध्ययन दल द्वारा अन्य राज्यों जहां वर्तमान में पूर्ण शराबबंदी लागू है, ऐसे राज्य जहां पूर्ण शराबबंदी लागू थी लेकिन बाद में शराब का विक्रय फिर से प्रारंभ किया गया का दौरा किया जाएगा। साथ ही समिति देश के एक अनुसूचित जनजाति बहुल राज्य का भी अध्ययन भ्रमण कर रिपोर्ट तैयार करेगी। इसके लिए संबंधित राज्यों को अवगत कराते हुए अनुमति ली जाएगी। अनुमति मिलने पर अध्ययन भ्रमण के लिए कार्यक्रम बनाया जाएगा।

बैठक में सदस्यों ने राज्य में शराब की अवैध बिक्री पर प्रभावी नियंत्रण करने का सुझाव दिया। साथ ही अवैध शराब की जप्ती पर बनाए जाने वाले पंचनामे पर संबंधित ग्राम के सरपंच, ग्राम पटेल, कोतवाल और समाज प्रमुख/प्रबुद्ध नागरिकों के हस्ताक्षर अनिवार्य किए जाने का सुझाव दिया गया। सदस्यों ने शराब दुकानों में सीसीटीवी कैमरा चालू रखने, शराब के अलावा अन्य वैकल्पिक नशे पर प्रभावी नियंत्रण किए जाने, विभागीय टोल फ्री नंबर 14405 पर प्राप्त शिकायतों का त्वरित निराकरण किए जाने सहित अन्य सुझाव दिए।

बैठक मंगलवार को नया रायपुर के वाणिज्य कर एवं जीएसटी भवन के आबकारी आयुक्त कार्यालय में हुई। आबकारी आयुक्त निरंजन दास ने पूर्व बैठकों की कार्यवाही विवरण एवं पालन प्रतिवेदन से अवगत कराया। बैठक में समिति के सदस्य संसदीय सचिव रश्मि सिंह, शिशुपाल सोरी, कुंवर सिंह निषाद, विधायक केशव चंद्रा, उत्तरी जांगड़े, द्वारकाधीश यादव, धनेश्वर साहू और पुरुषोत्तम कंवर सहित आबकारी विभाग के अधिकारी उपस्थित थे।

समिति में नहीं है भाजपा का कोई सदस्य

समिति के अध्यक्ष शर्मा ने बताया कि राजनीतिक समिति में सदस्य के रूप में शामिल करने के लिए भाजपा और जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) से दो-दो नाम मांगे गए थे। दोनों पार्टियों ने विधायकों का नाम देने से इन्कार कर दिया। अभी समिति में कांग्रेस के अतिरिक्त बसपा के विधायक शामिल हैं।

शराबबंदी के लिए तीन तरह की समितियां

कांग्रेस ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में राज्य में पूर्ण शराबबंदी लागू करने का वचन दिया था। सत्ता में आने के बाद इसे लागू करने के लिए तीन समितियों का गठन किया गया है। इसमें एक प्रशासनिक समिति है, जिसमें अधिकारी शामिल हैं। दूसरी सामाजिक संगठनों की और तीसरी राजनीतिक दलों की समिति है।

Posted By: Pramod Sahu

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