संदीप तिवारी। रायपुर। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का उद्देश्य 2035 तक व्यावसायिक शिक्षा सहित उच्च शिक्षा में सकल नामांकन अनुपात को 26.3 प्रतिशत से बढ़ाकर 50 प्रतिशत तक करना है। साथ ही यह सुनिश्चित करना है कि सभी उच्च शिक्षा संस्थानों का उद्देश्य बहु-विषयक संस्थान बनना हो, जिनमें से प्रत्येक में 3,000 या अधिक छात्र हों। छत्तीसगढ़ में यदि गौर करें तो यहां सकल नामांकन दर अब तक 18 प्रतिशत ही है।

इसकी वजह यह है कि छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के बाद से अब तक यहां उच्च शिक्षा की स्थिति नाजुक ही बनी हुई है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति की सिफारिश के अनुसार व्यावसायिक शिक्षा को बढ़ावा देना है और सभी कालेजों में पर्याप्त फैकल्टीज की नियुक्ति करनी है ताकि स्नातक स्तर पर भी बीए, बीकाम, बीएससी, बीबीए आदि की पढ़ाई में सेमेस्टर सिस्टम लाया जा सके।

चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम होने के साथ-साथ स्नातक के बाद ही शोध भी करना है मगर क्या इसके लिए हमारे प्रदेश के कालेज अपग्रेड हैं, यह बड़ा प्रश्न है। हालांकि इस बात से कतई गुरेज नहीं किया जा सकता है कि कांग्रेस सरकार आने के बाद प्रदेश में पहली बार 14 हजार 580 पदों पर भर्ती हुई है मगर सहायक प्राध्यापकों के पद भर लेना ही काफी नहीं है। यहां प्राध्यापकों के पदों को भरना भी जरूरी है।

सरकार ने की पहल पर नियमों में उलझी प्रक्रिया

डेढ़ वर्ष पहले मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की मंशा के अनुसार छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग ने पहली बार 595 प्राध्यापकों के पदों को भरने के लिए विज्ञापन जारी किया था मगर यह विवादों में फंसा हुआ है। बताया जाता है कि यह भी नियम आड़े आ गए हैं। नतीजा यह हो रहा है कि प्रदेश के कालेजों में मानदंडों के अनुरूप प्राध्यापकों की कमी खल रही है। इसका असर पढ़ाई से लेकर शोध और यहां तक कि कालेजों के असेसमेंट में भी पड़ रहा है।

कांग्रेस सरकार आने के बाद विभागीय उच्च शिक्षा मंत्री उमेश पटेल ने अफसरों से उच्च शिक्षण संस्थाओं की ग्रेडिंग के लिए मिशन मोड पर काम करने के लिए नसीहत दी थी और अधिकारियों ने मिशन मोड चलाकर 78 प्रतिशत कालेजों की ग्रेडिंग भी कराई है। विभागीय सचिव भुवनेश यादव के मुताबिक प्रध्यापकों की भर्ती और पदोन्न्ति दोनों जल्द होगी। उच्च शिक्षा विभाग ने इसके लिए तमाम तैयारियां कर ली हैं।

नैक की ग्रेडिंग नहीं होने से शोध का दायरा भी सिमटा

नैक (राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद) के ग्रेडेशन को लेकर प्रदेश में संचालित शासकीय विश्वविद्यालयों, कालेजों द्वारा प्रयास तो किया जाता है, पर यहां प्राध्यापकों की कमी के कारण अंक कम मिलते हैं। नैक की ग्रेडिंग के लिए सबसे प्रमुख फैक्टर में यहां प्राध्यापकों का होना जरूरी है। प्राध्यापक नहीं होने से यहां रिसर्च का दायरा सिमट गया है।

यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन यानी यूजीसी के नियमों के तहत एक सहायक प्राध्यापक के अंतर्गत एक साथ चार ही शोधार्थी रिसर्च कर सकते हैं। ऐसे में यहां पहले से ही सहायक प्राध्यापकों के अंतर्गत रिसर्च की सीट भरी हुई है। यदि सहायक प्राध्यापकों को पदोन्न्ति मिलती तो एक प्राध्यापक के अंतर्गत आठ शोधार्थी रिसर्च यानी पीएचडी कर पाते। विभाग की अनदेखी से रिसर्च के क्षेत्र में प्रदेश लगातार पिछड़ता जा रहा है और यहां उच्च शिक्षा की दुर्गति हो रही है। अब स्नातक के बाद शोध कराने का प्रविधान होगा तो शोधकर्ताओं के लिए मार्गदर्शक (गाइड) कहां से मिलेंगे, यह बड़ा सवाल होगा।

गोपनीय चरित्रावली और नहीं हो पाई पदोन्न्ति

प्रदेश में उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारियों की लापरवाही चलते सहायक प्राध्यापकों की पिछले कई वर्षों से पदोन्न्ति अटकी हुई है। इसमें करीब 350 सहायक प्राध्यापक प्रभावित हैं। इनकी गोपनीय चरित्रावली ही गायब हो गई है। इन प्राध्यापकों में पदोन्न्ति नहीं होने से भारी रोष है। नियमानुसार 13 वर्ष की सेवा के बाद सहायक प्राध्यापकों की प्राध्यापक पद पर पदोन्न्ति का प्रविधान है, लेकिन कई सहायक प्राध्यापक 25-30 साल से सेवारत हैं। वहीं कुछ सेवानिवृत्त भी हो गए तो कुछ कगार पर पहुंच चुके हैं। नियमानुसार हर साल विभागीय पदोन्न्ति समिति (डीपीसी) होना चाहिए, लेकिन लंबे समय से यह नहीं होने के कारण मामला अटका हुआ है। सहायक प्राध्यापकों की अंतिम बार 2004 में पदोन्न्ति हुई थी।

पदोन्न्ति होगी तो खुलेगा नए पदों के लिए रास्ता

प्रदेश के कालेज-विश्वविद्यालय में जो सहायक प्राध्यापक पदोन्न्ति के हकदार हैं, यदि उनको पदोन्न्ति दी जाती है तो सरकार को कोई वित्तीय भार नहीं आएगा, क्योंकि वर्तमान में सहायक प्राध्यापकों को प्राध्यापक के स्तर का वेतन मिल रहा है। वहीं पदोन्न्ति नहीं होने की वजह से लंबे समय से प्राध्यापकों व प्राचार्यों के पद खाली पड़े हुए हैं। यदि पदोन्न्ति होगी तो सहायक प्राध्यापकों के पद भी खाली हो जाएंगे और नई भर्ती की राह भी खुलेगी।

छत्तीसगढ़ महाविद्यालयीन शिक्षक एवं अधिकारी संघ डा. केके बिंदल ने कहा, पदोन्न्ति को लेकर हमने पहले भी सरकार को प्रस्ताव दिया है और अब फिर हमारा प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री से मुलाकात करेगा।

Posted By: Ashish Kumar Gupta

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